पुण्य प्रसून बाजपेयी बोले- किसान कहीं सरकार को बे-पटरी न कर दें तो सांसद ने लिखा- अपनी गाड़ी की भी कुछ चिंता करलो; मिला ऐसा ज़वाब

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था- देशभर में रेल रोको..पटरी पर बैठा किसान…कहीं सरकार को बे-पटरी ना कर दे।

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सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान फोटो सोर्स – (गजेंद्र यादव, इंडियन एक्सप्रेस)

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच उन्होंने ‘रेल रोको’ अभियान चलाकर भी अपना गुस्सा जाहिर किय़ा। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने किसानों के प्रदर्शन के बहाने केंद्र सरकार को घेरते हुए निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘किसान कहीं सरकार को बे-पटरी न कर दें? बाजपेयी के इस ट्वीट पर बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य हरनाथ यादव ने उन्हें अपनी गाड़ी संभालने की नसीहत देने लगे। दोनों के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग देखने को मिली।

दरअसल, पुण्य प्रसून बाजपेय़ी ने लिखा, ‘देशभर में रेल रोको..पटरी पर बैठा किसान, कहीं सरकार को बे-पटरी ना कर दे।’ उनके इसी ट्वीट पर जवाब देते हुए बीजेपी नेता हरनाथ सिंह यादव ने लिखा, प्रिय बाजपेयी जी, अपनी बेपटरी गाड़ी की भी कुछ चिंता करो। नकारात्मक चिंतन, मानसिक रचना एक गंभीर रोग है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।’

बीजेपी नेता के इस तंज पर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने उन्हें उसी अंदाज में जवाब देते हुए लिखा, आदरणीय हरनाथ जी, हमें देश के बेपटरी होने की चिंता है। आप एक बार सांसद के पद को छोड़ आम नागरिक बन कर हालात को देखें-समझें-भोगें। आपको जानकारी हो जाएगी उस सकारात्मक मन की जो खुद को देश मान लेते हैं।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी और नेता हरनाथ सिंह यादव के इन ट्वीट्स को देख कर लोगों ने भी कमेंट करने शुरू कर दिए। एक यूजर ने कहा- नंगी तलवार वाले हिंसावादी किसान। किसान कभी ऐसे नहीं हो सकते, ये खालिस्तानी दिख रहे हैं। किसान तो खेत में हल जोत रहे हैं, फसल उगा रहे हैं।

बी प्रताप सिंह नाम के यूजर ने प्रसून बाजपेयी को जवाब देते हुए लिखा- पुण्य प्रसून जी, रेल से आम जनता चलती है। लेकिन लीडर आसमान में उड़ते हैं। रेल रोको अब डिस्ट्रक्टिव हो गया है। इससे कोई मुनाफा नहीं है। शायद प्लेन रोकने से बात बनेगी। एक यूजर ने लिखा, चंद पंजाबी-हरियाणवी जमींदार उन करोड़ों किसानों पर भारी नहीं पड़ेंगे, जिनको वाकई मदद मिल रही है। तुम जिस स्कूल में पढ़े हो, वो उसका हेडमास्टर रह चुका है।’

प्रमोद नाम के शख्स ने लिखा- छोटा सा सवाल, कितनी ट्रेनें रोक पाए और भागते ट्रेन को रोकने वाले किसानों की तादाद कितनी थी ? कईं लोगों ने तो खड़ी ट्रेन के साथ फोटो सेशन किया और निकल लिए। एक यूजर ने कहा- वाह, वाह क्रांतिकारी, अति क्रांतिकारी लगता है। आज कमीशन का मोटा माल हाथ लगा है। आप जैसे इंटरव्यू फिक्सर पत्रकार को तो केवल पैसा चाहिए। फिर चाहे किसी की चापलूसी करवा लो। पप्पू की, पिंकी की या खालिस्तानी किसानों की…।

ललित मोहन नाम के शख्स ने कहा- जिहादियों को बेघर कर रखा है, हमारे यहां वोट और बेपटरी का मतलब ही नहीं है। पर गद्दारों का काम ही कुछ ऐसा है, पटरी पर तो आप हैं न्यूज रूम से यू ट्यूब और वहां से सीधे पटरी। रजनीश लिखते हैं- सब फेल हो गया दोस्त, जनता टीवी देखती है, सोशल मीडिया पर एक्टिव है जनता, तुम और तुम जैसे चंद लोग जनता को गुमराह नही कर सकते। फर्जी आंदोलन को छोड़ो मित्र, आओ बंगाल चलें, कुछ वहां की चर्चा करें।

बता दें, पंजाब एवं हरियाणा में जगह-जगह किसानों द्वारा रेलगाड़ियां रोकी गईं। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे ने गुरुवार को रेल रोको का आह्वान किया था। किसान यूनियन चाहती हैं कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले।

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