शम्मी कपूर ने सुबह के 4 बजे रचाया था गीता बाली से ब्याह, लिपस्टिक से भर डाली थी मांग, पढ़ें पूरा किस्सा

शम्मी कपूर ने उस खूबसूरत रात का एक दफा खुद जिक्र किया था, जब अचानक उन्होंने गीता बाली की मांग भर दी थी और आधी रात में एक्टर ने उनसे शादी रचा ली थी।

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शम्मी कपूर और गीता बाली (फोटो सोर्स – सोशल मीडिया ट्विटर)

शम्मी कपूर और गीता बाली की प्रेम कहानी बॉलीवुड की बेहद दिलचस्प कहानियों में से एक है। शम्मी कपूर और गीता बाली को एक फिल्म के सेट पर ही एक-दूसरे से प्यार हो गया था। 3 साल बाद दोनों ने एक-दूसरे से अचानक शादी का फैसला ले लिया था। शम्मी कपूर ने उस खूबसूरत रात का एक दफा खुद जिक्र किया था, जब अचानक उन्होंने गीता बाली की मांग भर दी थी और आधी रात को उनसे शादी रचा ली थी।

‘क्विंट’ को दिए इंटरव्यू में शम्मी कपूर ने बताया था- ‘मैंने गीता के साथ 3 फिल्मों में काम किया था। कॉफी हाउस, कोका कोला और मोहर। हम दोनों एक दूसरे को उस वक्त बहुत पसंद करते थे। धीरे धीरे हम एक दूसरे को प्यार करने लगे। उस वक्त गीता बाली एक स्टार थीं और मैं कुछ भी नहीं था। फिर भी उन्हें मुझपर भरोसा था। उन्होंने मुझपर विश्वास किया और मेरा हाथ थामा। मैंने भी उनसे वादा किया। 3 सालों के बाद एक दिन अचानक हमने शादी कर ली।’

शम्मी कपूर ने बताया था- साल 1955 में हमारी शादी हुई। हम उस वक्त बांद्रा में थे सुबह के 4 बज रहे थे। हमने सात फेरे लिए और तभी गीता ने अपने पर्स में से लाल लिपस्टिक निकाली और मुझे कहा कि ‘मेरी मांग में डाल दीजिए।’ गीता ने ये कहा और मैंने लिपस्टिक से उसकी मांग भर दी। वह पल बहुत सुंदर था। मेरे लिए गीता एक बहुत तगड़ा सपोर्ट थीं। उनके निधन के बाद मेरे जीवन में खालीपन आ गया, मैं अकेला पड़ गया।’

शम्मी कपूर ने बताया था कि ‘उस वक्त मेरे दिल और दिमाग में कई तरह के सवाल थे। गीता मुझसे साल भर बड़ी थीं। गीता ने मेरे पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ को-स्टार के तौर पर काम किया था। साल 1952 में उन्होंने Anand Math नाम की एक फिल्म में काम किया था। गीता ने मेरे भाई राज कपूर के साथ किदार शर्मा की फिल्म ‘बावरे नयन’ में भी काम किया था, जो कि साल 1950 में आई थी।’

शम्मी कपूर ने कहा था- ‘मैं समझ नहीं पा रहा था कि मेरा परिवार इस बात पर कैसे रिएक्ट करेगा। लेकिन लेकिन आशंकाएं क्षणिक थीं। मैं अपने भीतर अडिग था कि वह लड़की गीता ही हो सकती है। ये वही लड़की है जिसके साथ मैं बिना सोचे अपनी सारी जिंदगी बिता सकता हूं। विडंबना यह है कि बाधा स्वयं गीता थीं। एक व्यावहारिक, सीधी-सादी महिला, वह मुझे सावधान करती रहीं, ‘शम्मी, आई लव यू। लेकिन मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती। मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती। मैं अपने परिवार के खिलाफ नहीं जा सकती। मेरा परिवार मुझपर टिका है। वह कहां जाएंगे?’

शम्मी ने इस इंटरव्यू में ये भी खुलासा किया था कि- ‘हम 4 महीने तक एक दूसरे से बात किए बगैर रहे। हम रोते थे, निराशा में रहते थे। फिर एक दिन- 23 अगस्त 1955 को गीता और मैं मिले। मैंने गीता को फिर से वहां प्रपोज किया। वह मुझे देखकर स्माइल करने लगीं। पर कुछ बोली नहीं। फिर कुछ रुक कर गीता ने कहा- ‘ठीक है शम्मी, चलो शादी करते हैं। लेकिन यह अभी होना है’ और बाकी, जैसा कि हम कहते हैं, सब इतिहास है। गीता ने उसी वक्त अपने बैग से लिपस्टिक निकाली और कहा कि मेरी मांग में भर दो। मैंने भर दी।’

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