‘कुर्सी है कोई जनाजा नहीं, उतर जाओ..’ पुण्य प्रसून बाजपेयी ने सरकार पर साधा निशाना, लोग करने लगे ऐसे कमेंट

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शायराना अंदाज में एक ट्वीट किया और लिखा कि- कुर्सी है कोई जनाजा नहीं, उतर जाओ।

Bebak bol, Covid-19दिल्ली में एक अस्पताल के बाहर कोरोना से किसी अपने को खोने के बाद बिलखते परिजन। (फोटो सोर्स- दानिश सिद्दीकी/ रॉयटर्स)

Punya Prasun Bajpai: कोरोना के बढ़ते कहर के बीच वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शायराना अंदाज में एक ट्वीट किया और लिखा कि- कुर्सी है कोई जनाजा नहीं, उतर जाओ। इससे पहले उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए राष्ट्रीय हेल्थ कैबिनेट बनाने का सुझाव भी दिया था। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम लिये बगैर लिखा, ‘कुर्सी है तुम्हारा ये ज़नाजा तो नहीं है, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।’

इससे पहले एक और ट्वीट में उन्होंने कोविड 19 से निपटने के लिए राष्ट्रीय हेल्थ कैबिनेट बनाने का सुझाव दिया था। बाजपेयी ने ट्वीट किया था- ‘संकट का दौर है। तत्काल राष्ट्रीय हेल्थ कैबिनेट बने। केजरीवाल नोडल मिनिस्टर, हर्षवर्धन को ऑक्सीजन, उद्धव को मेडिसिन, ममता को वैक्सीन और विजयन को अस्पताल मिले…।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी की इस पोस्ट पर यूजर्स भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं । ओम प्रकाश गुप्ता नाम के एक यूजर ने लिखा-जब देश के लिए कुर्बानी देने वाले आजादी के लिए लड़ रहे थे, उस वक्त गुलामों के वंशज अंग्रेजों के साथ थे। वही स्थिति आज है, मैं किसी राजनीतिक दल के भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करता। अगर भक्तों के अंदर हिम्मत है, तो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। वह देश की कोई भी पार्टी हो, स्वाभिमानी बने, चाटुकार नहींं।’

एक यूजर ने लिखा, ‘बुरा मत मानियेगा प्रसूनजी, पर थोड़ा बहुत रोल आपका भी रहा है। आप भी AAP को प्रमोट कर रहे थे। उम्मीद है देर आये दुरुस्त आये।’ रोहित शाक्य ने कहा- ‘दिल्ली के मालिक केजरीवाल जी के बारे में एकदम सही राय है आपकी। यही राय महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और छत्तीसगढ़ के सीएम पर भी लागू होती है। प्रदेश जब संभाल नहीं पा रहे हैं तो कुर्सी छोड़ क्यों नही देते ये तीनों?’

विजय मेहरा नाम के यूजर ने लिखा- ‘विश्व गुरु के सपने दिखाने वालों की असलियत ये है कि अपने देश की जनता को ऑक्सीजन तक देने में नाकाम हैं। ऐसे झूठ के पुलिंदे बांधने वाले और लोगों को बेवकूफ़ बनाने वालों को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। कहीं ऐसा ना हो कि जनता इस कदर आपा खो दे कि साहब को जबरन झोला उठाने को मजबूर कर दे।’ उदय शंकर नाम के शख्स ने इसका जवाब देते हुए कहा- जनता ने जनादेश उन्हें दिया है, वो उतरे क्यों? दूसरा, किसमें इतना हुनर है जो उनकी जगह ले सके?

योगेंद्र सिंह यादव ने लिखा- ‘मोदी जी से एक सवाल- जो पीएम केयर्स फंड में पैसा जमा कराया था Corona महामारी के नाम पर, वह पैसा कहां गया? क्या वह पैसा आपने बिहार और बंगाल के चुनाव जीतने में खर्च कर दिया? देश को तड़पता मरने पर छोड़ दिया? जवाब दें मोदी जी? एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा- कवि ये बात छत्तीसगढ़, पंजाब औऱ महाराष्ट्र के विषय में बोल रहे हैं।

 

विरेंद्र अग्रवाल ने लिखा – यह कैसा लोकतंत्र है ? यह कैसी लोकसत्ता है? यह कैसा राज प्रबन्धन है? यह कैसी अर्थव्यवस्था है? यह कैसा संविधान और राज धर्म का पालन है? यह कैसी देश की सुरक्षा है, यह कैसा जनहित है? अब हर किसी को सोचना- समझन जरूरी है। समझना होगा, मोदी भाजपा “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय भी नहीं।’

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