दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन पर शर्मिला टैगोर ने उन्हें याद करते हुए यह भावुक शब्द लिखे हैं। 92 वर्ष की उम्र में आशा भोसले का जाना भारतीय फिल्म संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शर्मिला ने इस कॉलम में आशा भोसले से हुई मुलाकात, पहली बार गले लगाने का जिक्र किया है।
‘डल झील पर मिली पहली गर्मजोशी आज भी याद है’
शर्मिला टैगोर ने अपने कॉलम की शुरुआत आशा भोसले से हुई मुलाकात से करते हुए लिखा, ”मैंने पहली बार उनकी गर्मजोशी 1963 में ‘कश्मीर की कली’ की शूटिंग के दौरान महसूस की थी। श्रीनगर की खूबसूरत डल झील पर ‘दीवाना हुआ बादल’ गाना फिल्माया जा रहा था। यह हिंदी फिल्म में मेरा पहला लिप-सिंक अनुभव था और मैं थोड़ी घबराई हुई थी। शॉट पूरा होने के बाद आशा जी ने मुझे गले लगाया और मेरी तारीफ की। एक वरिष्ठ कलाकार का यह सहज और स्नेहभरा व्यवहार मेरे लिए बहुत मायने रखता था। वह पल आज भी मेरी सबसे प्यारी यादों में से एक है।”
‘पड़ोसी होने के नाते रिश्ता और भी खास था’
शर्मिला टैगोर ने आगे लिखा, ”बॉम्बे में हम कई साल तक पड़ोसी रहे। मैं कारमाइकल रोड के ‘रश्मि’ में रहती थी और आशा जी पेडर रोड के ‘प्रभा कुंज’ में। इस नजदीकी ने हमें स्टूडियो और रिकॉर्डिंग की दुनिया से बाहर भी एक स्नेहपूर्ण रिश्ता साझा करने का मौका दिया। हम अक्सर मिलते, बातें करते और यह सुकून रहता कि हम एक-दूसरे के करीब हैं।”
‘उनकी आवाज में हर रंग था’
शर्मिला लिखती हैं, ”आशा जी की आवाज में एक अनोखी विविधता थी। वो चुलबुले लोक गीतों से लेकर कैबरे नंबर तक, रोमांटिक डुएट से लेकर ऊर्जावान गानों तक सब कुछ सहजता से गा सकती थीं।”
उन्होंने आगे लिखा, ”मेरी फिल्म ‘एन इवनिंग इन अ पेरिस’ का गाना ‘रात के हमसफर’ उनकी आवाज में चांदनी रात की नर्मी और प्यार को खूबसूरती से पकड़ता है। वहीं ‘जूबी जूबी’ अपने समय से आगे, एक नई ऊर्जा और आधुनिकता लेकर आया था।”
‘हर सफलता पर उनका संदेश जरूर आता था’
शर्मिला ने लिखा, ”आशा जी का दिल बेहद उदार था। जब भी मुझे कोई अवॉर्ड मिलता, उनका संदेश या कॉल जरूर आता। वह अपने साथियों की सफलता को सच्चे दिल से सेलिब्रेट करती थीं।”
वो आगे लिखती हैं, ”2011 में टोरंटो में IIFA समारोह के दौरान हम दोनों को एक साथ सम्मानित किया गया। वह पल हमारे लंबे सफर का एक खास पड़ाव था, जो डल झील से शुरू हुआ था।”
‘हर पीढ़ी के साथ खुद को नया बनाया’
शर्मिला ने लिखा, ”मुझे हमेशा यह देखकर हैरानी और खुशी होती थी कि आशा जी हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनी रहीं। हाल के समय में भी वह उसी ऊर्जा के साथ परफॉर्म करती थीं।”
जानम समझा करो गाने का जिक्र करते हुए शर्मिला टैगोर ने लिखा, ”1990 के दशक में जब उन्होंने अपना पहला पॉप गाना ‘जानम समझा करो’ रिलीज किया, तो मैं बेहद रोमांचित थी। उस उम्र में भी इतनी ताजगी और ऊर्जा के साथ गाना गाना उनकी खुद को नया करने की अद्भुत क्षमता को दिखाता है।”
‘एक अनमोल विरासत छोड़ गईं’
शर्मिला टैगोर ने लिखा, ”उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे चमकदार हस्तियों में से एक को खो दिया है। लेकिन उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेगी। मेरे लिए वह सिर्फ एक महान कलाकार नहीं, बल्कि एक स्नेही पड़ोसी, मार्गदर्शक और वह आवाज थीं, जिसने मेरी फिल्मों को जीवन दिया।”
शर्मिला ने अपना लेख खत्म करते हुए लिखा, ”धन्यवाद आशा जी- डल झील की उस पहली झप्पी के लिए, हर बार हौसला बढ़ाने वाले संदेशों के लिए, टोरंटो में साझा मंच के लिए और उस अमर आवाज के लिए, जिसमें प्यार, नजाकत और एहसास बसता था।”
”उनके गाने हमेशा हमारे दिलों में गूंजते रहेंगे।”
