साउथ से लेकर बॉलीवुड तक की फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता प्रकाश राज अक्सर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वह कई मुद्दों पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए नजर आते हैं और उनसे सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करते हैं। अब हाल ही में उन्होंने पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले कमेंट पर रिएक्ट किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में वीडियो शेयर करते हुए लिखा, दिमागी बनो… बेवकूफ नहीं, सवाल करो… गुलामी नहीं।
वीडियो में क्या बोले प्रकाश राज
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर प्रकाश राज ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें वह कहते हैं, “हेलो साथियों। कल स्वतंत्रता दिवस था और हमने दो लोगों को काम करते देखा। एक हमारे सुप्रीम लीडर, जिन्होंने आखिरकार यह मान लिया कि जो लोग सरकार से जवाब मांगते हैं, मुश्किल सवाल पूछते हैं और अपनी बात रखते हैं, वे ‘दिमागी’ हैं। इतने सालों तक उन्हें अर्बन नक्सल, विकास-विरोधी, कीड़ा और कॉकरोच कहने के बाद अब उन्होंने एक नया नाम दिया है- ‘दिमागी नक्सल’।”
इसके बाद प्रकाश राज ने सीजेपी के वॉलंटियर्स की तारीफ की, जो असली मुद्दों को सामने ला रहे हैं। उन्होंने कहा, “दूसरी तरफ, जिन्हें तथाकथित तौर पर दिमागी नक्सल या कॉकरोच कहा जा रहा है, वे गांवों के सरकारी स्कूलों में जाकर वहां की असली हालत दिखा रहे थे। वे बता रहे थे कि स्कूलों में टॉयलेट, क्लासरूम और शिक्षक तक नहीं हैं।
सड़कें नहीं हैं और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हमारे बच्चे किस तरह परेशान हो रहे हैं। अब इन दोनों भारतीयों को देखने के बाद यह आपको तय करना है कि आप किसका साथ देंगे। दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं, अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं।”
प्रधानमंत्री मोदी से की ये अपील
आखिर में राज ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री मोदी से भी अपील की। उन्होंने कहा कि रेड फोर्ट का इस्तेमाल नाम रखने के लिए करने के बजाय देश की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। अभिनेता ने कहा, “मेरे प्यारे दोस्त, रेड फोर्ट का इस्तेमाल नामकरण के लिए करना बंद कीजिए।
इसके बजाय देश के सामने मौजूद असली मुद्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आप सरकारी स्कूलों को बंद होने से रोकने, साफ-सुथरे टॉयलेट, पर्याप्त शिक्षकों, पर्याप्त क्लासरूम और बच्चों के लिए बेहतर माहौल बनाने से शुरुआत करेंगे? आपके पास कुछ साल बचे हैं। उम्मीद है कि आप कुछ अच्छा करेंगे।”
क्या बोले थे पीएम मोदी?
बता दें कि पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भाषण देते हुए कहा था, “भले ही जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सल खत्म हो गए हों, लेकिन दिमागी नक्सल अब भी मौके की तलाश में हैं। वह हिंसा के तरीके ढूंढ रहे हैं और देश को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग किया जाना चाहिए।”
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