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हमारी याद आएगीः योडलिंग के गुरु थे अनूप और चेला किशोर

किशोर कुमार अपने गानों में योडलिंग (गाने में तेजी से आए उतार-चढ़ाव) के लिए जाने जाते हैं, जिसे संगीतकार एसडी बर्मन गला तोड़ कर गाना कहते थे।

कल्याण कुमार गांगुली यानी अनूप कुमार

अनूप कुमार- (24 मार्च 1926 – 20 सितंबर 1997)
कल्याण कुमार गांगुली यानी अनूप कुमार ने बतौर अभिनेता 1950 की फिल्म ‘गौना’ से कैरियर की शुरुआत की थी। ‘देख कबीरा रोया’ (1957), ‘चलती का नाम गाड़ी’ (1958), ‘प्रेम पुजारी’ (1969) ‘अमर प्रेम’ (1970) जैसी कई फिल्मों में काम करने के बावजूद वह अपने बड़े भाई अशोक कुमार और छोटे भाई किशोर कुमार जितने लोकप्रिय नहीं रहे। तीनों भाइयों में सिर्फ अनूप कुमार ने ही संगीत की विधिवत शिक्षा ली थी और किशोर कुमार से पहले उन्होंने योडलिंग सीखी थी। कल, शनिवार, अनूप कुमार का 92वीं जयंती है।

किशोर कुमार अपने गानों में योडलिंग (गाने में तेजी से आए उतार-चढ़ाव) के लिए जाने जाते हैं, जिसे संगीतकार एसडी बर्मन गला तोड़ कर गाना कहते थे। इसी खूबी ने किशोर कुमार को अलग मकाम पर खड़ा कर दिया। यह अलग बात है कि सबसे पहले योडलिंग अनूप कुमार ने सीखी थी। और जब वह अपने परिवार के सामने इसका प्रदर्शन करने गए, तो उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। बिना योडलिंग सीखे किशोर कुमार ने अनूप कुमार को सिखाया कि योडलिंग कैसे की जाती है। यह तब की बात है जब अनूप कुमार खंडवा में थे। किशोर कुमार उनसे तीन साढ़े तीन साल छोटे थे और पूरा परिवार उन्हें लाड़-दुलार करता था। यह बात अनूप कुमार को बहुत खटकती थी। एक सहज-स्वाभाविक ईर्ष्या उनके अंदर पैदा हो गई थी कि उनके बजाय खोका (किशोर कुमार का घरेलू नाम) का परिवार में विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इतना ज्यादा कि उसे पिता के कंधे पर बैठने और उनके सिर पर तबला बजाने का अधिकार तक मिला हुआ था।

तीनों भाइयों की एक बहन थी सती देवी, जिनकी शादी मशहूर निर्माता शशधर मुखर्जी से हुई थी। सती संगीत प्रेमी थी और उनके प्रयासों से गांगुली परिवार में संगीत को लेकर गतिविधियां चलती रहती थीं। तीनों भाइयों में से संगीत की शिक्षा अनूप कुमार ने ली थी। यह नियति थी कि बनारस से संगीत विशारद करने वाले अनूप कुमार फिल्मों में गायक नहीं बन पाए, जबकि संगीत नहीं सीखने के बावजूद अशोक कुमार और किशोर कुमार फिल्मों में गायक के रूप में लोकप्रिय रहे।

चूंकि स्थानीय समारोहों में किशोर कुमार गाना गा चुके थे, इसलिए परिवार में उनका सम्मान और बढ़ गया था। इसे देखते हुए अनूप कुमार ने तय कर लिया था कि वह अपने छोटे भाई से बेहतर गायक बन कर दिखाएंगे। एक दिन अनूप कुमार ने बाजार से योडलिंग का एक एलपी (लांग प्लेइंग) रेकॉर्ड लाए। किशोर कुमार ने जब देखा कि अनूप कुमार कोई खास रेकॉर्ड लाएं हैं, तो उन्होंने जानना चाहा कि यह क्या है। मगर अनूप कुमार ने सहज ईर्ष्यावश उनकी उपेक्षा की और कमरे का दरवाजा बंद कर रेकॉर्ड लगा कर योडलिंग का रियाज करने लगे।

कुछ दिनों के रियाज के बाद अनूप कुमार को जब लगा कि वे ठीक तरह से योडलिंग करने लगे हैं, तो एक दिन उन्होंने घर वालों के सामने अपने ‘ज्ञान’ का प्रदर्शन करना तय किया। घर के सारे लोग बैठे थे। अनूप कुमार ने जो कुछ सीखा था उसका प्रदर्शन किया। घर वाले बड़े खुश हुए। तालियां बजार्इं, हौसला बढ़ाया। अनूप कुमार ने गर्व से गर्दन अकड़ा कर अपने छोटे भाई की ओर देखा। मगर किशोर कुमार ने उनकी परवाह नहीं की और तुरंत सीधी चुनौती देते हुए कहा कि योडलिंग करना कौन-सी बड़ी बात है। वह भी योडलिंग कर सकते हैं। फिर किशोर कुमार ने बिना किसी की प्रतिक्रिया का इंतजार किए योडलिंग करनी शुरू की, तो परिवार के लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली, क्योंकि वह न सिर्फ अनूप कुमार से बेहतर योडलिंग कर रहे थे, बल्कि किसी निपुण गायक की तरह गा रहे थे। परिवार के लोगों ने खुश हो कर डबल तालियां बजार्इं, तो अनूप कुमार मायूस हो गए।

अपने छोटे भाई से मिली हार से खिसियाए अनूप कुमार समझ नहीं पा रहे थे कि खोका ने आखिर योडलिंग कब सीख ली जबकि उस रेकॉर्ड को उन्होंने किशोर कुमार को छूने तक नहीं दिया था, छुपा कर रखा था। उन्होंने किशोर कुमार से पूछा कि उन्होंने यह सब कहां से सीखा। तब किशोर कुमार ने बताया कि जब अनूप कुमार बंद कर योडलिंग का रियाज किया करते थे, तब वह दरवाजे के बाहर खड़े होकर उसे ध्यान से सुनते थे और बाद में खुद उसका रियाज करते थे।

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