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वहीदा से राज खोसला को 26 साल बाद माफी मिली

‘सोलवां साल’ हेमंत कुमार के गाए ‘है अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आएगा...’ गाने और आरडी बर्मन के बजाए माउथ आॅर्गन के साथ एक बात के लिए याद की जाती है।

‘सोलवां साल’ हेमंत कुमार के गाए ‘है अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आएगा…’ गाने और आरडी बर्मन के बजाए माउथ आॅर्गन के साथ एक बात के लिए याद की जाती है।

गणेशनंदन तिवारी
‘सोलवां साल’ हेमंत कुमार के गाए ‘है अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आएगा…’ गाने और आरडी बर्मन के बजाए माउथ आॅर्गन के साथ एक बात के लिए याद की जाती है। इसी फिल्म के सेट पर वहीदा रहमान ने अपनी मां को वचन दिया था कि वह कभी निर्देशक राज खोसला के साथ काम नहीं करेंगी। राज खोसला की ‘सीआइडी’ से ही वहीदा हिंदी फिल्मों में आई थीं। ‘सोलवां साल’ रात साढ़े 11 बजे से सुबह पांच बजे के बीच घटी घटनाओं पर बनी फिल्म थी। फिल्म में एक सीन था। हीरो देव आनंद और हीरोइन वहीदा भीगे हुए हैं। वे एक धोबी के यहां जाकर उसे कपड़े सुखाने के लिए देते हैं। एक कमरे में कपड़े का परदा बीच में लगा कर देव-वहीदा अपने गीले कपड़े उतारते हैं। खोसला ने कहा कि वहीदा अपने ब्लाउज के पीछे लगे दो-तीन बटन खोलेंगी और कैमरा देव आनंद की ओर मुड़ जाएगा। मगर वहीदा ने कहा कि वह अपने जिस्म की नुमाइश नहीं करेंगी। खोसला ने लाख समझाया मगर वहीदा नहीं मानीं।

खोसला रहमान के इस रवैये से चिढ़ गए। अपने कैमरे के पास आए और नाराजगी भरे सुर में कहा कि अगर इतना ही खयाल था तो फिल्मों में आई ही क्यों। जब खोसला यह कह रहे थे तब भूल गए कि वहीदा की मां उनके पीछे खड़ी हैं और उन्होंने यह बात सुन ली। यह दूसरा मौका था जब खोसला ने वहीदा के रवैये पर टिप्पणी की थी। पहली बार तब जब गुरु दत्त खोसला के निर्देशन में बनने वाली ‘सीआइडी’ में वहीदा को साइन कर रहे थे। गुरु दत्त के अनुरोध पर वहीदा ने दो तमिल और दो तेलुगू फिल्मों के बाद हिंदी फिल्मों में काम करना तय किया था और उसके अनुबंध में एक शर्त जुड़वाई थी कि वह फिल्म में अपनी पसंद के कपड़े ही पहनेंगी। खोसला का कहना था कि ऐसा है तो फिल्मों में आ ही क्यों रही हो और 18 साल की दुबली पतली वहीदा ने कहा कि वह नहीं आ रही हैं गुरु दत्त उन्हें बुला रहे हैं।

लिहाजा खोसला की टिप्पणी के बाद भड़की वहीदा की मां ने वहीदा से वचन लिया कि वह भविष्य में कभी खोसला के साथ काम नहीं करेंगी। उधर, खोसला को लगा कि झुंझलाहट में उन्होंने जो कहा वह उन्हें नहीं कहना चाहिए था। उन्होंने अगले दिन वहीदा की मां से माफी मांगना तय किया मगर वहीदा की मां का अगले दिन निधन हो गया। बात आई गई हो गई। जब खोसला एक दिन अपनी अगली फिल्म ‘बंबई का बाबू’ में रहमान को साइन करने पहुंचे तो वहीदा ने सारी स्थिति उनके सामने रख कर मना कर दिया। नतीजा खोसला को सुचित्र सेन को साइन करना पड़ा।

‘गाइड’ (65) में खोसला के निर्देशक बनते ही वहीदा ने काम करने से मना कर दिया। देव आनंद ने पत्नी मोना को मनाने भेजा, मगर वहीदा नहीं मानी। देव ने तय किया कि वह हीरोइन बदल देंगे। मगर राज खोसला ने कहा वहीदा भूमिका में फिट है लिहाजा वह खुद अलग हो जाते हैं।
70 के दशक में एक शो में खोसला और वहीदा मिले। खोसला ने कहा कि यह बेरुखी कब तक चलेगी। वहीदा को भी लगा कि खोसला ने इतनी भारी भूल नहीं की थी और वह उनके साथ नाइंसाफी कर रही हैं। लिहाजा उन्होंने कहा कि वे अपनी मां को दिया वचन तोड़कर खोसला के साथ काम करेंगी। तब वहीदा-खोसला ने सनी देओल, धर्मेंद्र की प्रमुख भूमिकावाली फिल्म ‘सनी’ (1984) में साथ काम किया, जो राज खोसला की अंतिम प्रदर्शित फिल्म थी।

राज खोसला
31 मई, 1925, 09 जून, 1991

राज खोसला फिल्मों में गायक बनने आए थे। फिल्मों मेंकुछ गाने गाए भी। फिर देव आनंद ने उन्हें गुरु दत्त का सहायक बनवा दिया। गुरु दत्त की तीन फिल्मों (बाजी, जाल, बाज) के बाद खोसला निर्देशक बन गए। बतौर निर्देशक सीआइडी (56), कालापानी (58), सोलवां साल (58) दो रास्ते (69), मेरा गांव मेरा देश (71), मैं तुलसी तेरे आंगन की (78), दोस्ताना (80) जैसी कई हिट फिल्में बनाई। देव ने चेतन आनंद के फिल्म से हटने के बाद राज खोसला को ‘गाइड’ का निर्देशक बनाया था। मगर वहीदा रहमान ने सात साल पहले अपनी मां को वचन दिया था कि वह जीवन में कभी राज खोसला के साथ काम नहीं करेंगी इसलिए राज खोसला की जगह ‘गाइड’ में विजय आनंद को लेना पड़ा।

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