आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर 2’ जहां बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर रही हैं, वहीं कई जगहों पर इसे लेकर बवाल भी खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश में ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर सियासी घमासान चल रही है। फिल्म में माफिया अतीक अहमद से मिलते-जुलते किरदार और नोटबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दों को दिखाए जाने पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फिल्म को “बकवास” करार देते हुए कहा कि ऐसी कहानी पर न तो कोई भरोसा करेगा और न ही इसे देखने में दिलचस्पी होगी। उन्होंने नोटबंदी को लेकर भी फिल्म में किए गए चित्रण पर सवाल उठाए और कहा कि यह फैसला “मास्टर स्ट्रोक” नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला कदम था। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए राजनीतिक बयानबाजी भी की।

वहीं, पूर्व सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि अतीक अहमद के ISI से किसी भी तरह के संबंध का अब तक कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। ऐसे में फिल्म में दिखाया गया यह एंगल पूरी तरह आधारहीन लगता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजकल फिल्में समाज को संदेश देने के बजाय सियासत के मकसद से बनाई जा रही हैं।

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AIMIM नेता वारिस पठान ने भी फिल्म की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों की तरह इसमें भी एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया है और ऐसी फिल्मों पर रोक लगनी चाहिए।

सपा सांसद राजीव राय ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी समय में इस तरह की फिल्मों की रिलीज संयोग नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्मों के जरिए माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है और सरकार परोक्ष रूप से इन्हें समर्थन देती है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, ‘धुरंधर 2’ में 2016 की नोटबंदी को एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में दिखाया गया है, जिससे हवाला के जरिए आने वाले नकली नोटों की साजिश को नाकाम कर दिया जाता है। फिल्म में आतिफ अहमद नाम का किरदार दिखाया गया है, जो लुक और स्टाइल में अतीक अहमद से काफी मिलता-जुलता है। इस किरदार को अभिनेता सलीम सिद्दीकी ने निभाया है।

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कहानी के अनुसार, यह किरदार जेल में रहते हुए भी अपना आपराधिक नेटवर्क चलाता है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा दिखाया गया है। फिल्म में एक डायलॉग भी है- “जब तक आतिफ अहमद है, जेल में हो या बाहर… वो सब संभाल लेगा।”

इसके अलावा, फिल्म में यूपी पुलिस के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार से प्रेरित किरदार भी दिखाया गया है, जिसमें अपराध से जुड़ी फाइलों और ऑपरेशन की झलक दिखाई गई है। कुल मिलाकर, फिल्म की कहानी, किरदारों की समानता और राजनीतिक घटनाओं के चित्रण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे यह साफ है कि रिलीज के साथ ही यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सियासी बहस का भी केंद्र बन गई है। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी फिल्म को बीजेपी का प्रचारक कहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…