गलत इंटरव्यू मत चलाओ- लाइव डिबेट में अमिश देवगन की बात पर खफ़ा हो गए राकेश टिकैत, सफाई देने लगे एंकर

इंटरव्यू के दौरान टिकैत खफा हो जाते हैं और कहते हैं, ‘नहीं… नहीं… गलत इंटरव्यू मत चलाओ। मैंने ये कब कहा था? इस पर अमिश देवगन मुस्कुराते हुए सफाई देने लगते हैं।

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किसान नेता राकेश टिकैत (Photo-PTI)

न्यूज 18 इंडिया के एक लाइव इंटरव्यू में किसान नेता राकेश टिकैत उस वक्त खफा हो गए जब अमिश देवगन ने उनसे पूछ लिया कि ‘आपने कहा था कि आपका पॉलिटिकल मोटिव भी है। आप बीजेपी को वोट की चोट देना चाहते हैं।’ देवगन की इस बात पर टिकैत ने कहा कि मैंने ऐसा कब कहा था? वोट की चोट का मतलब ये है कि जनता अब इन्हें वोट नहीं देगी…।

दरअसल, इंटरव्यू ‘भारत बंद’ को लेकर था। बातचीत के दौरान अमिश देवगन ने राकेश टिकैत से कहा- ‘कुछ लोग तो काम पर भी नहीं जा पाए, जाम में ही खड़े रहे। आपकी लड़ाई तो सरकार से है, लेकिन आप सरकार से बात करने को तैयार नहीं हैं? आज भी नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा हमारे चैनल पर कि हम तो बात करने के लिए तैयार हैं।’

इस पर राकेश टिकैत ने कहा-‘वो गलत बोलते हैं, झूठ बोलते हैं। वो ये कह रहे हैं कि हमको बता दिया है कि कानून वापस नहीं लेगे, संधोशन कर रहे हैं और कोई सुझाव है तो आप हमको दे दो। वो बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। मतलब उन्होंने ये फैसला कर ही लिया तो क्या हमारी मोहर या साइन चाहते हैं?’ अमिश देवगन आगे पूछते हैं- ‘आप चाहते क्या हैं, कृषि कानून लागू न हो? कृषि कानून तो लागू नहीं हो रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगा दी है, डेढ़ साल के लिए।’

राकेश टिकैत जवाब में कहते हैं- ‘अच्छा! लेकिन लागू तो होंगे, डेढ़ साल बाद। एक साल से ज्यादा तो हो गया। 5 महीने बाद लागू होंगे।’ इसपर अमिश कहते हैं- ‘सरकार कह रही है कि इसे हम अभी और सस्पेंड कर सकते हैं लेकिन आप बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ आप कहते हैं कि बीजेपी को वोट की चोट पहुंचाना जरूरी है। आप एक दबंग आदमी हो, आपने बोला कि मेरा भी पॉलिटिकल मोटिव है, मेरी भी राजनैतिक हैसियत होनी चाहिए। सिर्फ ये आरएलडी वालों की ही कैसे हैसियत है?’ (सड़कों पर लगे जाम पर बोले राकेश टिकैत- लोगों को पहले ही किया था सावधान ; सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा)

इस पर राकेश टिकैत खफा हो जाते हैं और कहते हैं, ‘नहीं… नहीं… गलत इंटरव्यू मत चलाओ। मैंने ये कब कहा था? इस पर अमिश देवगन मुस्कुराते हुए सफाई देने लगते हैं और कहते हैं कि फिर वोट की चोट का क्या मतलब है? जवाब में टिकैत कहते हैं कि वोट की चोट का मतलब है कि जनता इन्हें वोट नहीं देगी। अब जब हमारी और इनकी लड़ाई बंद नहीं हो रही है, तो हम क्यों कहेंगे कि भाई इन्हें वोट दो।

आपको बता दें कि सोमवार (27 सितंबर) को संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का ऐलान किया था। ‘भारत बंद’ का दिल्ली एनसीआर सहित कई राज्यों में व्यापक प्रभाव देखने को मिला था। कई राज्यों में दुकानें आदि बंद रही थीं।

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