ऋषि कपूर हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा दिग्गजों में से थे, जिनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी जितनी आकर्षक और करिश्माई थी, ऑफस्क्रीन उनकी जिंदगी उतनी ही बेबाक, साफगोई से भरी और कई बार विवादों व दिलचस्प किस्सों से घिरी रही। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने न सिर्फ रोमांटिक हीरो के तौर पर दर्शकों के दिलों पर राज किया, बल्कि अपनी स्पष्टवादिता और बेबाक बयानों के लिए भी हमेशा सुर्खियों में रहे।

उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बने रहते हैं-कुछ मजेदार, कुछ प्रेरणादायक और कुछ ऐसे जो उनकी असल शख्सियत को और गहराई से समझाते हैं।

अभिनय की दुनिया में उनका सफर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी निजी जिंदगी, परिवार, संघर्ष, विदेश में इलाज के दौरान के अनुभव और सोशल मीडिया पर उनकी बेबाक राय ने उन्हें एक अलग ही पहचान दी।

आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के 10 ऐसे दिलचस्प पहलू, जो उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग रंगों को सामने लाते हैं और यह बताते हैं कि क्यों ऋषि कपूर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार और चर्चित सितारों में गिने जाते हैं।

सेट पर गुस्सैल लेकिन दिल के बेहद साफ

  1. ऋषि कपूर अपने शुरुआती फिल्मी दौर में थोड़े गुस्सैल और जल्दी प्रतिक्रिया देने वाले स्वभाव के लिए जाने जाते थे। कई बार शूटिंग के दौरान छोटी-छोटी गलतियों या देरी पर वे असिस्टेंट्स या टीम के सदस्यों पर नाराज हो जाते थे।

लेकिन उनकी खासियत यह थी कि उनका गुस्सा लंबे समय तक नहीं रहता था। कुछ ही देर बाद वे खुद ही आगे बढ़कर माफी मांग लेते थे और माहौल को हल्का कर देते थे। यही वजह थी कि सेट पर भले ही कभी तनाव की स्थिति बन जाए, लेकिन उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें दिल से पसंद करते थे, क्योंकि वे दिल के बेहद साफ और सीधे इंसान थे।

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शरारतों के लिए मशहूर

  1. ऋषि कपूर सिर्फ गंभीर या रोमांटिक किरदारों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी शरारती और मज़ाकिया आदतों के लिए भी जाने जाते थे। सेट पर उनका व्यवहार अक्सर हल्का-फुल्का और मनोरंजक होता था। वे सह-कलाकारों के साथ प्रैंक करने में माहिर थे और माहौल को हमेशा जीवंत बनाए रखते थे।

कई बार शूटिंग के दौरान वे अचानक अपने डायलॉग्स में बदलाव कर देते थे या उन्हें अलग अंदाज़ में बोलकर सामने वाले कलाकार को चौंका देते थे। इससे कभी-कभी सीन में हंसी भी छूट जाती थी, लेकिन यही उनकी खासियत थी कि वे गंभीर माहौल को भी आसानी से हल्का बना देते थे और सेट पर एक अलग ही ऊर्जा बनाए रखते थे।

बॉबी की सफलता से मिला सुपरस्टार टैग

  1. ऋषि कपूर के करियर में 1973 की फिल्म बॉबी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात देशभर में सुपरस्टार बना दिया और वह युवाओं के बीच एक रोमांटिक आइकन के रूप में पहचाने जाने लगे।

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उस समय वे इंडस्ट्री में बिल्कुल नए थे और अभिनय का अनुभव बहुत सीमित था। इसके बावजूद फिल्म के कई अहम सीन ऐसे शूट हुए, जहां उनकी नैचुरल स्क्रीन प्रेज़ेंस और सादगी ने कमियों को भी छुपा दिया। दिलचस्प बात यह है कि उनकी इसी अनट्रेंड लेकिन सहज एक्टिंग स्टाइल ने ही बॉबी को और भी खास बना दिया, और फिल्म की सफलता में उनका यही “नेचुरल चार्म” सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

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अपनी आत्मकथा में किए बड़े खुलासे

ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्ल्म खुल्ला में अपनी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से शेयर किए, जो उस समय काफी सुर्खियों में रहे। इस किताब में उन्होंने अपने फिल्मी करियर, निजी जीवन और इंडस्ट्री के अनुभवों को बेहद ईमानदारी और बिना किसी फिल्टर के पेश किया।

उन्होंने न सिर्फ अपने सफल पलों के बारे में लिखा, बल्कि अपनी गलतियों, गुस्से, और व्यक्तिगत संघर्षों को भी खुलकर स्वीकार किया। यही बेबाक अंदाज़ इस किताब की सबसे बड़ी खासियत बनी, जिसने पाठकों को उनके व्यक्तित्व का एक बिल्कुल अलग और वास्तविक रूप दिखाया। उनकी यह आत्मकथा इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि इसमें उन्होंने उन मुद्दों पर भी बात की, जिन पर आमतौर पर सेलिब्रिटी खुलकर बोलने से बचते हैं।

शराब की लत पर खुलकर बात

ऋषि कपूर अपनी बेबाकी के लिए हमेशा जाने जाते थे, और इसी ईमानदारी के साथ उन्होंने अपने जीवन के एक कठिन पहलू पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया कि उनके जीवन में शराब की लत एक समय पर एक बड़ा संघर्ष बन गई थी, जिसका असर उनके निजी और प्रोफेशनल जीवन पर भी पड़ा।

हालांकि, खास बात यह रही कि उन्होंने इस मुद्दे को कभी छुपाया नहीं। समय के साथ उन्होंने अपनी आदतों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया और खुद को बदलने की कोशिश की। उनकी यह स्वीकारोक्ति उन्हें और भी इंसानियत के करीब लाती है, क्योंकि उन्होंने अपनी कमजोरियों को भी बिना झिझक लोगों के सामने रखा।

न्यूयॉर्क में गुमनाम जिंदगी

ऋषि कपूर के जीवन का एक बेहद भावुक और इंसानी पहलू तब सामने आया, जब वे कैंसर के इलाज के लिए लंबे समय तक न्यूयॉर्क में रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी स्टार पहचान से दूर एक बिल्कुल साधारण और शांत जिंदगी जी।

वहां वे न तो किसी फिल्मी चमक-दमक का हिस्सा थे और न ही किसी बड़े स्टार की तरह व्यवहार करते थे। इलाज के बीच वे आम लोगों की तरह दिनचर्या जीते, डॉक्टरों की सलाह मानते और परिवार के साथ समय बिताते थे।

यह दौर उनके लिए केवल मेडिकल ट्रीटमेंट का नहीं, बल्कि आत्म-स्वीकार और जीवन को नए नजरिए से देखने का समय भी था, जिसने उनके व्यक्तित्व को और भी परिपक्व बना दिया।

आखिरी दिनों में भी काम के प्रति जुनून

ऋषि कपूर का फिल्मों के प्रति लगाव और जुनून उनके जीवन के अंतिम दौर तक बना रहा। गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने कभी भी सिनेमा से दूरी नहीं बनाई और लगातार फिल्मों से जुड़े रहे।

इलाज और कमजोरी के बीच भी वे स्क्रिप्ट्स पर चर्चा करते थे, अपने किरदारों को लेकर राय देते थे और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के संपर्क में रहते थे। उनके लिए अभिनय सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन का अहम हिस्सा था, जिसे वे किसी भी परिस्थिति में छोड़ना नहीं चाहते थे।

यही कारण है कि उनके आखिरी दिनों में भी उनका समर्पण और काम के प्रति प्यार साफ दिखाई देता है, जो उन्हें एक सच्चे और जुनूनी कलाकार के रूप में हमेशा यादगार बनाता है।