ताज़ा खबर
 

आमने-सामने: खलनायक की वजह से नायक की होती है कद्र : रजा मुराद

कड़क व दमदार आवाज के धनी और करीबन पांच सौ फिल्मों में नाना प्रकार का अभिनय कर अपनी कलाकारी का लोहा मनवाने वाले रजा मुराद का कहना है कि खलयानक हर युग में होते थे।

Author July 13, 2018 07:03 am
मुराद का कहना है कि खलनायक के कारण फिल्मों यानी पर्दे पर नायक की जय-जयकार होती है।

शंकर जालान

कड़क व दमदार आवाज के धनी और करीबन पांच सौ फिल्मों में नाना प्रकार का अभिनय कर अपनी कलाकारी का लोहा मनवाने वाले रजा मुराद का कहना है कि खलयानक हर युग में होते थे। मुराद का कहना है कि खलनायक के कारण फिल्मों यानी पर्दे पर नायक की जय-जयकार होती है। बीते दिनों एक कार्यक्रम में शिरकत करने कोलकाता आए रजा मुराद से पेश है बातचीत…

सवाल : बीते 15-20 साल के दौरान हिंदी फिल्मों में आए बदलाव को आप किस निगाह से देखते हैं?

बदलाव समय का नियम है। हिंदी फिल्मों में भी बीते एक-डेढ़ दशक में काफी बदलाव आया है। पहले एक जैसी कहानियों पर आधारित फिल्मों का बोलबाला था मतलब मिलना-बिछड़ना, प्रेम विवाह और संपत्ति विवाद के अलावा इतिहास पर केंद्रित फिल्में बनती थीं, लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज ऐसे लोगों पर फिल्में बन रही हैं, जो अभी भी इस दुनिया में हैं। सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और संजय दत्त का उदाहरण हमारे सामने है।

सवाल : बड़े बजट की फिल्म पर आप क्या कहेंगे?

बीते कुछ सालों में फिल्मों का बाजार बढ़ा है, इसलिए उनका बजट भी बढ़ा है, लेकिन मैं मानता हूं कि फिल्म को हिट कराने में बजट की तुलना में कहानी और कलाकारों की अहम भूमिका होती है।

सवाल : फिल्म की सफलता और विफलता में एक खलनायक की क्या भूमिका होती है?

फिल्म में खलनायक है, इसीलिए नायक की जय-जयकार होती है। अगर खलनायक न हो तो हीरो को वाहवाही मिलना मुश्किल है। वैसे खलनायक हर जमाने में रहे हैं। मेरा मानना है कि फिल्म की सफलता-विफलता में जितनी भूमिका नायक-नायिका की होती है उतनी ही खलनायक की भी होती है।

सवाल : क्या एक खलनायक भी फिल्म को हिट बना सकता है?

क्यों नहीं, शोले के गब्बर (अमजद खान), मिस्टर इंडिया के मोगेंबो (अमरीश पुरी) की भूमिका को कौन भूल सकता है। ताजा उदाहरण फिल्म गजनी का है, जिसका नाम ही खलनायक के नाम पर रखा गया था। इसके अलावा कर्मा के डॉ डैंग (अनुपम खेर) की भूमिका कभी नहीं भुलाई जा सकती। ऐसी फिल्में थीं, जो खलनायक की दमदार भूमिका की वजह से याद की जाती हैं।

सवाल : नायक, खलनायक और चरित्र अभिनेता का अभिनय करने में मूल रूप से क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं है, केवल कहानी का अंतर होता है। कलाकार एक ही होता है उसे स्क्रिप्ट के मुताबिक अभिनय करना होता है। अच्छा कलाकार वही कहलाता है जो हर चरित्र में अपने आप को ढाल ले।

सवाल :किस फिल्म की भूमिका आपको सबसे अच्छी लगी?

वैसे तो कई हैं, लेकिन बात अगर सबसे अच्छी की करें तो फिल्म हिना में शाहबाज खान की भूमिका।

सवाल : क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने जो रोल ठुकरा दिया और फिल्म बनने के बाद ऐसा महसूस हुआ कि मैंने गलती की?

नहीं, मेरे साथ कुछ उल्टा है। जिस फिल्म को अन्य कलाकारों ने ठुकरा दिया था, उसे मैंने किया और उन्हें पछतावा हुआ। जैसे- राम तेरी गंगा मैली में भगवत चौधरी का रोल और डकैत में ठाकुर भंवर सिंह का रोल अमरीश पुरी करने वाले थे, वैसे ही फूल और कांटे में शंकरा का रोल सदाशिव अमरापुरकर करने वाले थे, लेकिन इन दोनों के मना करने पर मैंने किया और मेरी भूमिका लोगों को खूब पसंद आई। शायद फिल्म रिलीज होने पर अमरीश पुरी व सदाशिव अमरापुरकर को पछतावा हुआ हो।

सवाल :आपके प्रिय नायक, नायिका और खलनायक कौन हैं?

नायक के तौर दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, नसीरुद्दीन शाह, नायिका की बात करें तो मधुबाला, माधुरी दीक्षित, करीना कपूर और खलनायक की भूमिका के लिए प्राण व अमरीश पुरी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App