राजपाल यादव जो पिछले कई दिनों से चेक बाउंस केस को लेकर चर्चा में हैं, उन्होंने अब इस मामले पर खुलकर बात की है। उन्होंने इंडस्ट्री के सपोर्ट के लिए शुक्रिया कहा और ये भी साफ किया कि वो पैसे न देने की वजह से जेल नहीं गए थे।
इस मामले में उन्होंने फरवरी में तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था, जहां से उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिली। बाद में कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अच्छी-खासी रकम जमा कर दी है, इसलिए अब उन्हें दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा।
इंडस्ट्री का मिला पूरा साथ
अपने एक पॉडकास्ट में राजपाल ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कोई नहीं था जिसने उनका साथ न दिया हो। उन्होंने कहा, “मदद दो तरह की होती है, एक जो सबको दिखती है और एक जो चुपचाप होती है, जैसे सोनू सूद ने मेरा साथ दिया। मैंने 25 साल में 250 फिल्में की हैं, अगर इंडस्ट्री सपोर्ट न करती तो ये मुमकिन नहीं था।”
राजपाल यादव ने क्यों नहीं लौटाए 5 करोड़?
जब उनसे पूछा गया कि काम और पैसे होने के बावजूद उन्होंने 5 करोड़ क्यों नहीं चुकाए, तो उन्होंने कहा, “यही तो मेरे केस का असली मुद्दा है। ये बात 5 करोड़ रुपये चुकाने की नहीं है। अभी ये बताना जल्दबाजी होगी कि मैं जेल क्यों गया या मेरे पास पैसे हैं या नहीं। अगर सिर्फ 5 करोड़ की बात होती, तो 2012 में ही मामला सुलझ जाता। लेकिन इन 5 करोड़ की वजह से मुझे 17 करोड़ का नुकसान हुआ। उस समय मामला कोर्ट में भी नहीं था, जब उस शख्स ने मेरी फिल्म के 17 करोड़ रुपये दांव पर लगा दिए। उसने फिल्म का 70% हिस्सा देखने के बाद ही 5 करोड़ रुपये और निवेश किए थे।”
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फिल्म से जुड़ा पूरा मामला
राजपाल ने बताया कि उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ का बजट करीब 22 करोड़ था। रिलीज पर 5-7 करोड़ और खर्च होने थे। उनका आरोप है कि जिस शख्स ने पैसे लगाए, उसी ने फिल्म की रिलीज रुकवा दी, जिससे पूरा प्रोजेक्ट डूब गया। उन्होंने कहा, “अगर दुश्मन भी होता तो फिल्म रिलीज रुकवाकर 10 लोगों का पैसा दांव पर नहीं लगाता। मेरी नीयत साफ थी, गलती क्या थी मेरी?”
रिलीज से पहले ही बिगड़ गया खेल
राजपाल ने बताया कि फिल्म को 1000 से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज होना था और इसका म्यूजिक लॉन्च अमिताभ बच्चन ने किया था। लेकिन विवाद के चलते फिल्म 200 स्क्रीन तक भी नहीं पहुंच पाई और कुछ ही दिनों में हट गई।
उन्होंने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया था, “ये सब 2005 में शुरू हुआ। मेरा एक दोस्त था मिथिलेश कुमार, जो मुंबई में मुझसे मिलने आता रहता था। उस वक्त मैं फिल्मों में काफी बिजी था। फिर 2008 में भारत में मंदी आई। मेरे 10-12 प्रोजेक्ट्स चल रहे थे, लेकिन सब रुक गए। करीब 6 महीने की स्ट्राइक भी चली, जिससे हर कोई बेरोजगार हो गया और मार्केट में पैसे फंस गए। तब हमने सोचा कि थिएटर आर्टिस्ट्स के साथ मिलकर कुछ बनाया जाए। इसी दौरान हमने ‘अता पता लापता’ फिल्म बनाने का फैसला किया।”
फिलहाल फिल्म से जुड़े केस बाउंस को लेकर चल रहे विवाद पर राजपाल यादव ने साफ कहा कि वो समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं जिंदगी भर इस लड़ाई को लड़ूंगा, क्योंकि बात पैसों से ज्यादा इरादों की है।”
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
राजपाल के मुताबिक, ये कहानी 2005 से शुरू हुई। उनके एक जानने वाले निवेश करना चाहते थे और 2010 में 5 करोड़ लगाने का ऑफर दिया। बदले में फिल्म रिलीज के बाद 8 करोड़ वापस देने की डील हुई।
