हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई बड़े सितारे आए, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब सिर्फ एक नाम ही हर तरफ छाया हुआ था। चाहे बड़ा पर्दा हो, बॉक्स ऑफिस हो फैंस, उस वक्त सिर्फ राजेश खन्ना का ही बोलबाला था। 1969 से 1974 के बीच उनकी लोकप्रियता इस कदर चरम पर थी कि उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार कहा गया। ये उनकी उपलब्धि से ज्यादा फैंस के बीच उनकी दीवानगी का प्रमाण था।
कैसे शुरू हुआ था स्टारडम का दौर
राजेश खन्ना ने 1966 में फिल्म ‘आखिरी खत’ से फिल्मों डेब्यू किया था। हालांकि उन्हें पहली ही फिल्म से लोकप्रियता नहीं मिली थी, बल्कि उन्हें असली पहचान 1969 में आई फिल्म ‘अराधना’ से मिली थी। इस फिल्म में उनका डबल रोल था और उनके साथ शर्मिला टैगोर थीं। दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था।
एक के बाद एक हिट ने बनाया पहला सुपरस्टार इसके बाद राजेश खन्ना ने ‘दो रास्ते’, ‘कटी पतंग’, ‘आनंद’, ‘अमर प्रेम’, ‘हाथी मेरे साथी’ जैसी फिल्में की और सभी हिट रहीं। 1969 से 1971 के बीच उनकी लगातार 15 से ज्यादा फिल्में सुपरहिट रहीं। उन्होंने उस वक्त ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज भी याद किया जाता है।
स्टार नहीं फैंस के बीच सनसनी बने राजेश खन्ना
राजेश खन्ना के स्टारडम के किस्से आज भी लोगों की जुबान पर हैं। राजेश खन्ना के लिए फैंस का प्यार किसी पागलपन से कम नहीं था। लड़कियां उनके नाम खून से खत लिखती थीं। उनकी तस्वीरों से शादी कर लेती थीं। उनकी कार को लिपस्टिक के निशानों से भर देती थीं। जब वे अपनी कार से निकलते, तो फैंस उन्हें घेर लेते। उनकी सफेद कार पर लिपस्टिक के निशान लग जाना उस दौर की “हेडलाइन्स” बन जाता था। बॉडीगार्ड्स के लिए भीड़ संभालना मुश्किल हो जाता था।
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एक झलक के लिए घंटों इंतजार करते थे फैंस
उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार होता था। उस दौर में जब सोशल मीडिया का नामों निशान नहीं था, तब भी राजेश खन्ना की लोकप्रियता देश के कोने-कोने तक फैली हुई थी। इसी वजह से उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला था।
हटके था राजेश खन्ना का एक्टिंग स्टाइल
राजेश खन्ना की स्माइल, गर्दन झुकाकर डायलॉग बोलना और आंखों के हावभाव उन्हें सबसे अलग बनाते थे। ‘आनंद’ फिल्म का उनका डायलॉग ‘बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं’ आज भी मशहूर है। स्क्रीन पर उनकीप्रेजेंस इतनी मजबूत थी कि कहानी से ज्यादा लोग उन्हें देखने सिनेमाघर जाया करते थे।
आज शाहरुख खान समेत कई ऐसे एक्टर्स हैं जिन्हें सुपरस्टार कहा जाता है, लेकिन सबसे पहले इस शब्द का इस्तेमाल राजेश खन्ना के लिए किया गया था। मीडिया ने उनकी हिट फिल्मों का रिकॉर्ड, फैन फॉलोइंग देखते हुए राजेश खन्ना को ये नाम दिया था।
करियर में आई गिरावट
मगर उनका करियर एक समय पर प्रभावित होने लगा। 1970 के दशक के बीच में एंग्री यंग मैन की इमेज के साथ अमिताभ बच्चन का दौर शुरू हुआ और सिनेमा का ट्रेंड बदल गया। हालांकि राजेश खन्ना की लोकप्रियता कम नहीं हो पाई। अमिताभ बच्चन के लिए जया बच्चन ने कर लिया था राजेश खन्ना से झगड़ा, मास्टर राजू ने सुनाया किस्सा
स्टारडम पर राजेश खन्ना का बयान
एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना से पूछा गया था स्टार्स के नंबर 1, नंबर 2 कहे जाने पर उनकी क्या राय है तो उनका कहना था कि नंबर्स तो घोड़ों के होते हैं, स्टार्स के नहीं। आईटीएमबी शोज के एक कार्यक्रम में राजेश खन्ना से पूछा गया था, ‘भारत के मैगजीन और लोगों द्वारा जो नंबर 1 स्टार, नंबर 1 हीरो, नंबर 1 हीरोइन की पदवी दी जाती है, उस बारे में आपकी क्या राय है?’
राजेश खन्ना ने इसके जवाब में कहा था, ‘नंबर 1, नंबर 2 जो है इस बारे में मेरा यही मानना है कि घोड़ों के नंबर होते हैं। मुझे नहीं लगता कि स्टार्स के नंबर होने चाहिए। स्टार्स तो स्टार्स होते हैं।’
