1970 के दशक में जब बॉलीवुड पर रोमांटिक और सोशल ड्रामा फिल्मों का दबदबा था, तब रामसे ब्रदर्स ने हॉरर फिल्मों के जरिए बॉक्स ऑफिस पर अलग पहचान बनाई। ‘दो गज़ की ज़मीन’, ‘पुराना मंदिर’, ‘वीराना’, ‘पुरानी हवेली’ और ‘बंद दरवाज़ा’ जैसी फिल्मों ने जबरदस्त कमाई की, लेकिन इसके बावजूद इंडस्ट्री उन्हें अक्सर “सी-ग्रेड फिल्ममेकर” कहकर मजाक उड़ाती थी।

हाल ही में निर्देशक दीपक रामसे ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे कम बजट में फिल्में बनाने के बावजूद रामसे ब्रदर्स लगातार हिट देते थे। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों का बजट बेहद छोटा होता था और उस दौर में यह “एक्सपेरिमेंटल सिनेमा” माना जाता था। नए कलाकारों को लेना, अजीब जीव-जंतु दिखाना और पूरी टीम को महाबलेश्वर ले जाकर शूट करना बड़े फिल्मी परिवारों को मजाक जैसा लगता था।

दीपक रामसे ने कहा कि जहां बड़े निर्माता भारी बजट, सैकड़ों लोगों की टीम और बड़े सेट्स पर पैसा खर्च करते थे, वहीं रामसे ब्रदर्स कम लागत में ऐसी फिल्में बनाते थे जो लगातार मुनाफा कमाती थीं। कई डिस्ट्रीब्यूटर उनकी फिल्मों से इतना कमाए कि खुद बड़े डिस्ट्रीब्यूटर बन गए।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उस दौर में जब अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र की फिल्म रिलीज होती थी, तब कोई निर्माता अपनी फिल्म साथ रिलीज करने की हिम्मत नहीं करता था। माना जाता था कि ऐसी टक्कर में फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन रामसे ब्रदर्स उन चुनिंदा फिल्ममेकर्स में थे जो सुपरस्टार फिल्मों के साथ अपनी हॉरर फिल्में रिलीज करते थे। दीपक के मुताबिक, “हमें अपनी फिल्मों पर भरोसा था।”

दीपक रामसे ने बताया कि लोग उनके पिता तुलसी रामसे से कहते थे कि “बड़ा सोचो, बड़े बजट की फिल्म बनाओ।” लेकिन बड़े बजट वाली फिल्में भी कई बार फ्लॉप हो जाती थीं, जबकि रामसे ब्रदर्स की फिल्में शायद ही कभी असफल होती थीं।

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कपूर परिवार से तुलना पर दीपक ने कहा कि राज कपूर और रामसे ब्रदर्स की फिल्मों का जॉनर पूरी तरह अलग था, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि रामसे परिवार किसी “फिल्म फैक्ट्री” की तरह काम करता था- फिल्म की शुरुआत से लेकर रिलीज तक हर काम परिवार मिलकर करता था और कोशिश रहती थी कि फिल्म हिट हो।

दिलचस्प बात यह है कि रामसे ब्रदर्स को हॉरर फिल्मों की प्रेरणा पृथ्वीराज कपूर की एक फिल्म से मिली। 1970 में बनी ‘एक नन्ही मुन्नी लड़की थी’ में एक सीन के दौरान पृथ्वीराज कपूर भारी मेकअप में दिखाई दिए थे। थिएटर में दर्शकों की चीखें सुनकर F. U. Ramsay और तुलसी रामसे को एहसास हुआ कि दर्शकों को डरावनी फिल्मों में दिलचस्पी है। इसी घटना ने उन्हें फुल-फ्लेज्ड हॉरर फिल्में बनाने की प्रेरणा दी।

हालांकि शुरुआती दौर में बॉलीवुड ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन ‘पुराना मंदिर’ की सफलता के बाद इंडस्ट्री के बड़े फिल्म परिवार भी रामसे ब्रदर्स को नोटिस करने लगे। एक इंटरव्यू में तुलसी रामसे ने कहा था, “लोग हमारा मजाक उड़ाते थे, लेकिन हमारी फिल्में देखने जरूर जाते थे।”

1990 के दशक के बाद रामसे ब्रदर्स ने टीवी की ओर रुख किया। बाद में राम गोपाल वर्मा और विक्रम भट्ट जैसे निर्देशकों ने ‘रात’, ‘भूत’ और ‘राज़’ जैसी फिल्मों से बॉलीवुड हॉरर को फिर से मुख्यधारा में लोकप्रिय बनाया।

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