कॉमेडी सर्कस से शुरू हुई कॉमेडियन राजीव ठाकुर की जर्नी किसी पहचान की मोहताज नहीं है। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में उन्हें देखा गया, जिसके बाद हाल ही में उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, जिस पर उन्होंने अपने स्टैंड अप्स करने शुरू किए हैं। हाल ही में उन्होंने अपने उन पुराने दिनों को याद करते हुए एक किस्सा साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे अचानक एक बड़े से घर से निकलकर उनकी लाइफ एक छोटे से कमरे में आकर बस गई थी।
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राजीव ठाकुर ने वैभव मुंजाल के साथ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान अपनी लाइफ जर्नी शेयर की। उन्होंने कहा मैं स्टैंड अप की तरह अपनी लाइफ के बारे में बात करूंगा। राजीव ठाकुर कहते हैं कि ‘क्या आपने पुरानी फिल्में देखी हैं। वो मेरे घर में हुआ है, मेरे बाप को शादी हुई और उसे घर से निकाल दिया, अचानक आप एक अच्छे घर से एक छोटे से कमरे में आ गए। वही कमरा आपका बेडरूम, किचन, बाथरूम, ड्रॉइंग रूम है। उस कमरे में तीन भाई बहन हुए। आप सोचो सब चीजें एक ही जगह हैं।’
राजीव ठाकुर आगे कहते है, ‘अब अगर एक इंसान उनमें से नहा रहा है कुछ भी कर रहा है तो बाकी तीन को बाहर बैठना पड़ता था। मुझे अपना घर पब्लिक टॉयलेट लगता था। रोटी एक आती थी क्योंकि पापा का कारखाना 1984 के समय वो खत्म हो गया था। किराए के पैसे भी नहीं थे, एक बल्ब था, मुझे पीली रोशनी से नफरत थी। मुझे सफेद लाइट पसंद थी क्योंकि ट्यूब लाइट देखी ही नहीं थी कभी।’
‘मैं किसी के भी घर जाता था तो सफेद लाइट देखता था और सोचता था कि मेरे घर में कब आएगी। 40 वॉट के बल्ब के नीचे बैठ कर हम पढ़े और वो भी 9 बजे मकान मालिक बंद कर देते थे। अब मैं इसे फनी ले रहा हूं क्योंकि एक वो समय था जब एक रोटी भी हम एक दूसरे के लिए छोड़ देते थे।’ कॉमेडियन ने कहा
अपनी मां के संघर्षों को याद करते हुए राजीव ने बताया कि ‘ऐसे हालात में जब आप रहते हैं तो कि मम्मी पानी की बाल्टियां उठाकर ला रही है तीन मंजिलों तक, कपड़े सिलकर वो बाहर लेकर जा रही हैं।’
राजीव ठाकुर ने यहां अपने बचपन के किस्सों को याद किया कि कैसे वो अपने बचपन में खेलते थे क्योंकि बचपन में वो नासमझ थे बाकी सभी बच्चों जैसे। उन्होंने कहा कि कभी कभी लगता है कि आज जो हासिल कर लिया, ये तो कभी सोचा ही नहीं था।
राजीव ठाकुर ने यहां ये भी कहा कि उनका मानना है कि अभी भी उनके काम का बेस्ट वर्जन आना बाकी हैं। वो लगातार खुद पर काम कर रहे हैं। लोगों के फीडबैक को देखने के बाद खुद में इंप्रूवमेंट करने में विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘उनकी नजर में अच्छा कॉमिक वो है जो दर्शकों को 30 मिनट तक बांधे रखे क्योंकि 10-12 मिनट का कंटेंट सभी के पास हैं।’
इस बातचीत में राजीव ठाकुर ने कई मुद्दों पर बात की। समय रैना से लेकर अपने फिल्मों की रुचि पर भी उन्होंने शानदार तरीके से राय रखी।
