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प्रधानमंत्री की सुरक्षा का खर्च बता बोले पुण्य प्रसून बाजपेयी- गरीब होते देश में रईसी का आलम; लोग करने लगे ऐसे कमेंट

अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो शेयर करते हुए पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कहा- 'जिस दौर में भारत गरीब हुआ, उस दौर में भारत के प्रधानमंत्री रईस हो गए।

पीएम नरेंद्र मोदी (फोटोसोर्स- नरेंद्र मोदी ऑफीशियल इंस्टाग्राम )

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी सोशल मीडिया पर आए दिन अपनी बेबाक राय रखते हैं। केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए अब पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक और ट्वीट किया। अपने पोस्ट में प्रसून बाजपेयी प्रधानमंत्री की सुरक्षा के खर्च पर बात करते दिखे। इतना ही नहीं, ताना कसते हुए उन्होंने लिखा-गरीब देश में रईसी का आलाम।

प्रसून बाजपेयी ने अपने पोस्ट में कहा- ‘जितनी आपकी कमाई 30 दिन में, पीएम सुरक्षा पर उतना खर्चा एक मिनट में, गरीब होते देश में पीएम की रईसी का आलम।’ अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो शेयर करते हुए पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कहा- ‘जिस दौर में भारत गरीब हुआ, उस दौर में भारत के प्रधानमंत्री रईस हो गए। जिस देश में नागरिकों की आय कम होती चली गई, उसी दौर में प्रधानमंत्री पर होने वाला खर्च बढ़ता चला गया।’

सवाल पूछते हुए बाजपेयी बोले- ‘जिस देश में दो जून की रोटी लोगों को कमानी मुश्किल हो गई, तब सरकार ने ऐलान किया कि 5 किलो अनाज इस देश के 80 करोड़ लोगों को बांटा जाएगा। लेकिन उससे ज्यादा खर्च अगर इस देश के प्रधानमंत्री पर और देश की कैबिनेट की फौज पर होने लगे, तो आप क्या कहेगे?’

पुण्यप्रसून बाजपेयी ने गुस्साते हुए कहा- विश्व की फेहरिस्त में भारत मौजूदा वक्त में विकासशील देशो की लकीर से नीचे उतर कर गरीब देशों की स्थिति में आकर खड़ा हो चला है।

उन्होंने आगे कहा- भारत के प्रधानमंत्री पर होने वाला खर्च शायद अव्वल दर्जे का है। एक लिहाज से ये सबसे ऊपर है। दुनिया के किसी भी देश में नागरिक और चुने गए प्रतिनिधि के बीच इतनी असमानता नहीं है। पैसा टैक्सपेयर का है, पैसा जनता का है, जो कि बैंकों में जमा होता है। करोड़ों की तादाद में इन्हें कॉर्पोरेट्स को बांट दिया जाता है। ऐसे ही एक बार बाजपेयी ने पीएम मोदी पर निशाना साथा था और कहा था कि धर्म की राजनीति ने भारतीय सभ्यता की नींव हिला दी? 

बाजपेयी के पोस्ट पर ढेरों लोगों के कमेंट आने शुरू हो गए। एसकुमार नाम के यूजर ने कहा- और इस बात को कतई न भूलें कि सेंट्रल विस्ता पर भी फालतू का खर्च हो रहा है। वैक्सीन और ऑक्सीजन सेलेंडर्स तो अरेज नहीं किए गए।

बाजपेयी को जवाब देते हुए हेमलता नाम की महिला यूजर ने कहा- इससे पहले भी कितने PM बने तब आपको PM की सुरक्षा पर हुए खर्चे की चिंता नहीं हुई? आज इतनी चिंता क्यों? शायद इसलिए कि अब PM के साथ मुफ्त हवाई सफर का सुख नहीं मिलता। उनका कहना है कि जिसको घूमना है अपनी जेब ढीली करो।

एक यूजर ने लिखा- आपके विश्लेषण को कोई गंभीरता से नहीं लेता है। विश्लेषण से पहले मानसिकता तय हो चुकी है, दूसरे शब्दों में बिक चुकी है। राष्ट्रीय अस्मिता के मुद्दे को भी व्यक्तिगत देखना द्वेषित मानसिकता का परिचायक है।

एक यूजर ने पूछा- जिहादियों के निशाने पे भी रहते है पीएम, वैसे सोनिया और राहुल गांधी तो किसी संविधानिक पद पर नहीं हैं। उनको किसी प्रकार का खतरा? फिर भी उनकी सुरक्षा पर खर्च क्यों? अविनाश कुमार नाम के यूजर बोले- पीएम की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय हैं। राष्ट्रीय स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा भी राष्ट्र की ही संपत्ति होती है। इनकी तुलना खर्चों से कर संकीर्ण सोच का परिचय न दो बाबू।

 

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