रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी पेच में उलझता नजर आ रहा है। फिल्म से रणवीर सिंह के कथित तौर पर अचानक अलग होने के बाद फरहान अख्तर और प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने पहले FWICE का रुख किया था। वहां से मामला आगे नहीं बढ़ा तो अब IMPPA में शिकायत पहुंची है।
रणवीर ने IMPPA के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
IMPPA ने एक्सेल एंटरटेनमेंट का पक्ष सुनने के बाद रणवीर सिंह को भी अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। रणवीर के पिता जगजीत सिंह भवनानी IMPPA से मिलने के लिए तैयार हुए, लेकिन अभिनेता की लीगल टीम ने संस्था को लिखित जवाब भेजते हुए मामले से दूर रहने की अपील की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर की टीम ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर IMPPA ने इस मामले में कोई कार्रवाई की तो कानूनी कदम उठाया जा सकता है। रणवीर ने कुछ महीने पहले FWICE के खिलाफ भी इसी तरह का रुख अपनाया था।
रणवीर का दावा- कोई औपचारिक एग्रीमेंट नहीं, सिर्फ MoU था
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात आलोचना का यह दावा है कि ‘डॉन 3’ को लेकर उनके और एक्सेल एंटरटेनमेंट के बीच कोई ‘फॉर्मल एग्रीमेंट’ नहीं हुआ था। उनका कहना है, दोनों के बीच सिर्फ एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू था।
इसी आधार पर रणवीर की टीम का कहना है कि फिल्म से जुड़े संगठनों को इस विवाद में दखल देने के बजाय एक्सेल एंटरटेनमेंट को अदालत का रुख करना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या MoU कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं होता? एक्सपर्ट ने बताया- MoU भी हो सकता है कानूनी रूप से बाध्यकारी
मीडिया और एंटरटेनमेंट लॉयर संजय वासुदेवन के मुताबिक, असली MoU और उससे जुड़े दस्तावेज देखे बिना यह तय करना संभव नहीं है कि रणवीर और एक्सेल के बीच हुआ एमओयू कानूनी रूप से बाध्यकारी था या नहीं।
उनका कहना है कि अलग से कोई लंबा और विस्तृत एग्रीमेंट न होना महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पक्षों के बीच कोई लागू होने वाला अनुबंध था ही नहीं।
कोर्ट एमओयू की भाषा पर गौर कर सकता है। मसलन, ‘करेगा’ या ‘उपक्रम’ जैसे कि इंस्ट्रक्शन शब्द का इस्तेमाल किया गया है या नहीं, क्या शामिल है ‘अनुबंध के अधीन’ शर्त मौजूद है और इसमें अभिनेता की भूमिका, फीस, शूटिंग की तारीखें, एक्सक्लूसिविटी, प्रमोशन, एग्रीमेंट खत्म करने के अधिकार और संबंधित लेख जैसे अहम बातें तय की गई थीं।
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पार्टियों का बाद का व्यवहार भी होगा अहम
एक्सपर्ट के मुताबिक, एमओयू के बाद रणवीर और एक्सेल का व्यवहार भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है। क्या रणवीर को कोई एडवांस दिया गया था? क्या उनकी तारीखें ब्लॉक की गई थीं? क्या फिल्म की प्री-प्रोडक्शन एक्टिविटीज शुरू हो चुकी थीं? क्या फिल्म की आधिकारिक घोषणा हुई थी? और क्या दोनों पक्ष बाद में भी कारोबारी या क्रिएटिव शर्तों पर बातचीत करते रहे?
‘डॉन 3’ का प्रोमो करीब तीन साल पहले रणवीर और एक्सेल एंटरटेनमेंट ने साथ में लॉन्च किया था। इसमें रणवीर को फिल्म के टाइटल रोल में दिखाया गया था। एक्सेल की ओर से फिल्म के आउटडोर शूट की तैयारियों और प्री-प्रोडक्शन में हुए खर्च से जुड़े दस्तावेज भी सामने रखे गए हैं।
अगर एमओयू बाध्यकारी निकला तो क्या होगा?
अगर अदालत ने यह माना है कि विचारधारा के आधार पर दोनों पक्षों के बीच एक सहमति बनी है, तो डेमोकेल के अनुसार नुकसान की भरपाई जैसे कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकते हैं।
हालांकि, किसी अभिनेता को उसकी व्यक्तिगत और रचनात्मक सेवाएं देने के लिए मजबूर करना कानूनी और व्यावहारिक रूप से काफी मुश्किल हो सकता है।
असली फैसला एमओयू की भाषा और परिस्थितियों पर निर्भर
फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर प्रारंभिक टर्म शीट या एमओयू के बाद विस्तृत प्रतिभा या कलाकार समझौता होता है। इसमें फीस, शॉट शीट, आकर्षक एट्रेंसटल, प्रमोशन, क्रेडिट, आईपी, समाप्ति और देनदारी शेष विस्तार से तय होती हैं।
इसलिए यह देखना जरूरी होगा कि ‘डॉन 3’ का एमओयू किसी भविष्य के विस्तृत एग्रीमेंट पर निर्भर था और उसमें अहम शर्तें अभी तय होनी बाकी थीं, या फिर MoU ने पहले ही दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता तय कर दी थी और बाद का एग्रीमेंट सिर्फ उसकी औपचारिकताओं को दर्ज करने वाला था।
यानी रणवीर का यह कहना कि ‘सिर्फ एमओयू था’, अपने आप में मामले को खत्म नहीं करता। आखिरकार एमओयू की सटीक भाषा, उससे जुड़े दस्तावेज और दोनों पक्षों के बाद के व्यवहार के आधार पर ही तय होगा कि यह समझौता कानूनी रूप से कितना बाध्यकारी था।
