देश में हर किसान के पस ‘हल’, बस सरकार के पास ही नहीं- पुण्य प्रसून बाजपेयी का मोदी सरकार पर तंज, लोग करने लगे ऐसे कमेंट

बाजपेयी ने एक पोस्ट में किसान आंदोलन को लेकर पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर तंज कसा है।

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PM Narendra Modi (Photo Credits: PTI)

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं और तमाम समसामयिक मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखते है। ताजा पोस्ट में बाजपेयी ने किसान आंदोलन को लेकर पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर तंज कसा।

बाजपेयी ने अपने ट्वीट में कहा- ‘क्या हालात हैं, देश में हर किसान के पास “हल” है। पर सरकार के पास कोई ‘हल’ नहीं।’ पत्रकार ने इससे पहले भी किसानों को लेकर एक पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘किसान जाति में ना बंटें, किसान खाप में ना बंटे। किसान, किसानी को ही जाति-धर्म मान लें, तो हर सत्ता को पलट देगा किसान आंदोलन।’

बाजपेयी के इन पोस्ट पर ढेरों लोगों ने भी रिएक्ट करना शुरू कर दिया। सुनंदा शर्मा नाम की एक महिला यूजर ने लिखा- ‘प्रसून जी सरकार के पास “हल” नहीं है लेकिन “बल” है। सरकार “बल” का प्रयोग करके हल को हटाना चाहती है, लेकिन बिना हल के समस्या नहीं सुलझेगी, इसलिए इस समस्या का हल भी किसान ही करेंगे।’

नवीन राणा नाम के यूजर बोले- ‘ये सिर्फ किसान नहीं हैं। यह आगाज है एक आवाम का जो तानाशाही रवैया से परेशान है। पैदा करने वाले से ज्यादा हक पालने वाले का होता है। किसान तो फसल को पैदा भी करता है और पालता भी है। फिर सरकार उसका फैसला करने वाली कौन होती है।’

एक यूजर ने कहा- सरकार के पास हल इसलिए नहीं है क्योंकि अब सरकार भी निजी हो गई है। सरकार अब कुछ पूंजीपति लोग चला रहे हैं। किसानों की समस्या का समाधान पूंजीपति कैसे करेंगे? अगर ऐसा किया तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी। सभापति मिश्र नाम के शख्स ने कहा- ‘है न, लखनऊ वाले बाबाजी के पास “हल’ है।’

सुभाष गुप्ता ने कहा- ‘देश की समस्याओं का हल सरकार के पास ही होता है। लेकिन ये समस्या राजनैतिक है, जो 2022 तक बने रहने की संभावना है और उसके बाद स्वत: समाप्त हो जायेगी। प्रस्ताव लागू होने पर देश गुलाम बन रहा था और विदेशी कंपनियों का कब्जा होने वाला था, किसान बिल का विरोध ऐसा ही है।’

निशांत नाम के यूजर ने कहा- ‘देश के किसान केवल उत्तर प्रदेश और पंजाब में ही रहते हैं? क्या बिहार में नहीं रहते हैं? बिहार के किसानों को कोई दिक्कत ही नहीं है।’

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