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शर्म करो! कान खोलकर सुन लो सारे, यही हमारा गांव है- हरियाणा सरकार के सलाहकार पर भड़के राकेश टिकैत

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार के सलाहकार विनोद मेहता और राकेश टिकैत के बीच रिपब्लिक टीवी पर जमकर बहस हो गई। राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर लगे उनके टेंट ही उनका गांव है और किसान कृषि कानूनों के वापस हुए बिना घर नहीं जाएंगे।

किसान नेता राकेश टिकैत (Photo- PTI)

कोरोना महामारी के बीच पिछले 5 महीनों से अधिक समय से जारी किसान आंदोलन चल रहा है। आंदोलन को स्थगित करने का दबाव भी किसान नेताओं पर है जिस पर उनका कहना है कि आंदोलन बंद नहीं किया जाएगा। हाल ही में किसान नेता और राष्ट्रीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत किसान आंदोलन को स्थगित करने के सवाल पर भड़क गए। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार के विशेष सलाहकार विनोद मेहता से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत उन पर जमकर बरसे और कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर लगे उनके टेंट ही उनका गांव है और किसान कृषि कानूनों के वापस हुए बिना घर नहीं जाएंगे।

रिपब्लिक टीवी के डिबेट शो ‘पूछता है भारत’ पर बोलते हुए विनोद मेहता ने कहा, ‘टिकैत साहब, भ्रम मत फैलाओ, पंजाब के अखबार भरे पड़े हैं ऐसी खबरों से। 7 किसान गए थे सिंघू बॉर्डर पर, उनकी मौत हो गई।’ विनोद मेहता ने किसानों के मौत की खबर से जुड़ी अखबारों की कटिंग दिखाई जिस पर राकेश टिकैत ने कहा कि उनकी बात सरकार से कारवाई जाए। वो बोले, ‘बात करवा दो हमारी सरकार से। ये बहाना नहीं चलेगा। सुन लो, ये कागजी बहाना नहीं चलेगा।’

उनकी इस बात पर विनोद मेहता ने कहा, ‘दुनिया का कोई आंदोलन, इंसान की जीवन से ऊपर नहीं हो सकता। आप भोले भाले किसानों के ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रहे हो। गांव में संक्रमण की दर कभी इतनी ज्यादा नहीं रही, ये सभी लोग..कोई टिकरी पर था, कोई कुंडली पर था। आपने इतना नाजायज काम कर रखा है, 10 लोगों की ड्यूटी लगा रखी है। वो गांव से आते हैं, आप उनको कोरोना गिफ्ट में देते हैं और वो जाकर पूरे गांव को देते हैं। ‘

 

उनकी इस बात पर राकेश टिकैत भड़क गए और बोले, ‘मतलब ये बीमारी सारी यहां से ही आई है? शर्म करो, शर्म। ये भारत सरकार के लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं। जब तक बातचीत नहीं, ये हमारे गांव हैं, हमारी कालोनी हैं, ये कान खोल कर सुन लो सारे के सारे।’

 

विनोद मेहता ने यह भी कहा कि अगर ये किसान आंदोलन यूरोप के किसी देश में होता तो इंटरनेशनल मीडिया आंदोलन पर तीखे सवाल खड़े करता जबकि भारतीय मीडिया किसानों के प्रति नरम है। वो बोले, ‘अगर यही आंदोलन किसी यूरोप के देश में होता तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया आपकी जान खा जाता। हिंदुस्तान का मीडिया आपके प्रति सॉफ्ट है। अगर वहां आप इस महामारी में आंदोलन कर रहे होते तो आपको पता लग जाता कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया आपका क्या हाल करता।’

 

जवाब में राकेश टिकैत ने कहा, ‘हिंदुस्तानी मीडिया है कहां? उसे तो खरीद लिया सरकार ने।’

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