किसी ने उन्हें उस लायक समझा ही नहीं- सांसद रहे राजेश खन्ना करना चाहते थे चुनाव प्रचार, कांग्रेस ने नहीं दिया था भाव; डायरेक्टर ने बताया था किस्सा

जब 2012 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे थे तब राजेश खन्ना इस उम्मीद से वहां गए कि कांग्रेस उन्हें चुनाव प्रचार के लिए पूछेगी। लेकिन पार्टी ने उन्हें नहीं पूछा जिसका उन्हें बेहद बुरा लगा था।

rajesh khanna, rajesh khanna life story, rajeev gandhiराजेश खन्ना को आखिरी वक़्त में राजनीति में भी निराशा हाथ लगी (Photo-Indian Express Archive)

राजेश खन्ना का फिल्मी करियर जब ढलान पर था तब उन्होंने राजनीति में आने की सोची। गांधी परिवार से उनकी नजदीकियों ने इस राह को आसान बनाया और वो कांग्रेस के टिकट पर नई दिल्ली से चुनाव लड़े। राजेश खन्ना 1992 से लेकर 1996 तक लोकसभा सदस्य रहे और पार्टी को उन्होंने अपनी सेवाएं दी लेकिन बाद के वर्षों में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहे राजेश खन्ना को पार्टी ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूछा तक नहीं, जिससे उन्हें बड़ा धक्का लगा था।

उनके बेहद करीबी रहे और उनकी आखिरी फिल्म के निर्देशक अशोक त्यागी ने बताया था कि राजेश खन्ना इसके बाद बहुत टूट गए थे।अशोक त्यागी ने बताया था, ‘इतने अच्छे स्पीकर थे काकाजी फिर भी कांग्रेस पार्टी ने यूपी चुनाव में उन्हें नहीं पूछा। वो उत्तर प्रदेश आकर गए थे, उन्हें उम्मीद थी कि उनको कांग्रेस का प्रचार के लिए कहा जाएगा लेकिन किसी ने उन्हें इस लायक समझा ही नहीं।’

राजेश खन्ना को राजनीति में लाने का काम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने किया था। राजीव गांधी राजेश खन्ना के अच्छे दोस्त थे और कई बार उनसे राजनीति में आने को कहते लेकिन राजेश खन्ना मना कर देते थे। जब 1991 के लोकसभा चुनावों में राजेश खन्ना को राजीव गांधी ने चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वो मना नहीं कर पाए।

 

वो बीजेपी के धुरंधर नेता लालकृष्ण आडवाणी के विरुद्ध नई दिल्ली से चुनाव लड़े और उन्हें कड़ी टक्कर देते हुए महज कुछ ही वोटों से हार गए। लालकृष्ण आडवाणी गुजरात के गांधीनगर से भी जीते थे और अगले ही साल वो दिल्ली छोड़ गांधीनगर चले गए। लालकृष्ण आडवाणी के जाने के बाद नई दिल्ली सीट पर दोबारा चुनाव करवाए गए जहां राजेश खन्ना की लोकप्रियता को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को उतारा।

 

इस बार राजेश खन्ना ने भारी मतों से लोकसभा का चुनाव जीता और 1992-1996 तक वो सांसद रहे। दूसरी बार भी पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा था जिसका जिक्र उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान किया था। लेकिन वो लोकसभा नहीं बल्कि राज्यसभा जाना चाहते थे। पार्टी ने उनकी इस मांग की नामंजूर कर दिया, जिसके बाद वो पार्टी से दूर होते चले गए।

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