ताज़ा खबर
 

पेगासस मामले को पुण्य प्रसून बाजपेयी ने बताया लोकतंत्र पर साइबर अटैक, कांग्रेस नेता बोले- जासूसी का धंधा जारी

स्पाइवेयर पेगासस के इस्तेमाल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी पार्टियों ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी इसको लेकर सरकार से सवाल किए हैं।

पेगासस के जरिए नामी-गिरामी लोगों की जासूसी का आरोप लगा है। (Photo- Indian Express)

इज़राइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ द्वारा तैयार किया गया स्पाइवेयर पेगासस एक बार फिर चर्चा में है। ‘द वायर’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल भारत में भी किया जा रहा है। पेगासस नाम के इस स्पाइवेयर से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, बड़े वकीलों, नेताओं समेत कई खास शख्सियतों के फोन की कथिततौर पर जासूसी की गई है। रिपोर्ट सामने आते ही विपक्षी नेताओं ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी इसके जरिए सरकार को घेरा है। पुण्य प्रसून वाजपेयी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘लोकतंत्र पर साइबर अटैक। जज-मंत्री-पत्रकार-विपक्ष के फोन टैप पर।’ वाजपेयी के ट्वीट पर यूजर्स की भी अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। अरविंद तिवारी नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, ‘आपका तो इस लिस्ट में नाम ही नहीं है तो आप क्यों चिंता कर रहे हो।’

ट्विटर यूजर अरविंद चौरसिया लिखते हैं, ‘ऐसे लोगों का फोन क्यों नहीं टेप करना चाहिए? देश के खिलाफ हो रही गतिविधियों पर सरकार को जरूर निगाह रखनी चाहिए।’ ट्विटर यूजर तपन शर्मा लिखते हैं, ‘सरकार बहुत गलत कर रही है। पहले फोन हैक कर रही है। फिर उसके बाद फोन के मालिक को सस्ते दामों में खरीद लेती है। लेकिन अब लोगों के सामने सच लाना ही होगा।’

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी की भी इस पर प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने लिखा, ‘जब अंग्रेज थे:- तब भी ‘जासूसी’ इनका धंधा था। आज जब नही है:- तब भी ‘जासूसी’ का धंधा जारी है। सुधरोगे कब?’ हालांकि प्रशांत तनेजा नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, ‘बीजेपी ही नहीं कांग्रेस भी लोगों की जासूसी करवाती थी। सरकारें लोगों से डरती है। इतने सीधे मत बनिए।’ जबकि कृषि बिहारी नाम के ट्विटर यूजर लिखते हैं, ‘जब सरकार की जाने की बारी होती है तो ऐसी गलतियां करती है।’


क्या है पेगासस? इस प्रोग्राम को इज़राइल की कंपनी एनएसओ ने आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बनाया था। बांग्लादेश समेत कई अन्य देशों ने इसे आधिकारिक तौर पर खरीदा है। ‘बीबीसी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्पाइवेयर को अगर किसी के मोबाइल में डाल दिया जाए तो उसकी ‘एंक्रिप्टेड’ चैट, मैसेज और कॉल तक की जानकारी जुटाई जा सकती है। ‘एंक्रिप्टेड’ मोबाइल पर होने वाली गुप्त चैट होती है, जिसे सिर्फ भेजने वाला और रिसीव करने वाला ही पढ़ता है।

पेगासस पर विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई देशो में इसके इस्तेमाल पर विवाद हो चुका है। भारत में अभी तक रिपोर्ट्स में ही इसके इस्तेमाल का दावा किया जा रहा है। सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही अभी तक इसका कोई डेटा मिलता है कि भारत सरकार ने इसे एनएसओ से खरीदा था। कंपनी ने सफाई में कहा था कि वह इसे सरकारों को ही देती है जिससे आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ाई में इसका इस्तेमाल किया जा सके।

Next Stories
1 बॉलीवुड एक्टर ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में की BJP की हार की भविष्यवाणी, लोग करने लगे ऐसे कमेंट
2 नहीं टिकेगा ये तूफान
3 दो बच्चे एनकाउंटर और एकाध कोरोना से मर जाते हैं इसलिए पैदा करते हैं ज्यादा बच्चे- शायर मुनव्वर राणा का तर्क
ये पढ़ा क्या?
X