हाल ही में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के बाद प्रकाश राज का नाम बेंगलुरु की मतदाता सूची से हटा दिया गया। जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कि इसी निर्वाचन क्षेत्र में उनका जन्म हुआ, बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं और पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई है। मगर अब कुछ और ही सच सामने आया है। चुनाव आयोग ने वैरीफिकेशन के बाद बताया जिस पते की बात प्रकाश राज कर रहे थे, वहां वो रहते ही नहीं।

दरअसल वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद प्रकाश राज ने इंस्टाग्राम और एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा था, “नाइस जोक, नो? मेरा जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ। मैं यहीं रहा, मेरी स्कूलिंग, कॉलेज और थिएटर का दौर यहीं बीता। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं इस सीट से सांसद का चुनाव भी लड़ चुका हूं।”

अब चुनाव आयोग ने खोली पोल

आयोग के मुताबिक, प्रकाश राज ने बेंगलुरु में जिस पते को अपना बताया था, वह उस पते पर रहते ही नहीं हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि जरूरी जांच और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया। चुनाव आयोग ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची से उनका नाम हटाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है और इसके लिए उनके बताए गए पते का सत्यापन भी किया गया था।

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बता दें कि प्रकाश राज के सोशल मीडिया वीडियो के बाद चुनाव आयोग ने उनके दावे की जांच कराई। आयोग की ओर से स्थानीय BLO को कुछ अधिकारियों के साथ उस पते पर भेजा गया, जिसे प्रकाश राज ने बेंगलुरु में अपना पता बताया था। हालांकि, जांच के दौरान प्रकाश राज वहां नहीं मिले।

अधिकारियों ने आसपास रहने वाले लोगों से भी इस बारे में जानकारी ली। पड़ोसियों ने बताया कि प्रकाश राज पहले इस पते पर रहते थे, लेकिन करीब चार साल पहले वह यहां से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तब से यह घर खाली पड़ा है और वहां कोई नहीं रहता।

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जांच के दौरान अधिकारियों ने पड़ोसियों के बयान भी रिकॉर्ड किए और उनका वीडियो बनाया। चुनाव आयोग ने इन सबूतों के आधार पर प्रकाश राज के दावे को गलत और तथ्यहीन बताया। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई पते के सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है।