Rajesh-Dimple could not be seen on screen - Jansatta
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राजेश-डिंपल को परदे पर नहीं उतार पाए राज

परदे पर ‘बॉबी’ सोलह साल की लड़की और अठारह साल के लड़के के कोमल प्यार का एहसास थी, तो परदे के पीछे एक शोमैन की विवशता, एक सुपरस्टार की जिद और सिनेमा की दुनिया की चकाचौंध से प्रभावित एक युवती की कहानी।

परदे पर ‘बॉबी’ सोलह साल की लड़की और अठारह साल के लड़के के कोमल प्यार का एहसास थी, तो परदे के पीछे एक शोमैन की विवशता, एक सुपरस्टार की जिद और सिनेमा की दुनिया की चकाचौंध से प्रभावित एक युवती की कहानी। ‘बॉबी’ से राज कपूर ने अपने द्वारा निर्देशित फिल्म में खुद कभी अभिनय नहीं किया। ‘बॉबी’ के पीछे की दास्तान बताती है कि एक गलत निर्णय जीवन के उतार-चढ़ावों को कितना बढ़ा देता है। यह गलत निर्णय डिंपल ने लिया था और अंजू महेंद्रू के प्यार में आकंठ डूबे राजेश खन्ना ने भी। जबकि राज कपूर के सामने चुनौती थी, यह बताने की कि डिंपल को चुन कर उन्होंने कोई गलती नहीं की। राज कपूर ने कारोबारी चुन्नीभाई कापड़िया की 16 साल की बेटी डिंपल को ‘बॉबी’ की हीरोइन बनाया तो चुन्नीभाई ने इस खुशी में एक पार्टी दी। इस पार्टी में सुपरस्टार राजेश खन्ना डिंपल को दिल दे बैठे। राजेश खन्ना चाहते थे कि डिंपल और उनकी जोड़ी एक फिल्म के जरिये परदे पर उतरे। मगर राज कपूर ने स्पष्ट कर दिया कि डिंपल की पहली फिल्म ‘बॉबी’ ही होगी। यहीं से एक सुपरस्टार और शोमैन में अघोषित जंग छिड़ गई।

मई 1973 के आखिरी सप्ताह में डिंपल-राजेश की शादी हुई। खन्ना की बारात ‘बॉबी’ के संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के बंगले से चुन्नीभाई के घर गई। इसी रास्ते में अंजू महेंद्रू का घर था जिन्होंने खन्ना के सुख-दुख में साथ दिया। विदाई पर राज कपूर ने डिंपल के लिए डोली गाई। मगर यह शादी राज कपूर के लिए एक तगड़ा झटका थी। वह समझ गए कि ‘बॉबी’ समय से पूरी नहीं होगी और उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। हुआ भी ऐसा ही। खन्ना डिंपल को लेकर जून में यूरोप के हनीमून टूर पर निकल गए। खन्ना आठ जून, 1973 को लंदन के हिल्टन होटल में डिंपल के जन्मदिन की पार्टी कर रहे थे। तीन जून 1973 को शादी कर हनीमून टूर पर निकले अभिताभ-जया भी इस पार्टी में शामिल थे। जबकि राज कपूर डिंपल की तारीखों का इंतजार करते हुए उनके गैरव्यावसायिक रवैये से हैरान-परेशान थे।

उधर मीडिया में ऋषि कपूर और डिंपल के करीब आने और ऋषि की दी अगूंठी को डिंपल द्वारा समुंदर में फेंकने के किस्से खूब छप रहे थे। खन्ना के लिए ये किस्से आग में घी का काम कर रहे थे। मगर अपनी हर हीरोइन के प्यार में डूबने वाले राज कपूर के लिए ये किस्से ज्यादा अहमियत नहीं रखते थे। एक तरह ये चर्चाएं फिल्म के लिए फायदेमंद थीं। ‘बॉबी’ किसी तरह पूरी हो गई। 28 सितंबर 1973 को रिलीज हुई और बॉक्स आॅफिस पर हंगामा मच गया। इसके बाद सब कुछ भूल कर राज कपूर ने राजेश खन्ना को अपनी अगली फिल्म ‘सत्यं शिवम सुंदरम’ में काम करने का प्रस्ताव दिया।

राज कपूर ‘सत्यं शिवम सुंदरम’ में राजेश खन्ना और डिंपल कापड़िया की जोड़ी को परदे पर उतार कर राजेश खन्ना के उस ख्वाब को सच करना चाहते थे, जो खन्ना ने देखा था। हालांकि राज कपूर का प्रस्ताव डिंपल ने अस्वीकार कर दिया। दूसरी ओर राज कपूर के परिवार ने उन पर दबाव बनाया कि ‘बॉबी’ के दौरान जिस राजेश-डिंपल ने उन्हें नाको चने चबवा दिए थे, उन्हें लेकर क्यों फिल्म बनाई जाए। परिवार के सामने, खास कर अपने बच्चों के सामने, राज कपूर हार गए और ‘सत्यं शिवम सुंदरम’ में शशि कपूर और जीनत अमान को लिया गया।

राजेश खन्ना-डिंपल कापड़िया की जोड़ी को परदे पर उतारने की शोमैन राज कपूर की कोशिश नाकाम हो गई थी। मगर राजेश खन्ना के दिमाग में यह जोड़ी सालों तक सरगोशियां करती रही। ‘जिस दिन मैंने राजेश खन्ना से शादी की उस दिन से मेरे घर की जीवंतता और शांति चली गई’ कहने वाली डिंपल 90 के दशक में अलगाव के बावजूद राजेश खन्ना के साथ काम करने के लिए तैयार हो गई। खन्ना ने निर्माता के रूप में डिंपल को अपनी फिल्म ‘जय शिवशंकर’ में लिया। फिल्म बनी भी। मगर इस जोड़ी को परदे पर उतरना नहीं था, लिहाजा ‘जय शिवशंकर’ आज तक रिलीज नहीं हुई।

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