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सिनेमाघरों में सितारों की फिल्में उतारने पर मोलभाव शुरू

सिनेमाघर पूरी क्षमता के साथ चाहे खुल गए हों, मगर धंधा मंदा है। सो धंधा पटरी पर आने से पहले फिल्मजगत में मोलभाव चल रहा है, निर्माताओं और सिनेमाघरों के मालिकों के बीच।

Bollywoodप्रतीकात्‍मक फोटो।

रिलीज के लिए तैयार फिल्मों के निर्मातागणों का कहना है कि सिनेमासंकुल (मल्टीप्लेक्स) उनकी शर्तें नहीं मानते हैं, तो वे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में अपनी फिल्म रिलीज करेंगे। बातचीत के दौर चल रहे हैं।

मामला कुछ-कुछ सब्जी बाजार जैसा है, जिसमेंं शाम चार बजे सब्जीफरोश अकड़ कर सब्जी बेचता है और दाम कम करने के लिए तैयार नहीं होता। वही दूकानदार रात साढ़े दस बजे बिन मांगे, बिन तौले औने-पौने दामों में सब्जियां ग्राहक के झोले में डाल देता है। निर्माता और सिनेमाघर मालिकों के बीच अभी चार बजे जैसी स्थिति है। दोनों एक दूसरे की आंखों में आंख डाले हैं। साढ़े दस बजना बाकी है।

मल्टीप्लेक्स मालिकों ने सलमान से ‘राधे’ को सिनेमाघरों में रिलीज करने की गुहार लगाई थी। दोनों के बीच अब खिलाड़ी अक्षय कुमार आते नजर आ रहे हैं। खान 13-14 मई को ईद पर आएंगे, अक्षय की ‘सूर्यवंशी’ अप्रैल में लाने की तैयारी है। सिनेमाघरों में भीड़ पहले हम लाएंगे। भाईजान से ईद पर निपटना। ‘सूर्यवंशी’ के निर्माताओं और मल्टीप्लेक्स मालिकों के बीच खो-खो जैसा कुछ चल रहा है। आम आदमी इसे मोलभाव करना कहता है, खास आदमी ‘आर्ट आॅफ नेगोशिएशन’ यानी मोलभाव की कला।

‘सूर्यवंशी’ के निर्माता फिल्मजगत में आयाराम गयाराम तो हैं नहीं। चार-चार निर्माता हैं ‘सूर्यवंशी’ के। वे भी ऐसे कि जहां लात पटक दें, पानी निकल आए। रिलायंस, करण जौहर, अपूर्व मेहता और फिल्म के निर्देशक रोहित शेट्टी। वे सिनेमाघर मालिकों को ‘खेल’ के नए नियम समझा रहे हैं। देखो भैया! हमने एक साल तक अपनी फिल्म रोक कर रखी। कितना नुकसान झेला।

सो जैसा धंधे में आधा-आधा नहीं होगा। अब सौ में 70 हम लेंगे, 30 तुम रखो। हर स्क्रीन के लिए वर्चुअल प्रिंट फीस के 20 हजार हम नहीं देंगे और टीवी-ओटीटी पर फिल्म कब रिलीज करना है, हम तय करेंगे। मंजूर हो तो बोलो, वरना हम सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में अपनी फिल्म लगाएंगे, तुमको नहीं देंगे।

सिनेमाघर मालिक क्या करें? वैसे ही धंधे की वाट लगी पड़ी है। कोरोना के दस महीनों में सिनेमाघरों में धूल जम गई और सड़कों पर नागिन की धुन बजाकर पॉपकार्न बेचने वालों ने उनसे ज्यादा धंधा कर लिया। मल्टीप्लेक्स वाले ना-नुकुर कर रहे हैं। मानो कह रहे हों, हुजूर! नमक से नमक लगाकर नहीं खाया जाता। तुमने फिल्म मर्तबान में मुरब्बा डालने के लिए तो बनाई नहीं। हम मना करेंगे तो 13 रुपए बॉलकनी की टिकट वाले, टूटी छतों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज कर दोगे।

हम तो मर ही रहे हैं, चाहो तो तुम भी संखिया खा लो। सस्ती टिकटों वाले सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों या ओटीटी पर फिल्में रिलीज करके कैसे और कब सौ करोड़ कमाओगे? सिनेमाघरों से ही तो बड़ी फिल्में, बड़े स्टारों का अभिजात वर्ग खड़ा है। 70 एमएम छोड़ सब ओटीटी से 50 इंची टीवी पर एक ही भाव में आओगे तो क्या होगा।

वरुण धवन और सलमान खान को एक ही पत्तल में खिलाओगे, तो जातपांत खतम हो जाएगी और पूरा स्टार सिस्टम हिल जाएगा। फिर स्टारों से तेल- साबुन बिकवाने वाले क्या करेंगे। क्यों 10-20 परसेंट मुनाफे के चक्कर में पूरे सिस्टम को सेंधमारी कर बरबाद कर रहे हो।

ठीक से मोलभाव करो। तुम भी कमाओ, हम भी खाली हाथ मुंह में न डालें। दोनों की भूख भागे, ऐसा कुछ करो। सुनते हैं मल्टीप्लेक्स मालिकों की ज्ञान की बातें सुनकर निर्माताओं ने बंद कमरे में बैठकर फिर से सिनेमाघर मालिकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। अप्रैल दूर है और अभी सब्जी बाजार में साढ़े दस बजना भी बाकी है।

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