1990 के दशक में दूरदर्शन के लोकप्रिय शो ‘स्वाभिमान’ से अपनी पहचान बनाने वाले रोहित रॉय ने हाल ही में टीवी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि फिल्म और टीवी कलाकारों के बीच वाकई अंतर है। इतना ही नहीं उन्होंने टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ तक कह दिया। साथ ही उनका कहना था कि टीवी कलाकार जिस तरह से खुद को लोगों के सामने पेश करते हैं, उसमें फिल्म सितारों जैसी ‘क्लास’ नजर नहीं आती।

किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में रोहित से फिल्म और टीवी कलाकारों के बीच मौजूद इस कथित कास्ट सिस्टम के बारे में सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि आखिर टीवी कलाकारों की लोकप्रियता को फिल्म सितारों की तुलना में कम क्यों समझा जाता है।

रोहित ने कहा कि टीवी कलाकारों में फिल्म सितारों जैसी बात नहीं है। उन्होंने समझाया कि जब कोई फिल्म स्टार, खासकर बड़ा स्टार, किसी पब्लिक इवेंट में पहुंचता है तो उसके आने का अंदाज ही अलग होता है। उन्होंने कहा कि हर कलाकार अपने लिए एक इमेज बनाकर रखता है, लेकिन फिल्म सितारों का यह अंदाज ज्यादा ग्रेसफुल, स्टाइलिश और गरिमापूर्ण नजर आता है। उनके मुताबिक, फिल्म स्टार्स के व्यक्तित्व में एक अलग तरह की स्टाइल और क्लास दिखाई देती है।

टीवी कलाकारों को लेकर उन्होंने कहा कि अगर किसी ऐसे इवेंट में जाएं, जहां बड़ी संख्या में टीवी एक्टर्स मौजूद हों, तो उनके व्यवहार को देखकर खुद ही दोनों के बीच का अंतर समझ आ जाएगा।

रोहित ने यह भी कहा कि वह खुद टीवी से जुड़े रहे हैं और हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर उनका व्यवहार कैसा हो। उनके मुताबिक, कलाकारों को गरिमा और शालीनता बनाए रखनी चाहिए। सिर्फ इसलिए कि सामने पैपराजी मौजूद हैं, अजीब हरकतें करना या गैर-जिम्मेदाराना बातें करना सही नहीं है।

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कपड़ों को लेकर की फिल्म और टीवी स्टार्स की तुलना

रोहित ने फिल्म और टीवी कलाकारों के पहनावे को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि फिल्मी सितारे बोल्ड या छोटे कपड़े नहीं पहनते, लेकिन उनके पहनावे में एक खास तरह का स्टाइल दिखाई देता है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहने वाली एक महिला का जिक्र करते हुए उनके कपड़ों पर भी टिप्पणी की। रोहित का कहना था कि सोशल मीडिया पर ऐसी चीजें लोगों का ध्यान जरूर खींचती हैं, लेकिन इससे कलाकार को जरूरी नहीं कि सम्मान भी मिले।

टेलीविजन को बताया डस्टबिन मीडियम

रोहित ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की तस्वीरें और वीडियो लोगों को आकर्षित जरूर करते हैं, लेकिन इससे कलाकारों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी उन्हें उम्मीद होती है। उन्होंने यह भी कहा कि टीवी पर काम करने वाले बहुत कम कलाकार ऐसे हैं, जो अपने दर्शकों से अच्छी तरह बात करना जानते हैं।

जब रोहित से पूछा गया कि क्या फिल्म और टीवी के बीच की यह असमानता खुद स्वीकार करना एक तरह से उसी सिस्टम को बढ़ावा देना है, तो उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए सिनेमा हमेशा टीवी से ऊपर है। रोहित ने कहा, “सिनेमा, सिनेमा है। यह हमेशा याद रहता है। टेलीविजन एक डस्टबिन मीडियम है।”

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अपने शो ‘स्वाभिमान’ को याद करते हुए रोहित ने कहा कि आज भी सोशल मीडिया पर इस शो के कुछ सीन या क्लिप देखने को मिल जाते हैं। हालांकि, उनके मुताबिक ऐसे कई टीवी शो रहे हैं, जिन्होंने अपने समय में खूब नाम कमाया, लेकिन आज उन्हें बहुत कम लोग याद करते हैं।

उन्होंने कहा कि वह ‘स्वाभिमान’ का हिस्सा बने, यह उनकी किस्मत थी। इसके साथ ही उन्होंने ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘गॉन विद द विंड’ जैसी फिल्मों का उदाहरण दिया। रोहित के मुताबिक, फिल्मों की याद लंबे समय तक लोगों के बीच बनी रहती है और यही वजह है कि हर अभिनेता के लिए सिनेमा में काम करना एक स्वाभाविक अगला कदम होता है।

टीवी कलाकारों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार हुआ

रोहित ने कहा कि ‘स्वाभिमान’ की सफलता इतनी बड़ी थी कि उन्हें कभी किसी फिल्म कलाकार के सामने खुद को कमतर महसूस नहीं हुआ। हालांकि, उन्होंने माना कि टीवी कलाकारों को लंबे समय से सौतेला व्यवहार झेलना पड़ा है। उनका कहना था कि टीवी के अच्छे कलाकारों को सम्मान जरूर मिलता है, लेकिन उन्हें फिल्म सितारों जैसा स्टारडम शायद ही मिलता है।