युवा भारत बेरोजगार भारत में कैसे तब्दील हो गया- पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने किया सवाल, लोग देने लगे ऐसे जवाब

पुणय प्रसून बाजपेयी ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर ट्वीट कर सवाल किया कि युवा भारत बेरोजगार भारत में कैसे बदल गया।

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पुण्य प्रसून बाजपेयी ने बेरोजगारी पर किया ट्वीट (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को विपक्षी दलों ने बीते दिन राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया। कई जगह लोगों ने पकौड़े बनाकर और रैली निकालकर पीएम मोदी का विरोध भी किया। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर बीते दिन राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस भी खूब ट्रेंड हो रहा था। इस मामले को लेकर मशहूर पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने सवाल किया कि युवा भारत बेरोजगार भारत में कैसे तब्दील हो गया।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने ट्वीट में लिखा, “बेरोजगारी बढ़ती गई, रोजगार छिनते गए। युवा भारत बेरोजगार भारत में कैसे तब्दील हो गया।” अपने इस ट्वीट को लेकर पुण्य प्रसून बाजपेयी सुर्खियों में आ गए हैं, साथ ही सोशल मीडिया यूजर भी इसपर जमकर कमेंट कर रहे हैं।

संदीप नाम के यूजर ने पुण्य प्रसून बाजपेयी के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “तलवे चाटने वाले तलवे चाटेंगे। कोई हिंदू, कोई मुसलमान बोलेंगे। रोजगार कहीं दूर छूट जाएगा। महंगाई, अब महंगाई नजर नहीं आएगी। सस्ता पेट्रोल, डीजल, गैस अब बस यादों में ही नजर आएगा। कुछ लोग इसे विकास बताएंगे। सोचा ना था, मेरा देश इतना बदल जाएगा।”

सुधर्मा नाम के यूजर ने पुण्य प्रसून बाजपेयी के ट्वीट का जवाब देते हुए तंज कसा और लिखा, “मेहनत होने लगी, मुफ्तखोरी घटने लगी। अब बिना मेहनत के कुछ न पाओगे।” एक यूजर ने पत्रकार के ट्वीट के जवाब में लिखा, “आपने शिक्षा को जो व्यापार बनाया है, वही बेरोजगारी का कारण है। आज बस डॉक्टर इंजीनियर का नाम ही रोजगार क्यों। पहले लोग क्यों बेरोजगार नहीं थे।”

बता दें कि ट्वीट के साथ पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपना यू-ट्यूब वीडियो भी साझा किया था, जिसमें उन्होंने कहा, “सरकार नए पद सृजन कर पाने की स्थिति में नहीं है। जो रिक्त पद हैं, उन्हें भरने के बाद जो वेतन देना पड़ेगा, रिटायरों को पेंशन देने की स्थिति भी सरकार के पास नहीं है। जश्न में डूबे भारत के भीतर का अनूठा सच यही है। उसमें बेरोजगारी उस सिस्टम का हिस्सा बन गई है, जिस सिस्टम के तहत देश में बेरोजगारी दूर करनी थी और रोजगार पैदा करने थे।”

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