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एक्ट्रेस होने के नाते ग्लैमर के साथ काम करना ज़रूरी- भोजपुरी फिल्मों की अश्लीलता पर बोली थीं रानी चटर्जी

रानी चटर्जी का कहना है कि भोजपुरी फिल्मों में जब मनोज तिवारी, रवि किशन का दौर था तब ऐसी फ़िल्में नहीं बनती थीं। वो अपनी सीमा जानते थे और उन्हें अपने संस्कृति की समझ थी।

रानी चटर्जी ने साल 2003 में भोजपुरी फिल्मों में कदम रखा

भोजपुरी फिल्मों और गानों पर अक्सर अश्लीलता का आरोप लगता रहता है। इन आरोपों के घेरे में भोजपुरी के बड़े कलाकार  और गायक भी आते हैं। भोजपुरी फिल्मों की जानी – मानी एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि एक एक्ट्रेस होने के नाते थोड़ा ग्लैमर होना ज़रूरी है। एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में रानी चटर्जी ने कहा, ‘ जब से मैंने अपना करियर शुरू किया और मेरी पहली फिल्म ‘ससुरा बड़ा पैसावाला’, रिलीज़ हुई तब भी ये सवाल किया जाता था और अब 16 साल बाद भी यह सवाल किया जाता है। मैं अश्लील गाने नहीं करती लेकिन थोड़ा – बहुत तो ग्लैमर होगा ही। एक एक्ट्रेस के तौर पर ग्लैमर के साथ काम करना ज़रूरी है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा कई बार हुआ है और मैंने कहा है कि ये चीज़ थोड़ी ठीक नहीं लग रही, इसे बदल सकते हैं क्या? तो जो लोग बिहार से होते हैं वो कहते हैं कि नहीं! हमारे यहां ऐसा ही होता है। हमारे यहां यही चाहिए तो एक एक्ट्रेस होने के नाते हमें वो करना पड़ता है।’ रानी चटर्जी ने बताया कि अधिकतर भोजपुरी एक्ट्रेस के साथ यही होता है, उन्हें पता नहीं होता कि वाकई में वो क्या कर रहीं हैं। उन्हें पढ़ाया ही ये जाता है कि हमारे यहां तो यही चलता है।

उन्होंने आगे बताया, ‘मैंने भी शुरू में कुछ गाने किए, क्योंकि मुझे यहां का कल्चर नहीं पता था। जब मैं समझने लगी चीज़ों को तो पिछले तीन- चार साल से मैं उस तरह के न गाने करती हूं, न फिल्में।’ रानी का कहना है कि भोजपुरी फिल्मों और गानों में जो अश्लीलता फैलाते हैं, वो अधिकतर बिहार से ही आते हैं। उन्होंने बताया, ‘अश्लीलता जो लोग फैलाते हैं वो मुंबई से नहीं हैं,  मैं मुंबई से हूं और भी बहुत से लोग हैं इंडस्ट्री में मुंबई से। अश्लील गाने अधिकतर बिहार से ही आते हैं।’

 

रानी ने आगे बताया, ‘भोजपुरी फिल्मों में जब रवि किशन, मनोज तिवारी का दौर था, मैं भी उन्हीं के दौर से काम करती आ रही हूं। ये लोग बड़े सुलझे हुए अभिनेता थे, अपनी सीमाएं जानते थे और उन्हें अपनी संस्कृति की भी अच्छी समझ थी। इसलिए वो कभी वैसी फिल्में करते ही नहीं थे। बाद के दौर में सब कुछ बदल गया। आपको बता दें कि रानी चटर्जी ने अपने करियर की शुरुआत साल 2003 की फिल्म ‘ससुरा बड़ा पैसावला’ से की थी जिसमें मनोज तिवारी उनके सह- कलाकार थे। रानी चटर्जी की कुछ सफल फ़िल्में हैं, देवरा बड़ा सतावेला, छोटकी दुल्हन, दुर्गा, घरवाली- बाहरवाली, जानम आदि।

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