थलापति विजय की राजनीति में पूरी तरह एंट्री से पहले आने वाली उनकी फिल्म ‘जन नायकन’ से संक्रांति के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की उम्मीद थी। करीब 500 करोड़ रुपये के बड़े बजट में बनी इस फिल्म को सीजन की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा था। लेकिन एडवांस बुकिंग और हाउसफुल शो की खबरों के बजाय अब फिल्म की रिलीज पर संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, फिल्म निर्माता सेंसर बोर्ड से जुड़े एक विवाद में फंस गए हैं, जिसके चलते रिलीज डेट टलती नजर आ रही है।
इस पूरे मामले में अभिनेता और सांसद रवि किशन ने मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई फिल्म सेंसर बोर्ड में अटकी है तो वे एक फोन कॉल से मामला सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। रवि किशन के मुताबिक, सांसद होने के नाते फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सर्टिफिकेशन में देरी की वजह सेंसर बोर्ड पर बढ़ा हुआ काम और कड़ी जांच प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें भाषा, धार्मिक भावनाओं और सच्ची घटनाओं के सही चित्रण जैसी बातों को देखा जाता है।
रवि किशन ने भरोसा दिलाया कि फिल्म इंडस्ट्री की देखभाल करना उनकी जिम्मेदारी है और कलाकारों व निर्माताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे और सूचना मंत्रालय से बात करेंगे, ताकि सेंसर बोर्ड को और बेहतर बनाया जा सके और फिल्मों को समय पर सर्टिफिकेट मिल सके।
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SCREEN से खास बातचीत में, रवि किशन ने कहा कि बस एक फोन कॉल देर है। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में आपसे ही पता चला है। वैसे तो मुझे कोई शिकायत नहीं मिली है। लेकिन सांसद होने के नाते सिनेमा जगत के लोग मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। वे मुझे पत्र लिख सकते हैं या फोन कर सकते हैं। अगर कोई फिल्म अटकी हुई है, तो मैं सेंसर बोर्ड को जरूर फोन कर सकता हूं।”
सर्टिफिकेट मिलने में देरी की बढ़ती समस्या के बारे में बताते हुए अभिनेता ने सेंसर बोर्ड पर बढ़ते कार्यभार और कड़ी निगरानी का हवाला दिया। उन्होंने आगे कहा, “देरी का कारण यह हो सकता है कि उन्हें फिल्म में कई चीजों की जांच करनी पड़ती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि भाषा सही हो, किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे और वास्तविक जीवन की घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। इस प्रक्रिया में बहुत कुछ शामिल होता है। असली सवाल यह है कि पैनल के सदस्य एक दिन में कितनी स्क्रीनिंग कर सकते हैं।” फिल्म जगत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए रवि किशन ने आगे कहा, “आपके माध्यम से मैं यह संदेश अपने परिवार फिल्म उद्योग तक पहुंचाना चाहता हूं। वे सीधे मुझसे संपर्क कर सकते हैं। यह सब हमारी सरकार के सत्ता में रहते हुए हो रहा है, इसलिए अपने फिल्म जगत की देखभाल करना मेरी जिम्मेदारी है। उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।”
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अभिनेता ने आगे बताया कि वह इस फिल्म मुद्दे को संसदीय स्तर पर उठाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं सूचना मंत्रालय से व्यक्तिगत रूप से बात करूंगा। संसद का सत्र जल्द ही शुरू होने वाला है, और मैं इस बात पर चर्चा जरूर करूंगा कि हम सेंसर बोर्ड को कैसे बेहतर बना सकते हैं, इसे बड़ा, बेहतर उपकरणों से लैस और प्रमाणन प्रक्रिया में तेज कर सकते हैं ताकि निर्माता फिल्मों को समय पर रिलीज कर सकें।”
पिछले एक साल में सेंसर बोर्ड की सख्ती के कारण कई फिल्मों को परेशानी झेलनी पड़ी है। इसका एक उदाहरण शिवकार्तिकेयन की फिल्म ‘पराशक्ति’ है, जिसे रिलीज से सिर्फ एक दिन पहले सर्टिफिकेट मिला। इतने कम समय में 25 से ज्यादा बदलाव करने पड़े, जिसका असर फिल्म पर पड़ा और वह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। अब थलापति विजय की फिल्म को भी इस मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
