आज संजीव कुमार का जन्मदिन है और उन्हें याद करने के लिए गीत ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ से बेहतर शायद ही कोई बहाना हो। हिंदी सिनेमा में बहुत कम कलाकार हुए हैं, जो सिर्फ आंखों के सहारे पूरी कहानी कह देते थे। संजीव कुमार उन्हीं में से एक थे। कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जो वक्त के साथ कम नहीं होते, बस गीत बन जाते हैं। ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ भी उसी दर्द की आवाज है, जिसे किशोर कुमार ने गाया और संजीव कुमार ने अपनी आंखों से जिया। फिल्म अनामिका का ये गाना आज भी उसी तरह महसूस होता है जैसा कि शायद उस समय होता होगा।

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भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 में गुजरात के सूरत शहर में हुआ था। ये बात बहुत कम लोग जानते है कि उनका असली नाम हरिहर जेठलाल जरीवाला था। एक मिडिल क्लास ब्राह्मण फैमिली से ताल्लुक रखने वाले संजीव कुमार ने फिल्मी दुनिया में काफी नाम कमाया। उनके निभाए गए किरदार आज भी अमर हैं। फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर का किरदार निभाने वाले एक्टर संजीव कुमार ने करीब 120 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

जब एक्टर अपने करियर के शिखर पर थे तब साल 1973 में एक फिल्म आई, जिसका नाम था ‘अनामिका’। जया बच्चन के साथ उनकी रोमांटिक थ्रिलर फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई थी। रघुनाथ जलानी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में एक्टर ने देवेंद्र नाम का किरदार निभाया था और जया बच्चन ने उनकी पत्नी अनामिका का। फिल्म के गाने काफी हिट रहे थे, उसमें से ‘मेरी भीगी भीगी सी’ गाना अमर बन गया। जिसे आज की जेनरेशन भी सुनना पसंद करती है।

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जब मोहब्बत खत्म होने के बाद भी दिल भीगा रह जाता है

गीत ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ उन भावनाओं को आवाज देता है, जिन्हें लोग अक्सर शब्दों में नहीं कह पाते। यह गाना बिछड़ने के बाद भी बाकी रह जाने वाली मोहब्बत का एहसास कराता है। साथ ही अंदर दबे उस दर्द को भी दिखाता है जो किसी के छोड़ जाने के बाद अंदर रह जाता है। इस गीत की लाइनें इसी दर्द को दिखाती है जो कहती है, “तुझे बिन जाने बिन पहचाने, मैंने ह्रदय से लगाया, पर मेरे प्यार के बदले में तूने, मुझको ये दिन दिखलाया”। ये लाइनें उस बिछड़ने के दर्द को बयां करती हैं।

संजीव कुमार की आंखों ने कह दी थीं वो बातें

इस गीत में संजीव कुमार का अभिनय इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उनके चेहरे के भाव, आंखों की उदासी और ठहराव गाने को सिर्फ सुनने नहीं, महसूस करने वाला बना देते हैं। गाने के लिए जिस तरीके के बोल हैं, उसके हिसाब से उसे पर्दे पर बयां करना संजीव कुमार से बेहतर शायद ही कोई कर पाता।

किशोर कुमार की आवाज में दर्द का सबसे खूबसूरत रंग

इस गाने का संगीत आर डी बर्मन ने दिया है और किशोर कुमार ने इस गाने को सिर्फ गाया नहीं, बल्कि जिया है। उनकी आवाज में मौजूद दर्द और नर्मी हर पीढ़ी के लोगों को अपने साथ जोड़ लेती है। इसमें कोई शक नहीं कि ये गाना हर जेनरेशन के लिए काफी रिलेटेबल बन गया है। उनकी आवाज में एक ऐसी सादगी और ईमानदारी थी, जो सीधे दिल पर असर करती थी।

‘अनामिका’ से जुड़ा वो दिलचस्प किस्सा, जिसे कम लोग जानते हैं

इस गाने को सुनते हुए आप इसमें कोई शोर शराबे वाला या तेज धुन का संगीत नही सुनेंगे। बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ को रिकॉर्ड करते समय संगीतकार आर डी बर्मन चाहते थे कि गीत में दर्द और अकेलेपन का एहसास बहुत स्वाभाविक लगे। यही वजह है कि गाने का संगीत बेहद सादा रखा गया और किशोर कुमार की आवाज को केंद्र में रखा गया। यही सादगी बाद में इस गीत की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

संजीव कुमार के जन्मदिन पर याद आता है उनका सबसे भावुक अंदाज

संजीव कुमार ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन इस गीत में दिखने वाली उनकी संवेदनशील और टूटे दिल वाले प्रेमी की छवि आज भी दर्शकों के दिल में बसी हुई है। उनके जन्मदिन पर यह गीत उनकी अभिनय की कला को याद करने का एक खूबसूरत बहाना बन जाता है। संजीव कुमार हिंदी सिनेमा के उन चंद अभिनेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी सहज और रियलिस्टिक एक्टिंग से हर किरदार को अमर बना दिया। उन्होंने अपने पूरे करियर में कई चैलेंजिंग और यादगार किरदार निभाए।

पांच दशक बाद भी क्यों नहीं फीकी पड़ी इस गीत की नमी

आज संगीत की दुनिया बहुत बदल चुकी है, लेकिन ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ अब भी उतना ही प्रासंगिक लगता है। इसकी वजह यह है कि प्यार, जुदाई और यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। हर पीढ़ी इस गीत में अपने किसी अधूरे रिश्ते या खोए हुए प्यार की झलक देख लेती है। शायद यही किसी भी सदाबहार गीत की सबसे बड़ी पहचान होती है।