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जब राबड़ी के परिजनों ने पहली बार लुंगी-बनियान में लालू को देखा, शादी से पहले खेत-मवेशी भी देखे थे

लालू प्रसाद यादव ने अपनी आत्मकथा 'गोपालगंज टू रायसीना' में लिखा है कि उन्हें अब भी याद है, उनके ससुराल वालों ने उन्हें पहली बार लुंगी और बनियान में देखा था। उन्होंने लिखा है कि ससुराल वालों ने शादी से पहले उनके खेत और मवेशी भी देखे थे।

lalu prasad yadav, bihar election 2020, lalu yadav personal lifeबिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव

बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में महागठबंधन की सरकार बनती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन का सारा दारोमदार लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव के कंधों पर था। लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला केस में जेल की सजा काट रहे हैं। लालू को भारतीय राजनीति में उनके बेबाक अंदाज और सरलता के लिए जाना जाता है।

ससुराल वालों ने लुंगी और बनियान में देखा था लालू को पहली बार- राबड़ी के घरवालों ने लालू प्रसाद यादव को पहली बार लुंगी और बनियान में देखा था। लालू प्रसाद यादव ने अपनी आत्मकथा ‘गोपालगंज टू रायसीना’ में लिखा है, ‘मुझे अच्छी तरह याद है जब उन्होंने मुझे पहली बार देखा, तब मैं लुंगी और बनियान में था। ससुराल वालों को प्रभावित करने के लिहाज से वो अच्छा पहनावा तो नहीं था पर मुझे देखने के बाद उन्होंने रिश्ते के लिए हां कर दी।’ जेल जाने से पहले लालू इसी पहनावे में टीवी पर भी नजर आते थे।

लालू की विनम्रता और सरलता से हुए थे प्रभावित- लालू यादव देश के सबसे सरल नेताओं में से एक माने जाते हैं। उनके रहन-सहन और बातचीत का तरीका बेहद जमीनी है। इतना ही नहीं लालू प्रसाद के ससुराल पक्ष के लोग भी उनकी सरलता और विनम्रता से प्रभावित हो गए थे। अपनी आत्मकथा में लालू प्रसाद यादव ने लिखा है, ‘राबड़ी के परिवार वाले मेरी सरलता और विनम्रता से प्रभावित हुए थे।’

 

ससुराल वालों ने लालू के मवेशी और खेत भी देखे थे- लालू प्रसाद यादव ने अपनी आत्मकथा में बताया था, ‘मेरी और राबड़ी की शादी करने से पहले मेरे ससुराल वालों ने हमारा रहन-सहन, खेत, मवेशी आदि भी देखे थे, क्योंकि उनकी बेटी हमारे घर आ रही थी।’

ब्राह्मण पुजारी ने कराई थी लालू और राबड़ी की शादी- लालू प्रसाद यादव की शादी उनके गांव के एक ब्राह्मण पुजारी ने कराई थी। लालू प्रसाद यादव ने ‘गोपालगंज टू रायसीना’ में लिखा है, ‘हमारी शादी परिवार वालों ने तय की थी। मेरे गांव के एक ब्राह्मण पुजारी ने माता-पिता को संभावित दुल्हन और उसके परिवार के बारे में बताया था। मेरे परिवार वालों को रिश्ते के लिए राजी करने के बाद पुजारी ने सूचना राबड़ी के परिवार वालों को दी, कुछ दिन बाद उनके परिवार के कुछ लोग हमारे घर आए और फिर रिश्ता तय हो गया।’

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