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बड़ा भाई गरीब हो जाए तो क्या छोटा भूल जाता है? जब बोल पड़े राजेश खन्ना; दिखाने लगे थे अपना फटा कुर्ता

'काका' मायानगरी छोड़ दिल्ली तो शिफ्ट हो गए लेकिन वहां के अपने दोस्तों और स्टाफ के लोगों को नहीं भूले। उन्हीं में से एक थे प्रशांत कुमार रॉय, जो एक वक्त में काका के दाहिने हाथ हुआ करते थे।

Rajesh Khanna,Rajesh Khanna Emotional Side, राजेश खन्ना, राजेश खन्ना लाइफ, KAKA, Entertainment News,सुपरस्टार राजेश खन्ना (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस आरकाइव)

राजेश खन्ना ने जैसा स्टारडम देखा, शायद ही किसी दूसरे अभिनेता को इतना प्यार और रुतबा मिला हो। जब वह अपने करियर के पीक पर थे तब उनके लाखों दीवाने हुआ करते थे। काका का गुरु कुर्ता, नजरें टेढ़ी कर और गर्दन झुका कर बात करने की अदा, स्टाइल स्टेटमेंट बन गया था। हालांकि जब उनका डाउनफॉल आया तब वह बिल्कुल अकेले पड़ गए।

इस अकेलेपन ने राजेश खन्ना का दिल्ली तक पीछा नहीं छोड़ा। काका चुनावी राजनीति में शामिल होने दिल्ली आ गए थे। यहां कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता उन्हें घेरे रहते थे। मिलने जुलने वालों का तांता लगा रहता। इन सबके बावजूद वह खुद को अकेला पाते थे।

दिल्ली में अकेले हो गए थे राजेश खन्ना: ‘काका’ मायानगरी छोड़ दिल्ली तो शिफ्ट हो गए लेकिन वहां के अपने दोस्तों और स्टाफ के लोगों को नहीं भूले। उन्हीं में से एक थे प्रशांत कुमार रॉय, जो एक वक्त में काका के दाहिने हाथ हुआ करते थे। काका अक्सर दिल्ली से उन्हें फोन करते थे और सुख दुख बांटते थे। राजेश खन्ना की जीवनी में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक यासिर उस्मान लिखते हैं कि राजेश खन्ना जब दिल्ली शिफ्ट हुए तो उनके बंगले आशीर्वाद में काम करने वाले तमाम लोग भी अलग हो गए। खुद प्रशांत भी सलीम खान के साथ उनके ऑफिस में काम करने लगे।

‘मेरे पास कोई नहीं है…’: प्रशांत कहते हैं कि काका अक्सर उनको फोन कर लिया करते थे। ऐसी ही एक रात उन्होंने फोन किया और पूछने लगे- ‘प्रशांत जब बड़ा भाई गरीब हो जाता है तो क्या छोटा भाई उसे भूल जाता है?’ प्रशांत ने जवाब दिया कि आपको कोई नहीं भूला है। इस पर राजेश खन्ना ने जवाब दिया मेरे पास कौन है प्रशांत? अकेलेपन के अलावा मेरे पास कुछ भी नहीं है। जिंदगी बदल गई है। जब आंखों में आंसू और गुस्सा लिए स्टूडियो पहुंचे थे राजेश खन्ना

जब पत्रकार को दिखाने लगे फटा कुर्ता: राजेश खन्ना जब दिल्ली आए तो यहां प्रेस के लोगों से घुलने मिलने की कोशिश की। यासिर उस्मान, वरिष्ठ पत्रकार गार्गी परसाई के हवाले से लिखते हैं कि एक दिन जब वह इंटरव्यू के लिए राजेश खन्ना के घर पहुंचीं तो काका कुर्ता पायजामा पहन कर तैयार थे। गार्गी उनसे कुछ कहतीं, उससे पहले ही काका हाथ उठाकर अपना फटा कुर्ता दिखाने लगे और कहा, देखो मेरा कुर्ता फट रहा है। जब उनसे कहा गया कि आप इसे सिलवा क्यों नहीं लेते हैं? तो काका एकदम चुप हो गए।

‘कोई एक फूल तक नहीं भेजता’: आपको बता दें कि एक वक्त ऐसा था जब राजेश खन्ना के बंगले आशीर्वाद के आगे हजारों की तादाद में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए खड़े रहते थे। उनका ड्राइंग रूम गुलदस्तों और फूलों से भरा रहता था। हालांकि ऐसा वक्त ऐसा भी आया जब उनके घर फूल आने बंद हो गए। खुद एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना ने कहा था कि बाद के दिनों में किसी ने उन्हें एक गुलाब तक नहीं भेजा।

 

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