बॉलीवुड फिल्म ‘मिर्जापुर द मूवी’ सिनेमाघरों में धूम मचा रही है। इस पिक्चर में ‘मिर्जापुर’ सीरीज के कलाकारों पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु संग अन्य का भौकाल देखने को मिला। फिल्म के गानों को भी खूब प्यार मिल रहा है। इसकी एल्बम में 9 बढ़िया गाने हैं, लेकिन इनमें से जिसने दर्शकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वो है ‘सांसों की माला पे’।

उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की आवाज में अमर हो चुका ये गाना फिल्म के मिड-क्रेडिट सीन में आता है। इस सीन में बीना त्रिपाठी और उसका पूर्व प्रेमी हैं। बीना कहती है, ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी ही रहता है।’

‘मिर्जापुर द मूवी’ के लिए नुसरत फतेह अली खान के इस गाने को कंटेंपरेरी ट्रीटमेंट देते हुए मधुर शर्मा और वैभव पानी ने गाया है। दर्शकों को ये गाना खूब भा रहा है। इसी के साथ इस दशकों पुरानी कव्वाली ने हिंदी सिनेमा में दोबारा दस्तक देकर नए व्यूअर्स के बीच जगह बना ली है। लेकिन ये कव्वाली असल में यहां तक पहुंची कैसे? आइए इसके बारे में बात करते हैं।

नुसरत फतेह अली खान का कनेक्शन

‘सांसों की माला पे’ गाने और नुसरत साहब से भारत का रिश्ता 1979 तक जाता है। भारत में नुसरत फतेह अली खान को पहली बार लेजेंडरी अभिनेता राज कपूर ने ऋषि कपूर की शादी में परफॉर्म करने के लिए आमंत्रित किया था। यहां उन्होंने इस गाने को परफॉर्म किया।

1982 में रिलीज हुई नुसरत की एल्बम सुप्रीम कलेक्शन वॉल्यूम 12 में इसने जगह बनाई। नुसरत की आवाज और ट्रीटमेंट ने इस गाने को बेहतरीन कव्वाली में तब्दील किया था। 1983 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में लाइव परफॉरमेंस के दौरान भी उन्होंने इसे गाया, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी में और इजाफा हुआ।

गाने को लिखने वाला कौन?

इस गाने को किसने लिखा, इसे लेकर चीजें हमेशा से उलझी रही हैं। इस गाने को मीराबाई से जोड़ा जाता रहा है। इसका बड़ा कारण इसकी भाषा और कृष्ण भक्ति है। हालांकि सूफीनामा में ‘सांसों की माला पर सिमरूं निस-दिन पी का नाम’ को तुफैल होशियारपुरी का काम बताया गया है, जो 1914 से 1993 तक जिये। इसमें श्याम, मोहन, वृंदावन और गोकुल का रेफरेंस है। नुसरत की शुरुआती कमर्शियल रिलीज में इन शब्दों को कथित तौर पर ‘पारंपरिक’ बताया गया था।

बाद में ये कविता, होशियारपुरी के नाम तले सोच माला नाम के कलेक्शन में पाई गई। 2001 की कमर्शियल रिलीज के क्रेडिट में भी उन्हीं का नाम था। मगर इसकी धार्मिक भाषा के चलते इसका जुड़ाव मीराबाई से ही ज्यादा रहा। खास बात ये है कि ये गाना एक म्यूजिकल या आध्यात्मिक खांचे में नहीं रहता। इसके मतलब एकदम सिंपल है- मेरी सांसें मेरे प्रिय के नाम का जाप कर रही हैं।

ये गाना ऐसी याद की बात करता है कि सांस लेना भी पिया को समर्पण बन जाती है। मगर ये कविता इंसानी प्यार और दिव्य शक्ति को सरेंडर के बीच घूमती है। इसे गाने वाला प्यार में इतना लीन हो जाता है कि प्रेमी और उसके बीच कोई फर्क नहीं रहता।

इसकी लोगों के मन में जगह बनाने की शक्ति ही इस गाने की लंबी उम्र का कारण है। कव्वाली महफिलों में गाये जाने वाले इस गाने की सूफी सर्किट में अपनी अलग जगह है। इसमें होने वाला कृष्ण, श्याम, गोकुल और वृंदावन का इस्तेमाल इसे कृष्ण भक्तों का पसंदीदा भी बनाता है। रोमांटिक चाहत और आध्यात्मिक तड़प आपको दोनों में से एक को चुनने के लिए नहीं कहती।

कोयला से नुसरत फतेह अली खान तक

‘मिर्जापुर द मूवी’ से पहले भी बॉलीवुड ने इस गाने को ढूंढ लिया था। 1996 में आई फिल्म ‘जीत’ और 1997 में आई ‘कोयला’ इसे सुना गया। ‘कोयला’ में राजेश रोशन ने इसे कम्पोज किया था और कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया था। गाने के वीडियो में शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित नजर आए थे। इंग्लिश फिल्म डायरेक्टर माइकल विंटरबॉटम ने बाद में नुसरत साहब के ओरिजिनल गाने को 2011 में आई अपनी फिल्म ‘तृष्णा’ में लिया था।

2020 में राहत फतेह अली खान ने नुसरत और अपने पिता फारुख फतेह अली खान को ट्रिब्यूट देते हुए गाने का एक और वर्जन रिकॉर्ड किया था। ये फ्यूजन ट्रैक था, जिसे अभी भी ऑनलाइन सुना जा सकता है। बीते कई सालों में ये भी देखा गया है कि ये गाना कव्वाली के अलावा दूसरी अरेंजमेंट्स में भी कमाल ही लगता है। ऐसे में इसके कई वर्जन अलग-अलग आर्टिस्ट गाकर रिलीज कर चुके हैं।

इसके सबसे पॉपुलर वर्जन में से एक पाकिस्तानी इंस्ट्रूमेंटल जोड़ी लियो ट्विनस का वायलिन वर्जन है, जो उनके क्वारंटीन सेशन्स में रिलीज हुआ था। ये वर्जन यूट्यूब पर फैंस का फेवरेट बन गया था और इसे लाखों व्यूज मिले थे। मगर इसका सबसे चौंकाने वाला वर्जन पुर्तगाली गिटार प्लेयर आन्द्रे एनट्यून्स (Andre Antunes) का था, जिन्होंने नुसरत की आवाज के लिए हेवी मेटल गिटार बजाया था। 2022 में आए इस वर्जन का नाम ‘लेजेंडरी पाकिस्तानी सिंगर गोज मेटल’ था।

इस गाने ने धार्मिक संगीत की दुनिया में भी अपनी जगह बनाई है। ऐश्वर्या पंडित ने ‘सांसों की माला पे शिव का नाम’ गाना गाया था। मई 2026 में सिंगर प्रियंका सिंह का ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं शिव का नाम’ रिलीज हुआ था। अब ‘मिर्जापुर द मूवी’ से आया इसका लेटेस्ट वर्जन फैंस का नया फेवरेट है। आपको इस गाने का कौन-सा वर्जन पसंद है?