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रमया को सिनेमा से सियासत में ले जाएंगी शिवगामी?

बीते साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर एक तसवीर वायरल हुई थी, जिसमें रमया जयललिता बनी नजर आ रही थीं।

Author May 12, 2017 06:04 am

सबरंग डेस्क
बीते साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर एक तसवीर वायरल हुई थी, जिसमें रमया जयललिता बनी नजर आ रही थीं। यह तसवीर एक फिल्म के पोस्टर के रूप में थी और फिल्म का नाम ‘मदर- द स्टोरी आॅफ ए क्वीन’ था। यह पोस्टर रमया को किसी ने वाट्सएप पर भी भेजा था। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनका कहना था कि जयललिता की भूमिका एक तरह से ड्रीम रोल है, जिसे वह करना पसंद करेंगी। बॉक्स आॅफिस पर ‘बाहुबली 2’ के एक हजार करोड़ का कारोबार करने के बाद एक बार फिर रमया और उनके बहाने यह कथित फिल्म चर्चा में हैं। हालांकि रमया ने साफ किया है कि यह मामला फिलहाल सोशल मीडिया तक ही सीमित है।

दूसरी जिस बात से रमया की चर्चा हो रही है, वह है उनके राजनीति में जाने को लेकर। एक टीवी पर चैनल पर साक्षात्कार के दौरान रमया ने स्पष्ट किया कि राजनीति में जाने को लेकर उनकी दिलचस्पी है और अगर लोग ऐसा चाहते हैं कि उन्हें राजनीति में जाना चाहिए, तो वह इसमें कोई बुराई नहीं समझती हैं। बकौल रमया,‘अगर यह मेरी किस्मत में लिखा है तो जरूर होगा। किसे पता कुछ भी हो सकता है।’ साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जनसेवा के लिए राजनीति में ही जाना जरूरी नहीं है। जाहिर है इसके बाद जयललिता की भूमिका और राजनीति पर उनकी टिप्पणी को लोग साथ जोड़ कर देख रहे हैं और अटकलें भी लगा रहे हैं कि रमया अन्नाद्रमुक में जा सकती हैं।

मशहूर तमिल अभिनेता मरुधर गोपालन रामचंद्रन (एमजीआर) डीएमके से जुड़े। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी एडीएमके बनाई और 1977 से 1987 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। जानेमाने तेलुगू अभिनेता नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) ने तेलुगू देसम पार्टी बनाई और वह भी आंध्र प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। जयललिता सिनेमा में काम करते करते सियासत की दुनिया में आई और छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रही। अभिनेत्रियों में जया प्रदा ने तेलुगू देसम, समाजवादी पार्टी से होते हुए 2011 में अमर सिंह के साथ अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मंच बनाई मगर 2012 के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह असफल रहीं। आखिर में 2014 का आम चुनाव उन्होंने आरएलडी के टिकट पर बिजनौर से लड़ा मगर जीत नहीं पाईं।

सियासत में जाने वाले सितारों की इस परंपरा को दक्षिण के सितारे आगे बढ़ाते रहे हैं। चिरंजीवी ने तेलुगू फिल्मों में काम करते करते इतनी लोकप्रियता हासिल की कि 2008 में प्रजा राज्यम नामक एक सियासी पार्टी बनाई और केंद्रीय राज्यमंत्री बने। उनके छोटे भाई और अभिनेता पवन कल्याण भी उनके नक्शे कदम पर चले और उन्होंने भी 2013 में जन सेना नामक एक पार्टी खड़ी कर ली। अभिनेता सुरेश गोपी ने भाजपा में प्रवेश किया और राज्यसभा के सदस्य बने। शरत कुमार ने डीएमके और एआइडीएमके से होते हुए आखिर 2007 में अपनी पार्टी बना डाली। कुल मिलाकर दक्षिण में सियासत का रास्ता सिनेमा से भी निकलता रहा है। कल को रमया इसी परंपरा को बढ़ा सकती हैं। राजमाता शिवगामी की भूमिका ने उन्हें एक नई इमेज दी है, जो इसमें उनकी मदद कर सकती है।

समुंदर में विनोद खन्ना और फिरोज खान के साथ ‘चाहे मेरी जान तू ले ले…’ गाने वाली रमया की नई इमेज काफी ताकतवर है। ‘बाहुबली ’ ने उनके करियर को एक नया मोड़ दिया है। कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा जैसा सवाल दो सालों से पूछा जाता रहा है और इसका जबाव रमया द्वारा निभाई गई राजमाता शिवगामी के जरिये मिला कि बाहुबली को मारने का आदेश कट्टप्पा को शिवगामी ने ही दिया था। महेश भट्ट की ‘चाहत’, यश चोपड़ा की ‘परंपरा’,सुभाष घई की ‘खलनायक’, डेविड धवन की ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं रमया चाहे दो दशक पहले बॉलीवुड से आउट हो गई हों, मगर बॉलीवुड के निर्माता अब उनमें नई मां के दर्शन कर रहे हैं। हो सकता है कोई निर्माता उन्हें इस भूमिका के लिए साइन कर डाले।

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