फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों एक बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। दिलजीत दोसांझ की फिल्म 3 जुलाई शुक्रवार को अचानक जी5 पर रिलीज की गई और संडे शाम में फिल्म को इंडिया में बैन कर दिया गया। जिसके बाद दर्शकों से लेकर कई सिलेब्रिटीज के इस मुद्दे पर रिएक्शन सामने आए। इसी कड़ी में अब एक्टर रणवीर शौरी का नाम शामिल हो गया है।

उन्होंने फिल्म के मुद्दे पर खुलकर बात की है और अपनी राय देते हुए एक लंबा चौड़ा पोस्ट प्लेटफॉर्म एक्स पर किया। उन्होंने यहां खास तौर पर पंजाबी हिंदूओं, खालिस्तानियों और साल 1984 में हुए दंगों पर बात की।

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एक्टर ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘‘सतलुज’ को लेकर छिड़ी बहस के बीच मैं यहां कई लोगों को यह पूछते देख रहा हूं कि आखिर पंजाब में हिंदू कभी राजनीतिक रूप से एकजुट क्यों नहीं हो पाए? एक पंजाबी हिंदू होने के नाते मुझे लगता है कि इसकी वजह यह है कि हमने सिखों को कभी खुद से अलग माना ही नहीं। हम शायद कभी पूरी तरह समझ ही नहीं पाए कि खालिस्तानियों ने हमें निशाना क्यों बनाया और हमारी हत्याएं क्यों कीं।

रणवीर ने आगे कहा, ‘राज्य की सीमाओं, नदी के पानी के बंटवारे, भाषा जैसे मुद्दे, क्या ये इतने बड़े कारण थे कि सदियों से चले आ रहे पंजाबी हिंदूओं और सिखों के खून के रिश्ते को तोड़ दिया जाए और एक अलगाववादी आंदोलन खड़ा कर दिया जाए? क्या यह साफ नहीं था कि देश के इकलौते योद्धा समुदाय को कुछ स्वार्थी ताकतें उसके ही खिलाफ इस्तेमाल कर रही थीं?’

रणवीर ने साल 1984 में हुए दंगों की बात करते हुए कहा, ‘क्या 1984 के जघन्य अपराधों के लिए पूरे हिंदू समाज को दोषी ठहराना उचित है, जबकि इसके लिए जिम्मेदार केवल एक राजनीतिक दल था? क्या 1984 से पहले खालिस्तानियों द्वारा की गई हिंसा और बलात्कार की हजारों घटनाओं को भुला देना या दबा देना न्यायसंगत है?’

अपनी बात पूरी करते हुए एक्टर ने लिखा, ‘मेरे लिए हिंदुओं और सिखों के बीच बढ़ती दूरी और अविश्वास व्यक्तिगत पीड़ा का विषय है। एक सिख भाई ने मुझसे एक बार कहा था, “हिंदू और सिख उंगली और उसके नाखून की तरह हैं, दोनों को अलग नहीं किया जा सकता।”

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एक्टर रणवीर शौरी ने अपने पोस्ट के आखिर में सभी पंजाबियों से प्यार और भाईचारा बढ़ाने और उसे पहचानने की बात की। रणवीर ने कहा, ‘प्रार्थना है कि सभी पंजाबी अपने गुस्से से ऊपर उठकर, जिससे वे अक्सर प्रभावित हो जाते हैं, फिर से उस प्रेम, भाईचारे और अपनत्व को खोज सकें, जिसके लिए उनकी पहचान रही है।’

‘सतलुज’ विवाद ने एक बड़ा रूप ले लिया है। फिल्म के बैन होने के बाद भी इसका पाइरेटिड वर्जन काफी देखा जा रहा है। पंजाब समेत देश में कई जगहों पर फिल्म ‘सतलुज’ की बड़े समूहों में स्क्रीनिंग हो रही हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़े कई क्लिप भी वायरल हैं जिनमें पंजाब में हुए इस संगीन अपराध को दिखाया गया है। बता दें कि फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ था क्योंकि फिल्म में साल 1984 के बाद से लेकर साल 1995 तक हुई हत्याओं के बारे में दिखाया गया है। बाद में इसे ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया।