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‘जो करना है खुलेआम, इतनी पारदर्शी सरकार…’ पुण्य प्रसून बाजपेयी ने मोदी सरकार पर कसा तंज, तो लोगों ने कर दिया ट्रोल

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी मोदी सरकार पर तंज कसा है। बाजपेयी ने एक ट्वीट कर मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा- 'जो करना है वो खुल्लम-खुल्ला करना है, इतनी पारदर्शी सरकार पहले कभी ना रही...।'

पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- पीटीआई)

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान खूब हंगामा हुआ। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारी किसानों का एक ग्रुप लाल किले तक पहुंच गया और वहां अपना ध्वज लगा दिया। किसानों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा को लेकर सियासत का दौर जारी है। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी मोदी सरकार पर तंज कसा है। बाजपेयी ने एक ट्वीट कर मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा- ‘जो करना है वो खुल्लम-खुल्ला करना है, इतनी पारदर्शी सरकार पहले कभी ना रही…।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी के इस ट्वीट पर तमाम यूजर्स भी कमेंट करने लगे। कई लोग उनके साथ तो कुछ उनका विरोध करते दिखाई दिये। कई यूजर्स पुण्य प्रसून बाजपेयी का एक वीडियो शेयर करने लगे, जिसमें वह दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ ऑफ कैमरा बात करते दिख रहे है। इस वीडियो को शेयर कर एक यूजर ने लिखा, ‘इतना पारदर्शी पत्रकार कभी नहीं देखा।’  एक ने कहा- पारदर्शी इतना कि जाने माने पत्रकार को आज यूटूबर बना दिया।’

तुषार नाम के शख्स ने लिखा, ‘तुम्हारी असलियत भी तो खुल्लम-खुल्ला सामने आई। उसी तरह गलत काम करने वाले सभी लोगों को खुल्लम-खुल्ला ही नंगा किया जाएगा।’ राजेंद्र सिंह राजपूत ने कमेंट किया- ‘ये सरकार BJP की है, इसलिए जो चाहे कर रहे हो। अगर कांग्रेस की सरकार होती तो 1984 वाला नरसंहार फिर से दोहरा देती। जो ट्रेक्टर रैली निकाल रहे हो उसी ट्रैक्टर के टायर पहना कर आग लगवा देती।

विजय नलिन नाम के शख्स ने इसके जवाब में लिखा- 1984 का नरसंहार याद आता है, तो 2002 का गुजरात का नरसंहार क्यों भूल जाते हो? 1984 में तो इंदिरा जी की उन्हीं के सिख सुरक्षा जवान के हाथों की गई निर्मम हत्या के फलस्वरूप उनके चाहनेवालों का गुस्सा फूट पडा था, जबकि 2002 मोदी की प्लानिंग थी! यह फर्क है।’

एक यूजर ने बाजपेयी के पोस्ट पर कमेंट किया, ‘कल दिल्ली में जो भी हुआ इसके लिए सिर्फ और सिर्फ तीन लोग असल में जिम्मेदार हैं- पहला भाजपा, दूसरा मोदी सरकार, तीसरा भाजपाई दीप सिद्धू। सब कुछ प्रायोजित लग रहा है, सत्ताधारियों ने पर्दे के पीछे से करवाया है ऐसा स्पष्ट दिख रहा है। सरकारी साज़िश हुई है।’ एक यूजर ने लिखा- शायद अंग्रेज भी हमारे पूर्वजों पर इतने ही जुल्मी रहे होंगे जितनी आज की मोदी सरकार किसानों पर जुल्मी है।’

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