बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने उन्हें 4 फरवरी तक जेल प्रशासन के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिनेता ने शिकायतकर्ता को रकम लौटाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

इस कारण अदालत ने दिया आदेश

पीटीआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव द्वारा बार-बार अदालत को दिए गए वादों को तोड़ना अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने बताया कि मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से दायर सात अलग-अलग मामलों में निचली अदालत ने प्रत्येक केस में 1.35 करोड़ रुपये की देनदारी तय की थी। इसके साथ ही रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराई गई रकम शिकायतकर्ता को देने के निर्देश भी दिए गए थे।

बड़ी रकम अभी भी बाकी

अदालत के आदेश में यह भी सामने आया कि अक्टूबर 2025 में 75-75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद करीब 9 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। कोर्ट ने कहा कि लगातार समय मांगने और आश्वासन देने के बाद भी आदेशों का पालन नहीं हुआ, इसलिए अब किसी तरह की नरमी उचित नहीं है। ऐसे हालात में अभिनेता को ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के लिए आत्मसमर्पण करना होगा। राजपाल यादव ने मामले के लंबित रहते हुए दुबई यात्रा की अनुमति भी हाईकोर्ट से मांगी थी, जिस पर अलग से सुनवाई की गई।

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क्या है मामला?

यह आदेश राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन याचिकाओं पर आया है, जिनमें 2019 में सेशंस कोर्ट द्वारा सजा बरकरार रखने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इससे पहले, अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी।

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अभिनेता की ओर से यह दलील दी गई थी कि यह भुगतान एक ऐसी फिल्म से जुड़ा था जो बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, जिससे भारी नुकसान हुआ। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2024 में सजा पर अस्थायी रोक लगाई थी, इस शर्त के साथ कि वह मामले को सुलझाने के लिए ईमानदार प्रयास करेंगे, लेकिन अदालत के मुताबिक यह शर्त अब तक पूरी नहीं हो सकी।