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हमारी याद आएगीः …और फिल्मों में बिकिनी बेमानी हो गई

निर्माता- निर्देशक शक्ति सामंत ने ‘कटी पतंग’, ‘कश्मीर की कली’, ‘आराधना’ जैसी कई हिट फिल्में बनाईं। सामंत ने राजेश खन्ना को सुपर स्टार बनाया तो हिंदी फिल्मों को शर्मिला टैगोर और मौसमी चटर्जी जैसी हीरोइनें दीं। कल, गुरुवार को, उनकी नौवीं पुण्यतिथि थी।

Author Published on: April 10, 2020 1:56 AM
निर्माता- निर्देशक शक्ति सामंत ने ‘कटी पतंग’, ‘कश्मीर की कली’, ‘आराधना’ जैसी कई हिट फिल्में बनाईं।

गणेशनंदन तिवारी

यमुना में जलक्रीड़ा करतीं गोपियों के चीर चुराते कृष्ण का पौराणिक-धार्मिक आख्यान भारतीयों के जीवन का एक हिस्सा रहा है। उसे श्रद्धा-भाव से पढ़ा सुना जाता रहा है। मगर इसी से मिलता-जुलता सीन जब 1938 की मराठी-हिंदी में बनी फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ में परदे पर आया, तो परंपरागत मराठी समाज में भूकंप आ गया। फिल्म में हीरोइन थीं शादीशुदा मीनाक्षी शिरोडकर (शिल्पा और नम्रता शिरोडकर की दादी) और हीरो थे अभिनेत्री नंदा के पिता मास्टर विनायक। फिल्म में नायिका वन पीस बिकिनी (स्विमिंग सूट) पहने गाती है, ‘यमुना जलि खेलू खेल कन्हैया का लाजता…’ (मैं यमुना में जलक्रीड़ा कर रही हूं, कृष्ण तुम क्यों शरमा रहे हो)। सिचुएशन ऐसी थी कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशासन और ब्रह्मचर्य के दर्शन में विश्वास करने वाले हीरो को हीरोइन लुभाती है। इसकी खूब आलोचना हुई, मगर लोगों ने फिल्म को हिट कर दिया।

यह पहला मौका था जब किसी हीरोइन ने फिल्म में बिकिनी पहनी थी। हालांकि पहली बार बिकिनी पहनने का श्रेय शर्मिला टैगोर को दिया जाता है क्योंकि बिकिनी को विवाद के साथ बड़े पैमाने पर प्रतिष्ठा और चर्चा मिली थी 1967 की ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ में। इसकी हीरोइन थी शर्मिला टैगोर। टैगोर को हिंदी फिल्मों में शक्ति सामंत ही 1964 में ‘कश्मीर की कली’ में लेकर आए थे।

पेशे से शिक्षक सामंत तब तक कलकत्ता (हावड़ा ब्रिज, 1958), सिंगापुर (सिंगापुर, 1960) और कश्मीर (कश्मीर की कली 1964) की खूबसूरती को परदे पर उतार चुके थे और 1967 में पेरिस की सुंदरता पर लट्टू होकर ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ बना रहे थे। उनके हीरो शम्मी ने उनसे कहा कि वह हेलिकॉप्टर पर लटक कर एक गाना गाना चाहते हैं। इच्छा जाहिर कर शम्मी तो भूल गए, मगर उस गाने की कल्पना सामंत ने कर ली थी। नीचे नीला समुंदर होगा, उसके सीने पर वाटर स्केटिंग करते युवक-युवतियों के साथ नीली वन पीस बिकिनी पहने शर्मिला टैगोर होंगी, स्केटिंग से उछलते पानी की सफेद बूंदों को कैमरा फिल्मबंद करेगा और इसके ठीक ऊपर हवा में हेलिकॉप्टर से शम्मी गाना गाते हुए अपनी इच्छा पूरी करेंगे। गजब का खूबसूरत सीन होगा।

सामंत को उम्मीद थी कि शर्मिला बिकिनी पहनने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकि 1966 में टैगोर ने वन पीस बिकिनी क्या टू पीस बिकिनी पहन फोटो सेशन करवाया था, जो एक फिल्म पत्रिका के कवर पर छपा था। इसकी खूब चर्चा हुई थी। सामंत के दिमाग में खटका सिर्फ यह था कि क्या भारतीय समाज इसे पचा पाएगा?

सामंत ने जोखिम उठाना तय किया। सुबह शूटिंग से पहले शम्मी से कहा कि तैयार रहो हेलिकॉप्टर से लटकने के लिए। शम्मी ठंडे पड़ गए क्योंकि उन्होंने तो मजाक किया था। जब सामंत नहीं माने तो दो पैग लगा कर शम्मी तैयार हो गए। इस तरह नीले समुंदर में नीली वन पीस बिकिनी पहने उतरी शर्मिला टैगोर। ऊपर हेलिकॉप्टर से लटकते हुए शम्मी ने गाया, ‘आसमान से आया फरिश्ता…’। फिल्म रिलीज हुई तो खूब हंगामा हुआ। सामंत की आलोचना भी हुई मगर दर्शकों ने फिल्म को सुपर हिट कर दिया।

तब से अब पचास साल गुजर गए। दर्शकों की पीढ़ियां बदल गर्इं। अब किसी हीरोइन के बिकिनी पहनने से बवाल नहीं मचता है। शर्मिला के बाद मुमताज, परवीन बॉबी, जीनत अमान से लेकर आज की प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोन, श्रद्धा कपूर सभी बिकिनी पहन चुकी हैं। मगर आज के दर्शकों के लिए हीरोइनों का बिकिनी पहनना बेमानी हो गया है। अब न उसपर विवाद होता है, न ही उसकी चर्चा।

 

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