दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर चल रहा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म तीन साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज की गई थी। मगर इसे 48 घंटे के भीतर इस ओटीटी प्लेटफॉर्ट से हटा दिया गया। अब फिल्म को हटाए जाने के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
याचिका में फिल्म को दोबारा ZEE5 पर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि फिल्म हटाने का फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि फिल्म हटाने के पीछे कोई सार्वजनिक कानूनी आधार क्यों नहीं बताया गया और अधिकारियों से इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की गई है।
सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित इस फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद फिल्म जगत के कई लोगों, सिख संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले की आलोचना की है।
अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए दाखिल हुई याचिका
याचिका पर जानकारी देते हुए अधिवक्ता हकम सिंह ने बताया कि यह जनहित याचिका पंजाब निवासी और जी5 के सब्सक्राइबर श्रवण सिंह ने व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए दायर की है। याचिका में फिल्म हटाने के फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
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दोबारा स्ट्रीम करने की हो रही मांग
हकम सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “3 जुलाई को जी5 पर रिलीज हुई फिल्म ‘सतलुज’ को 5 जुलाई को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में मांग की गई है कि फिल्म को दोबारा जी5 पर बहाल किया जाए और उसकी स्ट्रीमिंग फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए।”
उन्होंने कहा कि याचिका में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि बिना किसी स्पष्ट कारण बताए फिल्म को अचानक क्यों हटा दिया गया। “यह जनहित याचिका जी5 के सब्सक्राइबर और पंजाब के निवासी श्रवण सिंह ने व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए दायर की है। उन्होंने पूछा है कि बिना किसी पूर्व सूचना और पारदर्शी जांच या निष्कर्ष के फिल्म को किस आधार पर हटाया गया।”
‘सतलुज’ को जी5 से हटाने का कारण किया जाए सार्वजनिक
अधिवक्ता के मुताबिक, इस मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, लेकिन अब तक फिल्म की स्ट्रीमिंग रोकने के कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
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उन्होंने कहा, “इस मामले में केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है, लेकिन फिल्म को रोकने के पीछे की वजह अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। हमें उम्मीद है कि इस याचिका पर कल या अगले कार्य दिवस में सुनवाई हो सकती है।”
‘सतलुज’ को लेकर क्या हो रहा विवाद?
दरअसल, फिल्म 2022 में ‘पंजाब 95’ नाम से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के पास गई थी, लेकिन निर्माताओं ने बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट नहीं माने। इसके बाद कथित तौर पर फिल्म को नया नाम देकर 3 जुलाई 2026 को सीधे OTT पर रिलीज कर दिया गया। हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और जी5 ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि फिल्म हटाने के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताएं क्या थीं। पूरा विवाद पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
