राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता था। उनके लाखों फैंस थे। लोग उन्हें खून से खत लिखते थे, उनकी तस्वीरों से शादी कर लेते थे और उनकी एक झलक पाने के लिए उनके बंगले के बाहर घंटों इंतजार करते थे। लेकिन उनकी कथित गर्लफ्रेंड अनीता आडवाणी का कहना है कि इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा इंसान था, जिसने बचपन से ही कई भावनात्मक दर्द झेले थे। अनीता के मुताबिक, बचपन, टूटे रिश्तों और करीबी लोगों के धोखे ने राजेश खन्ना का लोगों पर से भरोसा खत्म कर दिया था।
लोगों से उठ गया था राजेश खन्ना का भरोसा
‘मेरी सहेली’ पॉडकास्ट पर बात करते हुए अनीता ने कहा कि समय के साथ-साथ राजेश खन्ना का लोगों पर भरोसा कम होता गया। उन्होंने कहा, “उन्हें हर किसी पर शक होने लगा था। अगर आप मुझसे मनोवैज्ञानिक नजरिए से पूछें, तो मुझे लगता है कि उनका लोगों से भरोसा उठ गया था। सबसे पहले, उन्हें गोद लिया गया था।
फिर रिश्तों में उन्हें धोखा मिला। इंडस्ट्री के दोस्तों ने भी उन्हें धोखा दिया। जिन लोगों की उन्होंने मदद की और सफल बनाया, वे भी आखिर में उनके खिलाफ हो गए। उन्हें हर किसी पर शक होने लगा।”
अनीता ने आगे बताया कि उनके आस-पास के लोगों ने बार-बार एक्टर का फायदा उठाया। अपनी बात जारी रखते हुए आडवाणी ने कहा, “कई लोगों ने उनका फायदा उठाया। पॉलिटिकल कैंपेन के दौरान, वह जहां भी बुलाए जाते… चले जाते थे, लेकिन बीच के लोग पैसे अपनी जेब में रख लेते थे। काकाजी ने खुद कभी कोई पैसा नहीं लिया।”
अनीता के मुताबिक, लोग अक्सर पूछते थे कि उम्र बढ़ने के साथ राजेश खन्ना इतने बदल क्यों गए, लेकिन बहुत कम लोग उनकी जिंदगी के संघर्षों को समझ पाए। उन्होंने कहा, “लोग पूछते थे कि उनका स्वभाव इतना क्यों बदल गया। लेकिन उनकी जिंदगी की शुरुआत ही मुश्किलों से हुई थी। जब उन्हें पता चला कि उन्हें गोद लिया गया था, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था।”
1942 में जतिन खन्ना के रूप में जन्मे राजेश खन्ना को उनके रिश्तेदार चुन्नीलाल और लीलावती खन्ना ने गोद लिया था। अनीता का मानना है कि इस सच का पता चलने के बाद वह अंदर से टूट गए थे। अनीता ने कहा, “उनका अपने असली परिवार या बहनों से ज्यादा जुड़ाव नहीं था। एक बार उनकी बहन मिलने आईं तो उन्होंने पूछा कि ये कौन हैं, उनके बीच भावनात्मक रिश्ता नहीं था।”
सुपरस्टार से मुश्किल दौर तक
1969 में फिल्म ‘आराधना’ की सफलता के बाद राजेश खन्ना ने लगातार 15 हिट फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार बन गए। निर्माता उनके घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे और फैंस उन्हें भगवान की तरह मानते थे। लेकिन 1970 के दशक के बीच में हिंदी सिनेमा का दौर बदलने लगा। अमिताभ बच्चन के ‘एंग्री यंग मैन’ किरदार को लोगों ने पसंद किया और राजेश खन्ना का स्टारडम धीरे-धीरे कम होने लगा। बाद में खुद राजेश खन्ना ने माना था कि वह इस बदलाव के लिए तैयार नहीं थे।
जब राजेश खन्ना ने खुद सुनाया था किस्सा
1990 में मूवी मैगजीन को दिए इंटरव्यू में राजेश खन्ना ने बताया था कि सफलता ने उन्हें बदल दिया था और असफलता ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। अभिनेता ने कहा था, “मुझे आज भी वह पल याद है, जब पहली बार मुझे एहसास हुआ कि इतनी बड़ी सफलता इंसान को पूरी तरह बदल देती है।” उन्होंने माना कि जब उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगीं, तो उन्होंने शराब का सहारा लिया।
राजेश खन्ना ने बताया था, “जब मेरा बुरा दौर शुरू हुआ, तो मैंने शराब पीना शुरू कर दिया। मैं कोई सुपरह्यूमन नहीं हूं। न मैं जीसस क्राइस्ट हूं और न महात्मा गांधी।” राजेश खन्ना ने वह रात भी याद की, जब उनकी लगातार सात फिल्में फ्लॉप हो गई थीं।
एक्टर ने कहा था, “रात के तीन बजे थे। मैंने शराब पी रखी थी। पहली बार असफलता का स्वाद चखा था। लगातार सात फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। बारिश हो रही थी, चारों तरफ अंधेरा था और मैं छत पर अकेला था। तब मैंने रोते हुए कहा कि परवरदिगार, हम गरीबों का इतना सख्त इम्तिहान न ले कि हम तेरे वजूद को ही नकार दें।”
2000 के दशक में हुई अनीता की एंट्री
अनीता आडवाणी 2000 के दशक की शुरुआत में राजेश खन्ना की जिंदगी में आई थीं। उनका दावा है कि दोनों करीब 10 साल तक साथ रहे। अनीता यह भी कह चुकी हैं कि दोनों ने निजी तौर पर शादी की थी, लेकिन इस दावे का कभी कानूनी तौर पर कोई सबूत नहीं मिला और राजेश खन्ना के परिवार ने भी इसे स्वीकार नहीं किया। राजेश खन्ना ने 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की थी। दोनों कुछ साल बाद अलग हो गए थे, लेकिन उन्होंने कभी तलाक नहीं लिया।
