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‘अमिताभ के लिए जानबूझ कर मजबूत स्क्रिप्ट लिखते हैं’- जब सलीम-जावेद की जोड़ी पर भड़क गए थे राजेश खन्ना

उस दौर में यह भी कहा गया कि सलीम-जावेद की जोड़ी ने जानबूझकर राजेश खन्ना का करियर खत्म करने की प्लानिंग की और अमिताभ के लिए एक से बढ़कर एक मजबूत रोल लिखे। इस आरोप पर सलीम खान कहते हैं कि एक लाइन थी...

अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

70 के दशक की शुरुआत होते-होते मायानगरी में राजेश खन्ना का रुतबा कम होने लगा था। उनकी एक के बाद एक फिल्में पिट रही थीं, तो दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन का कद बड़ा हो रहा था। अमिताभ को लेकर और भी कई ऐसी बातें थी जो डायरेक्टर-प्रोड्यूसर्स को पसंद आती थीं। मसलन अमिताभ टाइम के बिल्कुल पंक्चुअल थे। शूटिंग के कॉल टाइम से 2 मिनट पहले ही सेट पर पहुंच जाते थे। विनम्र थे और सुपरस्टार जैसे नखरे नहीं थे। दूसरी तरफ राजेश खन्ना शूटिंग पर देरी से आने के लिए बदनाम थे। यहां तक कि वे कई बार अचानक शूटिंग रद्द कर देते।

अमिताभ को उस वक्त फिल्मी गलियारों में ‘नया लड़का’ कहकर पुकारा जाता था। हालांकि उनका सितारा तेजी से बुलंदियों की तरफ बढ़ रहा था। ठीक इसी वक्त लेखक सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी भी तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी। राजेश खन्ना की जीवनी ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ में यासिर उस्मान लिखते हैं कि 1975 में आई फिल्म ‘दीवार’ के लिए यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन पर दांव लगाने का फैसला किया।

उन दिनों काका ये कहा करते थे कि यश चोपड़ा ने यह फिल्म पहले उन्हें ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने ठुकरा दी थी। बाद में जब सलीम खान से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘दीवार’ के रोल के लिए राजेश खन्ना से कभी बात ही नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि हमने तो वो रोल अमिताभ बच्चन के लिए ही लिखा था, वही उस रोल में फिट बैठते थे।

यश चोपड़ा से नाराज हो गए राजेश खन्ना: सलीम-जावेद की जोड़ी द्वारा लिखी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई। इसी दौर में यश चोपड़ा ने एक और फिल्म ‘कभी-कभी’ की प्लानिंग शुरू कर दी और इस फिल्म में भी उन्होंने अमिताभ बच्चन को साइन कर लिया। यासिर उस्मान लिखते हैं कि जब यश चोपड़ा ने सुपरस्टार राजेश खन्ना को छोड़कर अमिताभ को अपनी फिल्म का हीरो बना लिया और उन्हें बढ़ाना शुरू किया तो राजेश खन्ना को यह बात पसंद नहीं आई।

उधर, अमिताभ बच्चन पर लगाया गया यश चोपड़ा का हर दांव सफल साबित हो रहा था। दीवार के बाद चुपके चुपके, मिली और जमीर जैसी अमिताभ की फिल्मों को भी खूब पसंद किया गया और जब शोले रिलीज हुई तो इसने सफलता के अलग प्रतिमान तो गढ़े ही. अमिताभ को भी एक तरीके से स्थापित कर दिया। शोले के निर्देशक राजेश खन्ना के करीबी रहे रमेश सिप्पी थे और उनकी फिल्म ‘अंदाज़’ में राजेश खन्ना गेस्ट अपीयरेंस के रूप में नजर आए थे।

यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। हालांकि इस कामयाबी के बावजूद सिप्पी ने राजेश खन्ना के साथ काम नहीं किया। शोले के लेखक भी एक वक्त में राजेश खन्ना के करीबी रहे सलीम-जावेद ही थे। सलीम जावेद ने राजेश खन्ना के साथ अंदाज, हाथी मेरे साथी और बंधन जैसी हिट फिल्में भी दी थीं लेकिन धीरे-धीरे यह जोड़ी उनके साथ काम करने से कतराने लगी।

राजेश खन्ना और जावेद अख़्तर के बीच क्या हुआ था? उस्मान लिखते हैं कि सलीम जावेद की जोड़ी उस समय फॉर्म में थी और उनकी लिखी हर अच्छी स्क्रिप्ट राजेश खन्ना की जगह अमिताभ बच्चन के खाते में गई, जो तेजी से ऊपर चढ़ रहे थे। इस दौर में जावेद अख्तर और राजेश खन्ना के झगड़े की खबरें भी पत्र-पत्रिकाओं में खूब छपीं। जब सलीम खान से इस झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, भोला भाला नाम की एक मराठी फिल्म थी। उसे वह (राजेश खन्ना) हिंदी में करना चाहते थे तो हमें स्क्रीन प्ले के लिए कहा। इसमें उन्होंने डबल रोल करना चाहा, लेकिन हम इस पर सहमत नहीं थे।

उस दौर में यह भी कहा गया कि सलीम-जावेद की जोड़ी ने जानबूझकर राजेश खन्ना का करियर खत्म करने की प्लानिंग की और अमिताभ के लिए एक से बढ़कर एक मजबूत रोल लिखे। इस आरोप पर सलीम खान कहते हैं कि एक लाइन थी,  हमने उसको हाथ लगाए बगैर बड़ी लाइन खींच दी। अमिताभ आए थे तो उनकी भी फिल्में फ्लॉप रही थीं, और वापस जा रहे थे। अगर जंजीर नहीं चलती तो वे वापस लौट जाते।

क्या सलीम-जावेद ने की साजिश? सलीम खान कहते हैं कि, ‘सलीम-जावेद कोई खुदा नहीं थे कि उन्होंने एक आदमी को बना दिया और कहा कि इसको हम राजेश खन्ना के अपोजिट खड़ा कर देंगे। कोई सोच भी नहीं सकता था कि राजेश खन्ना से बड़ा कोई स्टार हो सकता है। इस आरोप पर कि सलीम-जावेद ने राजेश खन्ना का डाउनफॉल रचा, वे कहते हैं कि हमारे हाथ में तो हमारा ही फ्यूचर नहीं था। हमारी कोई फिल्म चलती थी, कोई नहीं चलती थी, लेकिन हमारा औसत अच्छा था।

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