फिल्म समीक्षा- चेहरे: एक चेहरे में कई चेहरे

‘चेहरे’ एक कोर्ट रूम ड्रामा है और इसमें थ्रिलर के तत्व भी हैं। फिल्म पूरी तरह से अमिताभ बच्चन के उस कौशल पर टिकी है जो उन्होंने लतीफ जैदी नाम के एक फौजदारी के वकील के रूप में निभाई है और जो अदालत में मुजरिम पर संगीन आरोप लगाता है।

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नई फिल्म चेहरे का एक दृश्य। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

वैसे तो इस फिल्म के बड़े किरदार अमिताभ बच्चन हैं और साथ में इमरान हाशमी भी, पर कई लोगों को इस फिल्म का इंतजार रिया चक्रवर्ती की वजह से भी था जिनका नाम सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के बाद लंबे अरसे तक सुर्खियों में रहा। लेकिन ये भी कहना पड़ेगा कि रिया ने जिस रहस्यपूर्ण लड़की का किरदार निभाया है वो कुछ अनगढ़ पहेली की तरह हो गया है।

बहरहाल फिल्म समीर (इमरान हाशमी) नाम के विज्ञापन कंपनी के अधिकारी के संकट से शुरू होती है जो एक ठंडी बर्फीली रात में बियावान में फंस गया है। एक पेड़ गिरने से रास्ता जाम हो गया है। जिस घर में वो शरण लेता है वो एक रिटायर जज का है जहां दो वकील और तीन और लोग मिलकर एक नकली अदालत लगाते हैं। इसमें अपराधियों को सजा भी होती है। ये एक खेल है जिसमें आनाकानी करने के बाद समीर भी शामिल हो जाता है और उस पर मुकदमा चलता है। आखिर में वकीलों की बहसबाजी के बाद फैसला आता है कि उसने एक जुर्म किया है। क्या है ये जुर्म और समीर को क्या सजा मिलती है इसी पर पूरी फिल्म टिकी है।

‘चेहरे’ एक कोर्ट रूम ड्रामा है और इसमें थ्रिलर के तत्व भी हैं। फिल्म पूरी तरह से अमिताभ बच्चन के उस कौशल पर टिकी है जो उन्होंने लतीफ जैदी नाम के एक फौजदारी के वकील के रूप में निभाई है और जो अदालत में मुजरिम पर संगीन आरोप लगाता है। वकील के रूप में वे कभी हंसते-हंसाते तो कभी तीखी नजर से देखते हुए जिस अंदाज में मुकदमे को मंजिल की तरफ ले जाते हैं उसमें ससपेंस भी है और नाटकीयता भी।

निर्देशक जाफरी ने उनको एक स्टाइलिश लुक दिया है जिसमें उनकी लंबी पर नीचे से बंधी हुई दाढ़ी और तिरछी उनी टोपी उनको खुर्राट वकील की तरह पेश करती है। अनु कपूर बचाव पक्ष के वकील बने हैं जो पूरे माहौल को हल्का फुल्का बनाए रखते हैं। क्रिस्टील डिसूजा एक धनी आदमी की बीवी के रूप में हैं जो अपने शौहर से नाराज हैं। फिल्म के अंत में अमिताभ बच्चन का एक लंबा डायलॉग है जिसमें इंसाफ क्या है और निर्भया कांड जैसे मसले भी उभरते हैं।

फिल्म के कहानीकार और पटकथा लेखक रंजीत कपूर हैं। हालांकि फिल्म में इसका उल्लेख नहीं है लेकिन ये उनके निर्देशन में कुछ साल पहले हुए नाटक ‘रांग टर्न’ का फिल्मीकरण है। आकस्मिक नहीं कि ये फिल्म नाटक की शैली में है ज्यादातर घटनाएं एक ही स्थान पर घटती हैं।

फिल्म में अमिताभ बच्चन, इमरान हाशमी, अनु कपूर, रिया चक्रवर्ती, क्रिस्टील डिसूजा, धृतिमान चटर्जी, रघुवीर यादव आदि मुख्य कलाकार है। फिल्म के निर्देशक रूमी जाफरी हैं।

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