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सलमान खान की फिल्म, ‘हम आपके हैं कौन’ के निर्देशक को फोन कर लोग पूछते हैं शादी के रस्म, जानिए क्या है किस्सा

सलमान खान, माधुरी दीक्षित स्टारर फ़िल्म, 'हम आपके हैं कौन' की रिलीज के बाद लोग निर्देशक सूरज बड़जात्या को फोन कर शादी के रस्म पूछने लगे थे। यह सिलसिला आज भी कायम है। सूरज बड़जात्या ने बताया था कि लोग...

salman khan, sooraj barjatya, hum aapke hain kounसलमान खान सूरज बड़जात्या के साथ कई फिल्मों में काम कर चुके हैं (Photo- Indian Express/File)

सलमान खान माधुरी दीक्षित स्टारर फ़िल्म, ‘हम आपके हैं कौन’ की सफलता ने सलमान खान को बॉलीवुड में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सलमान खान के करियर को संवारने में इस फिल्म के निर्देशक सूरज बड़जात्या का अहम योगदान रहा है। उन्होंने ही सलमान खान को मैंने प्यार किया जैसी फिल्म दी जिस वजह से एक हीरो के तौर पर लोग उन्हें पसंद करने लगे। ‘हम आपके हैं कौन’ भोजपुरी की बेहतरीन फिल्म ‘नदिया के पार’ की रीमेक थी। इस पारिवारिक फिल्म में शादी के रस्मों को इतनी खूबसूरती के साथ दिखाया गया कि आज भी वो दर्शकों के दिलों में बसते हैं।

फिल्म के गाने, ‘दूल्हे की सालियों’, ‘माए नी माए’, ‘दीदी तेरा देवर’ आदि आज भी शादियों की रौनक बढ़ाते हैं। इस फिल्म में शादी के हर रस्म को निर्देशक ने बड़े शानदार तरीके से दर्शकों के सामने रखा। कई घरों में तो जूता चुराने की रस्म की शुरुआत इस फिल्म के बाद शुरु की गई। और तो और इस फिल्म के रिलीज के बाद लोग निर्देशक सूरज बड़जात्या को फोन कर शादी के रस्म पूछने लगे थे। यह सिलसिला आज भी कायम है। एक इंटरव्यू में सूरज बड़जात्या ने बताया था कि लोग उन्हें अब भी कॉल कर सभी समारोहों के रस्म पूछने लगते हैं।

राजश्री प्रोडक्शंस के एक कार्यक्रम में सलमान खान से बातचीत में सूरज बड़जात्या ने कहा था, ‘मैंने जूता चुराने से लेकर शादी की हर रस्म को शादियों में देखा है और उसे ही अपनी फिल्मों में इस्तेमाल किया। आज भी लोग मुझे कॉल करके पूछते हैं कि ये समारोह है, आप इसकी रस्म बता दीजिए। मैं कहता हूं कि मैं कोई पंडित नहीं हूं। बात बस इतनी है कि मैंने जो देखा है, लोगों का साथ में रहना, परिवार का खुशी मनाना, दिवाली मनाना, वही मेरी फिल्मों में दिखता है।’

 

जब फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ रिलीज हुई तो इसके प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बनती थी। इसकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि इसकी स्क्रीनिंग राष्ट्रपति भवन में भी करवाई गई। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने फिल्म देखी और मेकर्स को बधाई दी थी।

 

इस फिल्म को कई अवार्ड भी मिले थे। इसे 12 श्रेणियों में नॉमिनेट किया गया था जिसमें से इसे 5 अवॉर्ड मिले थे। इस फ़िल्म के बाद लता मंगेशकर और एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने कभी साथ में काम नहीं किया।

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