आज के दौर में 2 घंटे 20 मिनट की फिल्म को भी लंबी कहा जाने लगता है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब फिल्में 4-4 घंटे या उससे भी ज्यादा अवधि की हुआ करती थी। इतना ही नहीं, कुछ फिल्में तो ऐसी हैं, जिनकी अवधि के कारण उनमें दो-दो इंटरवल दिए गए। यह दौर था 60 और 70 के दशक का, जब सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक इवेंट हुआ करता था। लोग पूरे परिवार के साथ फिल्म देखने जाते थे। आज इस खबर के जरिए हम आपको उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जो इतनी लंबी अवधि होने के बाद भी बेहद पसंद की गईं। साथ ही हिंदी फिल्म के इतिहास में ये ही फिल्में ऐसी हैं जिनमें दो इंटरवल हुए।
राज कपूर ने बनाई ये फिल्में
संगम
18 जून 1964 को रिलीज हुई ‘संगम’ फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे लंबी फिल्मों में से एक है। इसका निर्देशन राज कपूर ने किया था और इसमें अभिनय भी उन्होंने ही किया था। इस फिल्म का रनटाइम 238 मिनट यानी 3 घंटे 58 मिनट था। जहां आमतौर पर फिल्में एक इंटरवल के साथ चलती हैं, इस फिल्म को ज्यादातर सिनेमाघरों में 2 इंटरवल के साथ दिखाया गया था।
ये फिल्म लव ट्रायंगल पर आधारित है, जिसमें जिसमें राज कपूर, राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी का रनटाइम इसलिए ज्यादा था क्योंकि कहानी को काफी विस्तार से पेश किया गया। इसकी शूटिंग भारत के अलावा विदेशों में भी की गई थी, इसके लिए भव्य सेट लगाए गए थे। फिल्म का म्यूजिक भी जबरदस्त था, जिसके कारण ये फिल्म काफी पसंद की गई।
यह भी पढ़ें: क्या होती है मेथड एक्टिंग, लुक्स ही नहीं दिमागी तौर पर खुद को बदल लेते हैं अभिनेता | सिनेमा का सिस्टम
ब्लॉकबस्टर बनी थी फिल्म
ये एक ब्लॉकबस्टर और सुपरहिट फिल्म थी। ‘संगम’ उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बनी। यह फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ के बाद उस दौर की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। फिल्म का बजट लगभग 80 लाख से 1.60 करोड़ के बीच था और इसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 4 करोड़ रुपये और वर्ल्डवाइड 8 करोड़ का बिजनेस किया था। राज कपूर स्टारर फिल्म इतनी पसंद की गई थी कि इसे 100 हफ्तों से ज्यादा समय तक थिएटर में दिखाया गया था।
मेरा नाम जोकर
हिंदी सिनेमा की सबसे लंबी फिल्मों में ‘मेरा नाम जोकर’ का नाम भी शामिल है। ये फिल्म 255 मिनट यानी 4 घंटे 15 मिनट लंबी है। इस फिल्म को दो इंटरवल के साथ रिलीज किया गया था। इसका निर्देशन और इसमें अभिनय दोनों ही राज कपूर ने किया था। उन्होंने इस फिल्म को तीन अध्यायों में बांटा, जिनमें जोकर के जीवन के अलग-अलग चरण दिखाए गए। हर अध्याय में एक नई प्रेम कहानी और जीवन का नया अनुभव था। यह एक आत्मकथात्मक शैली की फिल्म थी, जिसमें एक कलाकार की जिंदगी के संघर्ष और दर्द को गहराई से दर्शाया गया।
यह भी पढे़ं: रील गाथा: नाइट क्लब से शुरू हुआ इश्क, पति के सामने हुआ इजहार- खास है पॉप क्वीन की प्रेम कहानी
बॉक्स ऑफिस पर हुई फ्लॉप लेकिन बाद में बनी कल्ट
रिलीज के समय फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन बाद में इसे क्लासिक और कल्ट का दर्जा मिला। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘मेरा नाम जोकर’ का बजट 1.2 से 1.5 करोड़ रुपये था। भारत में ये डिजास्टर मानी गई, लेकिन कहानी, गहराई और समय से आगे के सिनेमाई प्रयोगों के कारण फ्लॉप होने के बावजूद ये फिल्म एक ‘कल्ट क्लासिक’ बनी। फिल्म में राज कपूर, ऋषि कपूर, सिमी गरेवाल, सेनिया रियाबिनकिना, पद्मिनी, मनोज कुमार, धर्मेंद्र और दारा सिंह मुख्य किरदारों में थे।
अब जहां दर्शक फिल्म के रनटाइम सुनकर ही लंबी फिल्में देखने से कतराते हैं, उस दौरा में दर्शकों को ये बोझ नहीं लगता था। बल्कि जितनी लंबी फिल्म होती थी, दर्शक उसे उतना ही पैसा वसूल मानते थे।
खास था मेरा नाम जोकर का स्टार कास्ट
राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में सर्कस में काम करने वाली एक्ट्रेस ‘सेनिया रेबेंकीना’ रूस की एक बैले डांसर थीं। राज कपूर की जिंदादिली और रंगीन मिजाज के बारे में हर कोई जानता ही हैं। सेनिया रेबेंकीना के साथ भी कुछ ऐसा हुआ था, राज कपूर ने उनका बैले डांस देखा था और वो इतना इंप्रेस हुए कि उन्होंने उनको अपनी फिल्म में रोल ऑफर कर दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
