इस वक्त दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े दो बड़े विवाद इन दिनों चर्चा में हैं। पहला विवाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म के पूर्व नाम, ‘पंजाब 95’ से जुड़ा है और दूसरा विवाद दशकों पुराना सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर का है। जो पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है।

हाल ही के कुछ सालों में ‘सतलुज’ का रिलीज सफर सबसे विवादित फिल्मों में से एक रहा है। दर्शकों तक पहुंचने से पहले ही यह फिल्म सेंसरशिप, रिलीज में देरी और कई कानूनी-प्रशासनिक अड़चनों से गुजरी। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद जब फिल्म स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई, तब भी विवादों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और फिल्म महज 48 घंटों में हटा दी गई।

इस कारण ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई। यह विवाद फिल्म के लंबे और संघर्षपूर्ण सफर का सिर्फ एक अध्याय है। भारत में बहुत ही कम फिल्में ऐसी होंगी, जिन्हें रिलीज से पहले और बाद में इतनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा हो।

जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित है फिल्म

निर्देशक हनी त्रेहन और निर्माता रोनी स्क्रूवाला की यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है। खालड़ा ने पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ों और अवैध अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर किया था। 1980–90 के दशक में पंजाब में चरमपंथ के दौर के दौरान लापता लोगों के मामलों की जांच करते हुए जसवंत सिंह खालड़ा एक दिन खुद ही रहस्यमय तरीके से लापता हो गए।

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सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर 1995 को कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें उनके घर से अगवा कर लिया था। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला और यह मामला देश के सबसे चर्चित मानवाधिकार मामलों में शामिल हो गया। फिल्म की कहानी उन्हीं से प्रेरित है।

‘सतलुज’ पर क्यों हुआ विवाद?

शुरुआत में इस फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ रखा गया था और इसकी शूटिंग भी काफी पहले पूरी हो चुकी थी। हालांकि, रिलीज से पहले फिल्म सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की जांच प्रक्रिया में फंस गई।

बताया गया कि बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से पहले फिल्म में बड़ी संख्या में बदलाव करने का सुझाव दिया। फिल्म में 120 से अधिक कट्स लगे, जिनमें डायलॉग, कुछ सीन, वास्तविक व्यक्तियों के संदर्भ और यहां तक कि फिल्म के टाइटल में भी बदलाव शामिल थे। इन प्रक्रियाओं और विवादों के कारण फिल्म की रिलीज करीब तीन साल तक टलती रही और लगातार चर्चा का विषय बनी रही।

सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ लंबी कानूनी और प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरने तथा 120 से अधिक कट्स और बदलावों के बाद यह फिल्म 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। सरकारी आदेशों के चलते इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

कैसे ‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ हुआ नाम?

लगातार विवादों के बीच फिल्म में बड़ा बदलाव किया गया। साथ ही, इसे देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज करने की बजाय सीधे ZEE5 पर स्ट्रीम किया गया। वर्षों से फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों और निर्माताओं को लगा कि आखिरकार इसकी रिलीज का लंबा इंतजार खत्म हो गया है, लेकिन यह राहत भी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

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करीब तीन साल तक रिलीज का इंतजार

‘सतलुज’ फिल्म अब तक की सबसे विवादित फिल्मों में से एक है। इसे बनाने से लेकर स्क्रीन तक लाने का सफर बेहद मुश्किल रहा। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का नाम भी कई बार बदला गया। शुरुआत में इसका नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था। बाद में सेंसर प्रक्रिया के दौरान इसे ‘पंजाब 95’ नाम दिया गया। लेकिन इस नाम को भी मंजूरी नहीं मिली। आखिरकार फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया, जो पंजाब की प्रसिद्ध सतलुज नदी के नाम पर है।

बदलावों के बाद भी नहीं थमा विवाद

ZEE5 ने फिल्म को 48 घंटे में हटाने के बाद अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को अगले आदेश तक भारत में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। हालांकि, प्लेटफॉर्म ने यह भी साफ किया कि वह फिल्म और उसके रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ खड़ा है और इसे दोबारा उपलब्ध कराने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।

फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब में इसका मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी गरमा गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल समेत कई संगठनों और नेताओं ने फिल्म के समर्थन में आवाज़ उठाई। वहीं, अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी सोशल मीडिया पर फिल्म की एक क्लिप साझा करते हुए लिखा, “मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं।”