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हमारी याद आएगी: मोतीलाल…आसमान से आया फरिश्ता प्यार का सबक सिखलाने

परंपरावादी दर्शकों ने ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ देखकर खूब हल्ला किया कि कोई प्यार का इजहार इस तरह हवा में लटक कर करता है क्या? आम जिंदगी में ऐसा कौन करेगा? लेकिन आम जिंदगी में भी कुछ इसी तरह से इश्क का इजहार एक शख्स कर चुका था। यह शख्स एक मशहूर अभिनेता था।

मोती लाल।

दिलीप कुमार राजकुमार की ‘पैगाम’ हो या राज कपूर की ‘जागते रहो’, आरके नारायणन के ‘पेंटर आॅफ मालगुड़ी’ पर बनी ‘मिस्टर संपत’ हो या दिलीप कुमार की ‘देवदास’ में चुन्नी बाबू की भूमिका, मोतीलाल ने हर बार अपनी अनोखी अभिनय शैली से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। तीन दशकों तक फिल्मजगत में स्टाइल से जिए और सुपर स्टारों द्वारा याद किए गए मोतीलाल की आज 110वीं जयंती है।

शम्मी कपूर ने प्रेम का इजहार कुछ अनोखे ढंग से 1967 की ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ फिल्म में किया था। हेलिकॉप्टर से हवा में लटकते हुए वह शर्मिला टैगोर से ‘आसमान से आया फरिश्ता प्यार का सबक सिखलाने…’ गाना गाकर इश्क का इजहार करते हैं। नीचे नीले समुंदर में नीली बिकनी पहने वाटर स्केटिंग करती शर्मिला टैगोर थीं।

हालांकि दस साल पहले शम्मी निजी जिंदगी में अनोखे तरीके से न सिर्फ प्यार का इजहार बल्कि शादी भी कर चुके थे। भर बरसात में रात में प्रेमिका गीता बाली को उठाकर मंदिर में ले गए। चुपचाप शादी की और सिंदूर न मिला तो लिप-स्टिक से मांग भर दी।

परंपरावादी दर्शकों ने ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ देखकर खूब हल्ला किया कि कोई प्यार का इजहार इस तरह हवा में लटक कर करता है क्या? आम जिंदगी में ऐसा कौन करेगा? लेकिन आम जिंदगी में भी कुछ इसी तरह से इश्क का इजहार एक शख्स कर चुका था। यह शख्स एक मशहूर अभिनेता था।

जब हीरो एक मशहूर अभिनेत्री से भावनात्मक तौर पर जुड़ा, तो उसने प्यार का इजहार हवा में रहते हुए किया था, एक हेलिकॉप्टर में बैठकर। ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ में तो शम्मी कपूर हेलिकॉप्टर से सिर्फ लटके भर थे, इस हीरो ने तो बाकायादा मुंबई की एक कंपनी से हेलिकॉप्टर किराए पर लिया और उसे चलाते हुए खंडाला जा पहुंचा, क्योंकि अभिनेत्री मुंबई छोड़ खंडाला आ गई थी और अभिनेता को उसकी याद सता रही थी।

लिहाजा अभिनेता, जो बाकायदा लाइसेंसशुदा पायलटथा, ने किराए पर हेलिकॉप्टर लिया और उड़कर जा पहुंचा खंडाला। खंडाला में अभिनेता ने अभिनेत्री के बंगले के ऊपर हेलिकॉप्टर से खूब चक्कर लगाए। हाथ हिलाकर अभिनेत्री का अभिवादन किया और ‘आइ लव यू’ लिखा प्रेम पत्र पत्थर से बांध अभिनेत्री के बंगले में गिराया। यह अभिनेता थे हिंदी सिनेमा में पहले नेचुरल एक्टर माने जाने वाले मोतीलाल राजवंश और अभिनेत्री थी काजोल की नानी, नूतन और तनुजा की मां शोभना समर्थ।

मोतीलाल 1933-34 में दिल्ली से मुंबई नौसेना में भर्ती होने गए थे, लेकिन बीमार पड़ गए। किस्मत ने उन्हें सिनेमा की दुनिया में पहुंचा दिया। जब नाटक, नौटंकी और थियेटरों की दुनिया से आए कलाकार जोर-जोर से संवाद बोल रहे थे, मुखमुद्राएं बनाकर ओवर एक्ंिटग कर रहे थे, मोतीलाल ने सहज अभिनय का रास्ता अपनाया, जो खूब पसंद किया गया।

शराब सेवन, घोड़ों पर दांव लगाने के लिए रेसकोर्स जाना और जुआ, तीन चीजें मोतीलाल की कमजोरी थीं। इसी कारण जीवन के अंतिम दिन मोतीलाल को आर्थिक संकटों में गुजारने पड़े। पति से अलग होने के बाद भावनात्मक तौर पर शोभना समर्थ मोतीलाल के करीब आर्इं, क्योंकि वह मोतीलाल में अपने दिवंगत पिता प्रभाकर शिलोत्री (शिलोत्री बैंक के मालिक) की झलक देखती थीं।

यह एक अनोखा रिश्ता था। कुछ कुछ आज के ‘लिव इन रिलेशनशिप’ जैसा। मगर मोतीलाल-शोभना समर्थ का रिश्ता लिव इन रिलेशनशिप से आगे बढ़ कर एक बेनाम रिश्ता था। शोभना समर्थ ने जब नूतन को जब ‘हमारी बेटी’ से फिल्मों में उतारा, तो नूतन के पिता की भूमिका मोतीलाल ने निभाई थी।

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