अपनी आंखो के सामने अपने बच्चे को बीमारी में तड़पता देखना सबसे मुश्किल काम होता है। एक्टर और फिल्ममेकर राकेश रोशन ने भी इस दर्द को काफी करीब से देखा है। उनकी बेटी सुनेना रोशन को जब एक दुर्लभ कैंसर और ग्रेड 3 फैटी लिवर हुआ तो उन्होंने उन्हें उस दर्द को करीब से देखा।
उस दर्द को अब एक्टर ने साझा किया है और बताया कि उस समय वह खुद को कैसे हिम्मत देते थे। पहले इस बारे में एक्टर ने कभी बात नहीं की थी।
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ऋत्तिक की बहन का पिता राकेश से सवाल
पहली बार सुनेना रोशन ने अपनी हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में पिता राकेश रोशन के साथ दिल छू लेने वाली बातचीत साझा की। अपनी इंस्टाग्राम सीरीज ‘Dad & I Unfiltered’ में सुनेना ने पहली बार अपने पिता से पूछा कि जब उनकी तबीयत सबसे ज्यादा खराब थी, तब एक पिता के तौर पर वह अंदर से क्या महसूस करते थे।
राकेश रोशन बेटी के लिए चुपचाप रोते थे
इस पर राकेश रोशन ने भावुक होते हुए बताया कि ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ था। उन्होंने कहा कि वह उस दौरान चुपचाप प्रार्थना किया करते थे और कई बार उनकी आंखों में आंसू भी आ जाते थे। हालांकि, बेटी से मिलने के दौरान वह अपने इमोशन छिपाकर हमेशा मुस्कुराते थे और उसे हिम्मत देने की कोशिश करते थे।
ये सुनते ही सुनेना ने कहा कि मुझे लगता है हमें हिम्मत आपसे ही मिलती है। ऐसा मैंने भी किया था जब आपको कैंसर हुआ था। सुनेना राकेश रोशन से कहती हैं कि मैं आपके सामने आती थी, हिम्मत दिखाती थी लेकिन अकेले कमरे में मुझे भी दुख होता था।
मरीज का हौसला बढ़ाना ज्यादा जरूरी
राकेश रोशन ने आगे कहा कि ऐसे मुश्किल वक्त में पॉजीटिव बने रहना मरीज के साथ-साथ परिवार के लिए भी काफी मददगार साबित हो सकता है। उनका मानना है कि सामने डर या दुख जाहिर करने के बजाय मुस्कुराते रहना, खुद को मजबूत रखना और मरीज का हौसला बढ़ाना ज्यादा जरूरी है। उनके मुताबिक, मुश्किल समय में परिवार का आत्मविश्वास मरीज को भी मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
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बीमारी से लड़ने की कहानी को सुनाया
बता दें कि सुनेना अब पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं और अपने उस मुश्किल दौर की जंग को दर्शकों के साथ इस सीरीज के जरिए साझा कर रही हैं। सुनेना ने अपने इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा, सबसे मजबूत लोग वो नहीं होते, जो कभी रोते नहीं, बल्कि वो होते हैं जो अपने आंसू पोंछकर अपनों के सामने मुस्कुराते हैं।
सुनेना ने कहा कि हिम्मत भावनाओं को छिपाने में नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उम्मीद बनाए रखने और अपनों को ताकत देने में है। उन्होंने अपनी मजबूती का श्रेय माता-पिता के विश्वास, सकारात्मक सोच और बिना शर्त प्यार को दिया।
