सैफ अली खान अभिनेता होने के साथ-साथ पटौदी रियासत के नवाब भी हैं। उनका जन्म मंसूर अली खान पटौदी और अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के घर हुआ। सैफ के पिता भारतीय क्रिकेटर होने के साथ ही पटौदी रियासत के 9वें नवाब थे। उनके बाद सैफ 10वें नवाब बने। सैफ के पास भले ही भव्य पटौदी पैलेस हो, लेकिन उनकी बहन और अभिनेत्री सोहा अली खान के हिस्से में कभी इस संपत्ति का जनरेटर रूम आया था। जिसे बाद में दो बेडरूम वाले अपार्टमेंट में बदल दिया गया।
सालों से सोहा अपने परिवार के इस शाही घर के बारे में खुलकर बात करती रही हैं। उन्होंने बताया है कि कैसे जनरेटर रूम उनकी विरासत का हिस्सा बना, इसकी देखभाल का खर्च वह खुद उठाती हैं और परिवार आज भी लगभग 100 साल पुराने इस महल को कैसे संभालकर रखे हुए है।
सोहा को कैसे मिला पूर्व जनरेटर रूम?
जूम को दिए एक पुराने इंटरव्यू में सोहा ने बताया था कि यह हिस्सा तब परिवार के पास आया, जब पटौदी पैलेस को एक होटल चेन को लीज पर दिया गया था। अभिनेत्री ने कहा, “मेरे पास जो हिस्सा है, वह पहले जनरेटर रूम था। लेकिन कुछ समय के लिए एक होटल पटौदी पैलेस का प्रबंधन कर रहा था। उस दौरान मेरे माता-पिता जनरेटर रूम में रहने लगे। उसे एक बहुत अच्छी प्रॉपर्टी में बदल दिया गया और अब वह मेरे पास है।”
हाउसिंग डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में विस्तार से बताया था कि जब नीमराना होटल्स पैलेस का संचालन कर रहा था, तब उनके माता-पिता के रहने के लिए इस जगह को आरामदायक दो बेडरूम वाले अपार्टमेंट में बदल दिया गया। उन्होंने कहा, “पैलेस को नीमराना होटल्स को लीज पर दिया गया था। उस समय मेरे माता-पिता को रहने के लिए जगह चाहिए थी, इसलिए जनरेटर रूम को एक बहुत अच्छे 2BHK घर में बदल दिया गया।” हालांकि महल का बाकी हिस्सा सैफ अली खान के पास है, लेकिन सोहा ने बताया कि अपने हिस्से की देखभाल की जिम्मेदारी उनकी है।
व्यावहारिक तरीके से होती है देखभाल
देश की सबसे चर्चित शाही संपत्तियों में शामिल होने के बावजूद पटौदी पैलेस की देखभाल बेहद व्यावहारिक तरीके से की जाती है। साइरस ब्रोचा से बातचीत में सोहा ने बताया था कि उनकी मां और वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर आज भी पैलेस के खर्चों का पूरा हिसाब रखती हैं। सोहा ने कहा, “मेरी मां खुद हिसाब-किताब देखती हैं। उन्हें रोज और महीने के खर्च तक की जानकारी रहती है।”
सोहा ने यह भी बताया कि पैलेस में पेंट की जगह सफेदी क्यों करवाई जाती है। एक्ट्रेस ने कहा, “हम पटौदी पैलेस में पेंट नहीं करवाते, बल्कि सफेदी करवाते हैं, क्योंकि यह काफी सस्ता पड़ता है। हमने लंबे समय से कोई नई चीज नहीं खरीदी है। इस जगह की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी वास्तुकला है, न कि यहां रखी चीजें।”
क्या सैफ ने दोबारा खरीदा था पटौदी पैलेस?
पटौदी पैलेस 2005 से 2014 के बीच नीमराना होटल्स को लीज पर दिया गया था। सालों से यह खबरें आती रही हैं कि पिता मंसूर अली खान पटौदी के निधन के बाद सैफ अली खान ने महल को दोबारा खरीदा था। हालांकि, सैफ ने स्पष्ट किया था कि असल में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि महज लीज खत्म की गई थी।
मिड-डे को दिए इंटरव्यू में सैफ ने कहा था कि वह पहले से ही मालिक थे, लेकिन होटल की लीज खत्म कराने के लिए बड़ी रकम चुकानी पड़ी थी। उन्होंने कहा, “फ्रांसिस ने कहा था कि अगर मैं इसे वापस लेना चाहूं तो उन्हें बता दूं। मैंने कहा कि मुझे यह वापस चाहिए। फिर बैठक हुई और उन्होंने कहा कि इसके लिए काफी पैसा देना होगा।”
सैफ ने आगे कहा, “जिस घर को मैं विरासत में मिलने वाला मानता था, उसे भी फिल्मों से कमाए पैसे से ही वापस हासिल किया गया। सिर्फ अतीत के सहारे नहीं जिया जा सकता। कम से कम हमारे परिवार में तो नहीं।” बाद में उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें पैलेस दोबारा खरीदना नहीं पड़ा क्योंकि वह पहले से ही उसके मालिक थे।
उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने इसे लीज पर दिया था। फ्रांसिस और अमन, जो वहां होटल चला रहे थे, उन्होंने संपत्ति का बहुत अच्छे से ख्याल रखा। मेरी मां का वहां एक कॉटेज था और वह हमेशा आराम से रहती थीं। यह एक उचित वित्तीय व्यवस्था थी और रिपोर्ट्स के विपरीत मुझे इसे वापस खरीदना नहीं पड़ा क्योंकि इसका मालिक मैं पहले से था।”
2011 में मंसूर अली खान पटौदी के निधन के बाद सैफ ने लीज खत्म कर दी। आज यह पैलेस फिर से परिवार का निजी निवास है, हालांकि कभी-कभी फिल्मों की शूटिंग के लिए इसे किराए पर भी दिया जाता है।
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