सुनील दत्त और उनके दोस्तों के फेंके अधजले सिगरेट पीते थे संजय दत्त, तंग आकर पिता ने किया था ये काम

सुनील दत्त और नरगिस के अधिक लाड़-प्यार के बीच संजय दत्त कुछ बुरी आदतों के शिकार हो गए। बहुत छोटी उम्र से ही उन्होंने सिगरेट पीना शुरू कर दिया था। इससे नाराज़ उनके पिता ने उन्हें….

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सुनील दत्त संजय दत्त को बहुत मानते थे (Photo-Indian Express)

पुराने दौर की मशहूर अभिनेत्री नरगिस और मशहूर अभिनेता सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त ने अपना बचपन बेहद ही शान-ओ-शौकत में गुजारा। उनके मां- पिता उनसे इतना प्यार करते कि उनके कहने की देर होती वो चीज उनके सामने हाजिर हो जाती थी। इसी लाड़- प्यार के बीच वो कुछ बुरी आदतों के शिकार हो गए। बहुत छोटी उम्र से ही उन्होंने सिगरेट पीना शुरू कर दिया था। इस बात का खुलासा खुद संजय दत्त ने अपने पिता के सामने किया था।

जी टीवी के पुराने शो, ‘जीना इसी का नाम है’ पर संजय दत्त अपने पिता सुनील दत्त के साथ पहुंचे थे जहां उन्होंने बताया कि वो उस वक्त 10 साल से भी कम उम्र के थे और तभी उन्होंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी थी। एक घटना का जिक्र करते हुए संजय दत्त ने कहा था, ‘मुझे याद है कि एक दिन पार्टी चल रही थी। डैड और उनके दोस्त सिगरेट पीकर फेंक रहे थे और मैं वहां लेटकर वही सिगरेट पीता था। फिर उसके तुरंत बाद मुझे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया।’

सुनील दत्त ने बताया था कि जब संजय दत्त सिगरेट पीने लगे, तब उन्हें डर हो गया कि कही वो प्यार से बिगड़ न जाए, इसलिए संजय को बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया जहां वो 10 सालों तक रहे थे। सुनील दत्त ने बताया था, ‘संजय को इतना प्यार मिल रहा था, हम सोचने लगे कि कही ये बिगड़ न जाए। बोर्डिंग स्कूल में डिसिप्लिन होता है, इसलिए इन्हें भेजा गया।’

 

सुनील दत्त ने बताया कि संजय दत्त को उनकी पत्नी नरगिस और वो सबसे ज्यादा प्यार करते थे। उन्होंने बताया था, ‘जब संजय दत्त इस दुनिया में आए तो हमारी तरफ से इनके लिए प्यार- मोहब्बत इतना ज्यादा था कि जो ये चाहते थे, मिलता था इनको। मेरा ख्याल है कि जिंदगी में मैंने इतने नखरे किसी के नहीं उठाए, जितने संजय दत्त के उठाए हैं।’

संजय दत्त सिगरेट के अलावा ड्रग्स की आदत के भी शिकार हो गए थे। इसके लिए वो एक साल तक अमेरिका के नशा मुक्ति केंद्र में भी रहे थे। संजय दत्त ने बतौर हीरो अपने फिल्म करियर की शुरुआत 1981 की फिल्म रॉकी से की थी। यह फिल्म तो हिट रही लेकिन इसके बाद की फिल्में कुछ कमाल नहीं दिखा पाईं।

 

1993 के मुंबई बम हमले में जब संजय दत्त का नाम आया तो उनकी छवि पर इसका बेहद बुरा असर हुआ। लेकिन इसी साल आई उनकी फिल्म खलनायक हिट रही। इसके बाद अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्में ही उन्हें मिली, जिनका प्रदर्शन औसत रहा। जब साल 2003 में उनकी फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस रिलीज हुई तो उनके इमेज में बदलाव आया।

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