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हमारी याद आएगीः एक रुपया बयाना और लाख रुपए का चेक

प्राण की व्यावसायिकता के कई किस्से हैं। ‘जंजीर’ फिल्म के गाने ‘यारी है ईमान मेरा...’ की तरह प्राण ने भी हमेशा दोस्तों की कदर की। लेकिन कोई दोस्ती का बेजा फायदा उठाता, तो मुंहफट प्राण उसे माकूल जवाब देने में देर नहीं लगाते थे।

प्राण कृष्ण सिकंदः 12 फरवरी 1920-12 जुलाई 2013

प्राण कृष्ण सिकंद

प्राण उन अभिनेताओं में से थे जो बहुत ही व्यावसायिक थे। ‘उपकार’ की शूटिंग के दौरान एक रात उन्हें अपनी बहन के निधन की सूचना मिली। अगले दिन उन्हें ‘उपकार’ की शूटिंग करनी थी और उनके न होने से निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार का लाखों का नुकसान हो जाता। वे अगले दिन सुबह सात बजे सेट पर थे। शूटिंग खत्म होने के बाद उन्होंने निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार को बहन के निधन की सूचना दी, तो मनोज कुमार उन्हें देखते ही रह गए।

प्राण की व्यावसायिकता के कई किस्से हैं। ‘जंजीर’ फिल्म के गाने ‘यारी है ईमान मेरा…’ की तरह प्राण ने भी हमेशा दोस्तों की कदर की। लेकिन कोई दोस्ती का बेजा फायदा उठाता, तो मुंहफट प्राण उसे माकूल जवाब देने में देर नहीं लगाते थे। प्राण और राज कपूर का बीस सालों का दोस्ताना था। राज कपूर की 1953 में बनी फिल्म ‘आह’ और 1960 की ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में प्राण ने काम किया था। 1973 तक बीस सालों में प्राण ने राज कपूर के निर्देशन में बनी एकमात्र फिल्म ‘बॉबी ’(1973) में काम किया। मगर इस दौरान एक ऐसी घटना घटी कि दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और उन्होंने फिर कभी साथ काम नहीं किया।

‘मेरा नाम जोकर’ की विफलता के बाद राज कपूर अपनी अगली फिल्म ‘बॉबी’ राजेश खन्ना और डिंपल कापड़िया को लेकर बनाना चाहते थे। राजेश खन्ना ‘आराधना’ (1969) की सफलता से हिट हीरो बन गए थे और उन्हें साइन करना मतलब मोटी रकम का इंतजाम करना था। लिहाजा राज कपूर ने ऋषि कपूर को फिल्म में हीरो बना दिया। प्राण ने अपने मित्र की स्थिति को देखते हुए मात्र एक रुपए साइनिंग अमाउंट लेकर ‘बॉबी’ इस शर्त पर की कि अगर फिल्म हिट हो जाती है तो राज कपूर उन्हें उनकी उस वक्त की मार्केट प्राइज देंगे।

‘बॉबी’ 1973 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई, मगर राज कपूर प्राण को उनकी मार्केट प्राइज देने को लेकर उलझन में पड़ गए कि कितनी रकम दी जाए, जिससे प्राण को बुरा न लगे। उधर प्राण के सचिव ललित भाई जब भी राज कपूर से मिलते, उन्हें याद दिलाते कि प्राण को उनकी मार्केट प्राइज अदा कर देनी चाहिए। तंग आए राज कपूर ने एक दिन पूछा कि प्राण की मार्केट प्राइज क्या है और यह भी कहा कि प्राण उनके मित्र है, लिहाजा वे खुद प्राण से बात कर लेंगे। सचिव ने कहा कि उनसे क्या बात करना, मैं उनका सेक्रेटरी हूं। वे राज कपूर से वक्त-बेवक्त तगादा लगाते जिससे राज चिढ़ने लगे थे।

एक दिन एक फिल्मी पार्टी में जब ललित भाई ने राज कपूर को फिर याद दिलाया कि प्राण का मेहनताना अभी तक बकाया है। साथ ही कुछ गैरजरूरी जुमले भी जड़ दिए जिनका अर्थ था कि ‘मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं’। राज कपूर को ये बातें अपनी हैसियत गिराने वाली लगीं और उन्होंने तुरंत अपनी जेब से चेक बुक निकाली और लाख रुपए का चेक काट कर कहा कि यह रखो बाकी हिसाब वे प्राण से खुद मिलकर कर लेंगे।

ललित भाई ने चेक पर लिखी रकम देखी और उससे नाखुशी जताते हुए कहा कि इस चेक का कोई मतलब नहीं। इतना ही नहीं उन्होंने उस चेक के टुकड़े-टुकड़े कर वापस राज कपूर को दे दिया। राज कपूर के तिलमिलाने के लिए इतना काफी था। आज तक उनसे इस तरह का बर्ताव करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई थी। वे गुस्से में भरे हुए सीधे प्राण के पास जा पहुंचे। उन्होंने प्राण से जाकर ललित भाई की शिकायत की और कहा कि उनका व्यवहार बहुत ही अशोभनीय है। उन्हें उम्मीद थी कि प्राण अपने सचिव के व्यवहार के लिए उनसे माफी मांगेंगे। मगर प्राण ने उनकी उम्मीदों से उलट कहा, ‘उसने ठीक किया। आपको क्या लगता है कि वह आपके रवैये के लिए आपका शुक्रिया अदा करता?’

राज कपूर को प्राण की बात बहुत बुरी लगी। इतनी बुरी कि 20 साल से चले आ रहे दोनों के रिश्ते इस घटना के बाद बुरी तरह दरक गए। इतने कि न तो राज कपूर ने फिर अपनी किसी फिल्म के लिए प्राण से संपर्क किया और न ही प्राण ने राज कपूर के साथ काम किया।

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