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फिल्में ही सब कुछ थीं ऋषि कपूर के लिए

'अमित जी से मेरा दिल का रिश्ता है। उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशाा अच्छा ही होता है। मुझे आज भी याद है जब मंैने उनके साथ पहली बार फिल्म ‘कभी कभी’ में काम किया था। उस वक्त हम कश्मीर में शूटिंग कर रहे थे। उसी समय से मैं उनका कायल हो गया था। तब से हमारी दोस्ती बरकरार है।'

ऋषि कपूर का यह साक्षात्कार कुछ महीने पहले लिया गया था,

आरती सक्सेना

बॉलीवुड के जिंदादिल अभिनेता ऋषि कपूर इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी बातें, उनका अभिनय कभी भी लोगों के दिलों से नहीं जाएगा। ऋषि कपूर बहुत छोटी उम्र में फिल्मों से जुड़ गए। दिग्गज अभिनेता होने के बावजूद उनमे रत्ती भर भी घमंड नहीं था। ऋषि कपूर का यह साक्षात्कार कुछ महीने पहले लिया गया था, जिसमें उन्होंने अपने काम और परिवार के बारे में खुलकर बातें की थीं।

सवाल: ऋषि कपूर जी आप ने इंडस्ट्री में अच्छा खासा सफर तय किया है। इस दौरान कभी आपको अपनी इस काबलियत पर गर्व हुआ कि आप इतने बड़े अभिनेता हैं या आप इतने महान कपूर खानदान से ताल्लुक रखते हैं ?

-गर्व का तो पता नहीं हां लेकिन एक खुशी जरूर महसूस होती थी कि मेरे पिता दादा सभी नामी गिरामी हस्तियां हैं। मैंने जब पहली बार ‘मेरा नाम जोकर’ में बतौर बाल कलाकार राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया तब भी मुझे नहीं लगा था कि कोई महान काम किया है। वह पुरस्कार लेकर मैंने अपने पिता राज कपूर साहब को दिया। तब उन्होंने पास ही बैठे मेरे दादा जी पृथ्वीराज कपूर को देखते हुए मुझसे कहा कि मैं ये पुरस्कार उनके चरणों में रख दंू। मैंने अपने पिता के आदेश का पालन करते हुए ठीक वैसा ही किया। जब मेरे दादा जी ने ये पुरस्कार देखा तो उनकी आंखो में खुशी के आंसू आ गए और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया। उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि मैंने जरूर कोई ऐसा काम किया है जिससे दादा तक प्रभावित हो गए। उस वक्त गर्व महसूस हुआ था।

सवाल : जब आप अपना अभिनय करिअर को देखते हैं उस दौरान कितनी संतुष्टि महसूस करते हैं?

-सच्चा कलाकार वही होता है जो कभी भी अपने अभिनय से संतुष्ट न हो बल्कि कुछ और अच्छा और कुछ नया करने की इच्छा रखता हो। मेरी दिली तमन्ना है कि मैं मरते दम तक फिल्मों से जुड़ा रहूं। क्योकि मुझे फिल्मों से बेहद प्यार है। होश संभालते ही अभिनय से जुड़ गया हूं और अब अभिनय मेरे खून में शमिल है। अपना अभिनय सफर देखता हूं तो मुझे लगता है कि मैंने लगातार कुछ नया देने की कोशिश की है। 1973 में जब मैंने ‘बॉबी’ फिल्म से शुरुआत की तब ये नहीं सोचा था कि लोग मुझे इतना पसंद करेंगे। उसके बाद मंैने कई सारे किरदार ऐसे निभाए जिसे निभा कर मुझे अभिनय में संतुष्टिी मिली। 1976 में ‘लैला मजनू’ में दर्शकों ने मेरी प्रशंसा की। उसके बाद ‘कर्ज’ ,‘प्रेम रोग’, ‘सरगम’,‘सागर’ जैसी कई हिट फिल्में दी, जिसमे मेरे काम की प्रशंसा हुई। 2009 में मैंने फिल्म ‘लव आज कल’ में सरदार का किरदार निभाया था वो भी दर्शकों को काफी पंसद आया। इसके बाद ‘कपूर एंड सन्स’ में 90 साल के बूढेÞ का किरदार निभाया, जो मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था। इसके बाद 2018 में मैंने ‘मुल्क’ और ‘102 नॉट आउट’ जैसी बेहतरीन फिल्म में काम किया। इन फिल्मों में काम करके भी मुझे अभिनय संतुष्टि मिली थी। इस हिसाब से जब मैं अपना फिल्मी सफर देखता हूं तो मुझे खुशी होती हैं। लेकिन साथ ही एक अभिनेता के तौर पर अच्छी फिल्में और अच्छे किरदार निभाने की इच्छा अभी बाकी है ।

सवाल : ‘102 नॉट आउट’ में आप अमित जी के साथ 27 साल बाद नजर आए। कैसा अनुभव रहा ?

-अमित जी से मेरा दिल का रिश्ता है। उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशाा अच्छा ही होता है। मुझे आज भी याद है जब मंैने उनके साथ पहली बार फिल्म ‘कभी कभी’ में काम किया था। उस वक्त हम कश्मीर में शूटिंग कर रहे थे। उसी समय से मैं उनका कायल हो गया था। तब से हमारी दोस्ती बरकरार है।

सवाल : रणबीर कपूर को आप बतौर अभिनेता और पुत्र कैसे परिभाषित करेंगे। क्या उनकी शादी को लेकर चितिंत हैं?

-हां एक बाप होने के नाते मेरे मन में ये इच्छा तो है ही कि रणबीर की शादी हो जाए और वह सेटल हो जाए। और हमे भी दादा दादी बनने का सौभाग्य प्राप्त हो। लेकिन रणबीर अपने काम में अपनी जिंदगी में इतना व्यस्त हैं कि उनका शादी की तरफ ध्यान ही नहीं है। जहां तक एक बेटे और एक अभिनेता के रूप में उनको जज करने की बात हैं तो रणबीर बहुत ही भावुक है कम बोलता है लेकिन समझता सब है। उसको मेरी परवाह है और वो मुझसे बहुत प्यार करता है इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब मैं बहुत बीमार हुआ। जितना दुखी और परेशान मैंने उसको उस वक्त देखा उतना पहले कभी नहीं देखा था। हालाकि वो अपनी मां के करीब ज्यादा रहा है। अभिनेता के तौर पर तो उसको दर्शक ही जज करेंगे, मुझे तो अपना बेटा हमेशा ही अच्छा ही लगता है।

सवाल : आपकी बीमारी को लेकर सभी चितिंत हैं क्या आप अपनी बीमारी को लेकर डरते या निराश नहीं होते?

– नहीं मैं इसे भी सकारात्मक रूप से लेता हूं। मुझे अपनी एक बीमारी का इलाज कराना है, जो मैं विदेश जाकर अच्छे से करा सकता हूं। और ठीक होकर वापस लौट सकता हूं। लेकिन कम से कम मुझे किसी बड़े ऑपरेशन से तो नहीं गुजरना पड़ रहा है जिसके बाद लोगों को महीनों तक दर्द से गुजरना पड़ता है। हालांकि कैंसर भी छोटी बीमारी नहीं है। इंसान होने के नाते थोड़ा सा घबरा जाता हूं, निराश भी हो जाता हूं। लेकिन फिर अपने आप को समझा लेता हूं, कोई नहीं ठीक हो जाऊंगा।

सवालः आपने हाल ही में अपनी बायोग्राफी प्रकाशित की जिसका शीर्षक है ‘खुल्लम खुल्ला’, इसे प्रकाशित करने के पीछे कोई खास वजह ?

-हां … इसकी दो वजह है पहली तो ये कि लोगों को लगता है कि ये स्टार का बेटा है तो अभिनेता बनना इसके लिए आसान होगा। मैंने इस किताब में यही बताया है कि मैंन अभिनेता बनने के लिए कितना संघर्ष किया। भले ही कपूर खानदान का बेटा होने के नाते मुझे शुरुआत अच्छी मिल गई। लेकिन जब मैं अपने करिअर की शुरुआत की थी तो वह दौर एक्शन फिल्मों का था, रोमांटिक फिल्मों का नहीं। उस वक्त से लेकर आज तक एक अभिनेता के तौर पर मेरा सफर कैसा रहा इस किताब में मैने लिखा है । इसमें मैंने अपनी गलतियां, खामियां, परिवार, दोस्तों और करिअर को लेकर कई दिलचस्प बातों को लिखा है। जो मेरे जीते जी ही सबके सामने आना जरूरी था लिहाजा मैंने अपनी बायोग्राफी अपने जीते जी ही प्रकाशित की।

सवाल …आपकी जीवन संगिनी नीतू कपूर ने अपने जीवन के कई सारे खूबसूरत पल आपके साथ गुजारे हैं आप उनके बारे मे क्या कहना चाहेंगे?

-नीतू से मेरा रिश्ता पति पत्नी कम दोस्तों वाला ज्यादा है। वो हर पल मेरे साथ है। खुद को खुशनसीब मानता हूं कि मुझे इतनी प्यार करने वाली पत्नी का साथ मिला। मैं चाहे कितनी भी गलती करूं उसको कितना भी परेशान करूं । वो कभी मुझसे अलग नहीं हुई। कई बार गुस्से में बोल देती थी मैं जा रही हूं तुम को छोड़ कर लेकिन जाती नहीं थी कभी भी। मैं ही उसको छेड़ने के लिए बोल देता था, तो वो मुझे गुस्से वाला लुक देती थी और मेरी हंसी छूट जाती थी। स्

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